नेशनल चैंपियन बनी... पर जिंदगी की रेस हार गई
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अस्पताल कमियों को सेहत का राज बताने वाली व स्पोर्ट्स में अधिकतर मुकाबले जीतने वाली विमला सैनी जिंदगी की रेस हार गई। मगर उनके साथी व अस्पताल के स्टाफ ताउम्र उनसे प्रेरणा लेते रहेंगे। बुधवार को वह सड़क हादसे का शिकार हुईं। पूरे जनरल अस्पताल में शोक की लहर सी दौड़ गई।
हाल ही में 19 से 20 मार्च तक रोहतक में आयोजित 35वीं नेशनल इंडिया मास्टर्स एथलेटिक चैंपियनशिप में उन्होंने दो कांस्य पदक हासिल किए थे। अब तक खेल में करीब दो सौ से ज्यादा पदक वह हासिल कर चुकी थीं। यही नहीं उन्हें रिटायरमेंट के बाद अच्छे काम की वजह से ही जनरल अस्पताल में सुपरवाइजर के पद पर रखा गया था।
परिवार स्पोर्ट्स से जुड़ा
विमला का पूरा परिवार स्पोर्ट्स से जुड़ा है। विमला के पति गुरदयाल सिंह सैनी भी एक अच्छे एथलीट रहे हैं। फिलहाल वह चंडीगढ़ एथलेटिक एसोसिएशन के सेक्रेटरी हैं। दोनों बेटे रुपिंदर सिंह सैनी और रवनीत सिंह सैनी कोच हैं और लॉन टेनिस के अच्छे खिलाड़ी हैं।
एसएमओ मानती हैं अपना आइडल
जनरल अस्पताल की सीनियर मेडिकल अफसर डॉ. रीटा कालरा ने बताया कि विमला की बदौलत वह नेशनल स्तर पर एथलेटिक मीट में पहचान बना पाई हैं। विमला को वह स्पोर्ट्स में अपना आइडल मानती हैं। उन्होंने बताया कि वह कॉलेज टाइम में एक अच्छी एथलीट रही हैं।
जॉब में आने के बाद विमला ने उन्हें मास्टर एथलेटिक मीट में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया और रोजाना शाम को ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में विमला ने उन्हें रनिंग की प्रैक्टिस करवाई। उसके बाद वह मास्टर एथलेटिक मीट में भाग लेने लगी और अच्छा प्रदर्शन करते हुए नेशनल स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
गुरु को खो दिया
चंडीगढ़ सेक्टर 16 स्थित जनरल अस्पताल में तैनात स्टाफ नर्स नीरू बाला कक्कड़ ने बताया कि रोहतक में 19-20 मार्च को आयोजित नेशनल मास्टर एथलेटिक्स मीट में विमला सैनी की वजह से ही वह पार्टिसिपेट कर पाई हैं। क्योंकि उन्हें पता नहीं था कि मास्टर एथलेटिक मीट भी होता है। विमला ने उन्हें प्रेरित किया और पहली बार में 400 रिले रेस में ब्रांज मेडल हासिल किया। उन्होंने बताया कि विमला उनके लिए गुरु थी।