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पीजीआई को सफलता: आईसीयू के मरीजों के लिए बेहद घातक जीवाणु की खोज, 60 फीसदी तक बढ़ा देता है मृत्यु दर

Fri, 27 Aug 2021 02:35 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Fri, 27 Aug 2021 02:35 AM IST
सार

शोध के दौरान स्टेनोट्रोफोमोनास सेपिलिया नामक जीवाणु के बारे में पता लगाया गया। इसकी खास बात यह है कि यह आईसीयू के मरीजों में उत्पन्न होता है। इससे उन मरीजों में मृत्यु दर 20 से 60 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।

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PGI Microbiology Department and CSIR have discovered Species of Bacteria which is extremely lethal for ICU patients 
पीजीआई चंडीगढ़ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ पीजीआई माइक्रोबायोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों ने सीएसआईआर के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर जिनोम अध्ययन के दौरान एक ऐसे जीवाणु के प्रजाति की खोज की है, जो आईसीयू के मरीजों के लिए बेहद घातक है। हैरान करने वाली बात यह है कि उस जीवाणु पर दी जाने वाली हाई डोज एंटीबायोटिक दवाएं भी कारगर नहीं होती।

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यह जीवाणु उससे बचाव के लिए अपने अंदर एंजाइम उत्पन्न कर लेता है। शोध के दौरान उस जीवाणु से संबंधित एंटीबायोटिक टेस्टिंग भी की गई है, ताकि उससे बचाव के लिए दवाओं के प्रयोग का मानक निर्धारित किया जा सके। विशेषज्ञों का दावा है कि यह देश में अब तक का अपने तरह का पहला शोध है, जिसमें मनुष्य के अंदर उत्पन्न होने वाले जीवाणु से होने वाले संक्रमण का पता लगाया जा सका है।
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पीजीआई माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्रो. विकास गौतम ने बताया कि शोध के दौरान स्टेनोट्रोफोमोनास सेपिलिया नामक जीवाणु के बारे में पता लगाया गया। इसकी खास बात यह है कि यह आईसीयू के मरीजों में उत्पन्न होता है। इससे उन मरीजों में मृत्यु दर 20 से 60 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। यह मरीज के खून के साथ शरीर के किसी भी अंग को संक्रमित कर सकता है। 
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जानकारी के अभाव में विशेषज्ञ इस स्थिति से बचाव के लिए उस मरीज को हाई डोज एंटीबायोटिक देते हैं, जिसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता। ऐसे में इस जीवाणु की पहचान बेहद जरूरी हो गई थी। शोध के दौरान इस जीवाणु की पहचान करने के साथ इससे बचाव के लिए दवाओं का वर्गीकरण भी किया गया है।

प्रो. विकास गौतम ने बताया कि शोध के दौरान आईसीयू के 9 मरीजों का होल जिनोम सीक्वेंसिंग टेस्ट किया गया। इसमें इस जीवाणु की मौजूदगी मिली। प्रो. विकास ने बताया कि इस शोध के बाद आईसीयू के उन मरीजों के इलाज में आसानी होगी, जिन पर एंटीबायोटिक दवाओं का असर भी न के बराबर होता था।


इन्होंने मिलकर किया काम
पीजीआई माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्रो. विकास गौतम, जीएमसीएच-32 की डॉक्टर लिपिका, पीयू की डॉ. पविंदर कौर, सीएसआईआर के डॉ. प्रभु पाटिल, डॉ. प्रशांत पाटिल, डॉ. कनिका व ईमटेक के डॉ. सुरेश ने मिलकर इस शोध को अंजाम तक पहुंचाया। 
 

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