फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   DC office employees strike in Jalandhar of Punjab

जालंधर में हड़ताल से लोग बेहाल: जवाब मिला- घर जाओ, आज काम नहीं होगा, मायूस होकर लौटे

Tue, 11 Oct 2022 05:26 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Tue, 11 Oct 2022 05:26 PM IST
सार

नकोदर से आए फौजा सिंह रेवेन्यू केसों की सुनवाई के लिए पहुंचे थे लेकिन स्टाफ के दरिया बिछाकर बाहर बैठे देख निराश होकर लौट गए। जाते हुए फौजा सिंह ने कहा कि अफसरों के बैठने से क्या होता है, जब मुलाजिम ही कलम छोड़कर बैठे हों। सरकार के वादे लोगों के रोजमर्रा के कामों को नहीं होने दे रही।

विज्ञापन
DC office employees strike in Jalandhar of Punjab
डीसी दफ्तर एंप्लाइज यूनियन की हड़ताल के दौरान अरदास करते कर्मचारी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

जालंधर में डीसी दफ्तर इंप्लाइज यूनियन की हड़ताल से लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। सबसे ज्यादा परेशानी दूर-दराज गांवों से आए लोगों को हुई क्योंकि उन्हें तो डीसी दफ्तर के कर्मचारियों की हड़ताल के बारे में पता ही नहीं था। डीसी दफ्तर के कर्मचारी मांगों को लेकर 15 अक्तूबर तक हड़ताल पर हैं और इससे 42 तरह की सेवाएं ठप हो गई हैं। लोग दिनभर भटकते रहे और बाद दोपहर जवाब मिला, घर जाओ, आज काम नहीं होंगे। 

विज्ञापन


मंगलवार को डीसी दफ्तर पहुंचे काकू निवासी गांव गुरु तेग बहादुर नगर बूटा पिंड ने बताया कि वह भाई संजय की जमानत के कागज लेकर दो दिन से भटक रहे हैं। लैंडमार्क तस्दीक करवाने को लेकर सुबह से खड़े हैं, क्योंकि भाई को हेरोइन केस में जमानत दिलवानी थी। कर्मचारी कह रहे हैं 15 अक्तूबर तक कोई काम नहीं होगा। जब यह बात मां सुनीता रानी को बताई तो वह परेशान हो उठी, सरकार और जिला प्रशासन को जमकर कोसा। 
विज्ञापन


66 वर्षीय स्वर्ण दास निवासी गांव घनाल जालंधर, जो सरकारी चौकीदार हैं। अगस्त से तनख्वाह के इंतजार में हैं। जब मंगलवार को दफ्तर से मांगी गई पासबुक और आधार कार्ड की कॉपी जमा करवाने पहुंचे तो पता चला स्टाफ ही हड़ताल पर है। तनख्वाह न मिलने से पहले ही त्योहार फीके गुजर रहे हैं। अब तो घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। सुबह से काम के लिए खड़े थे। बाद दोपहर जवाब मिला, कुछ नहीं होगा, घर चले जाओ। जिससे वह मायूस होकर लौट रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रजिस्ट्री करवाने आए कस्बा आदमपुर के गांव जमशेर के रणजीत सिंह ने कहा कि दो दिन से सुबह आठ बजे डीसी दफ्तर आ रहा हूं लेकिन काम नहीं हो सका। हम कर्मचारियों के दफ्तरों के बाहर कागजों की तस्दीक के लिए उनके दफ्तरों के बाहर दिनभर बैठे रहते हैं और वो धरने पर, सरकार और प्रशासन की नाकामी का शिकार लोग हो रहे हैं। जब मांगे मान ली थी तो पूरी क्यों नहीं की, सरकार और प्रशासन को लोगों की परवाह नहीं है, कर्मचारियों की हड़ताल से अधिकारी मुक्त है और मुख्यमंत्री तो पंजाब छोड़कर दूसरे राज्यों में प्रचार कर बड़ी-बड़ी डींगे मार रहे हैं पर काम कुछ नहीं दिख रहे। 

नकोदर से आए फौजा सिंह रेवेन्यू केसों की सुनवाई के लिए पहुंचे थे लेकिन स्टाफ के दरिया बिछाकर बाहर बैठे देख निराश होकर लौट गए। जाते हुए फौजा सिंह ने कहा कि अफसरों के बैठने से क्या होता है, जब मुलाजिम ही कलम छोड़कर बैठे हों। सरकार के वादे लोगों के रोजमर्रा के कामों को नहीं होने दे रही।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed