जालंधर में हड़ताल से लोग बेहाल: जवाब मिला- घर जाओ, आज काम नहीं होगा, मायूस होकर लौटे
नकोदर से आए फौजा सिंह रेवेन्यू केसों की सुनवाई के लिए पहुंचे थे लेकिन स्टाफ के दरिया बिछाकर बाहर बैठे देख निराश होकर लौट गए। जाते हुए फौजा सिंह ने कहा कि अफसरों के बैठने से क्या होता है, जब मुलाजिम ही कलम छोड़कर बैठे हों। सरकार के वादे लोगों के रोजमर्रा के कामों को नहीं होने दे रही।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जालंधर में डीसी दफ्तर इंप्लाइज यूनियन की हड़ताल से लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। सबसे ज्यादा परेशानी दूर-दराज गांवों से आए लोगों को हुई क्योंकि उन्हें तो डीसी दफ्तर के कर्मचारियों की हड़ताल के बारे में पता ही नहीं था। डीसी दफ्तर के कर्मचारी मांगों को लेकर 15 अक्तूबर तक हड़ताल पर हैं और इससे 42 तरह की सेवाएं ठप हो गई हैं। लोग दिनभर भटकते रहे और बाद दोपहर जवाब मिला, घर जाओ, आज काम नहीं होंगे।
मंगलवार को डीसी दफ्तर पहुंचे काकू निवासी गांव गुरु तेग बहादुर नगर बूटा पिंड ने बताया कि वह भाई संजय की जमानत के कागज लेकर दो दिन से भटक रहे हैं। लैंडमार्क तस्दीक करवाने को लेकर सुबह से खड़े हैं, क्योंकि भाई को हेरोइन केस में जमानत दिलवानी थी। कर्मचारी कह रहे हैं 15 अक्तूबर तक कोई काम नहीं होगा। जब यह बात मां सुनीता रानी को बताई तो वह परेशान हो उठी, सरकार और जिला प्रशासन को जमकर कोसा।
66 वर्षीय स्वर्ण दास निवासी गांव घनाल जालंधर, जो सरकारी चौकीदार हैं। अगस्त से तनख्वाह के इंतजार में हैं। जब मंगलवार को दफ्तर से मांगी गई पासबुक और आधार कार्ड की कॉपी जमा करवाने पहुंचे तो पता चला स्टाफ ही हड़ताल पर है। तनख्वाह न मिलने से पहले ही त्योहार फीके गुजर रहे हैं। अब तो घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। सुबह से काम के लिए खड़े थे। बाद दोपहर जवाब मिला, कुछ नहीं होगा, घर चले जाओ। जिससे वह मायूस होकर लौट रहे हैं।
रजिस्ट्री करवाने आए कस्बा आदमपुर के गांव जमशेर के रणजीत सिंह ने कहा कि दो दिन से सुबह आठ बजे डीसी दफ्तर आ रहा हूं लेकिन काम नहीं हो सका। हम कर्मचारियों के दफ्तरों के बाहर कागजों की तस्दीक के लिए उनके दफ्तरों के बाहर दिनभर बैठे रहते हैं और वो धरने पर, सरकार और प्रशासन की नाकामी का शिकार लोग हो रहे हैं। जब मांगे मान ली थी तो पूरी क्यों नहीं की, सरकार और प्रशासन को लोगों की परवाह नहीं है, कर्मचारियों की हड़ताल से अधिकारी मुक्त है और मुख्यमंत्री तो पंजाब छोड़कर दूसरे राज्यों में प्रचार कर बड़ी-बड़ी डींगे मार रहे हैं पर काम कुछ नहीं दिख रहे।
नकोदर से आए फौजा सिंह रेवेन्यू केसों की सुनवाई के लिए पहुंचे थे लेकिन स्टाफ के दरिया बिछाकर बाहर बैठे देख निराश होकर लौट गए। जाते हुए फौजा सिंह ने कहा कि अफसरों के बैठने से क्या होता है, जब मुलाजिम ही कलम छोड़कर बैठे हों। सरकार के वादे लोगों के रोजमर्रा के कामों को नहीं होने दे रही।