दलाई लामा बोले- कुछ लोगों के चलते भारत की धर्म निरपेक्षता पर सवाल उठाना गलत
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चीनी छात्रों को भारत आना चाहिए और यह जानना चाहिए कि लोकतंत्र कैसे काम करता है। यह बात मंगलवार को चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी पहुंचे बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा ने पत्रकारों से बातचीत में कहीं। वह श्री गुरु नानक देव जी के 550 वें प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में शामिल होने पहुंचे हुए थे।
उन्होंने कहा कि भारत एक धर्म निरपेक्ष देश है। कुछ लोगों व घटनाओं के चलते उसकी धर्मनिरपेक्षता पर सवाल नहीं उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि चीन में अभी भी मीडिया स्वतंत्र नहीं है। वहां पर कई चीजों पर अंकुश है।
दलाई लामा ने कहा, कि कुछ चीनी छात्रों ने कुछ समय पहले मुझसे संपर्क किया था। उन्हें पहले लगता था कि मैं बहुत रूढ़िवादी हूं। लेकिन मिलने के बाद उनकी मेरी बारे में सोच बदल गई। चीनी छात्रों को पढ़ने के लिए भारत आना चाहिए और भारतीय संस्थानों को भी उनका स्वागत करना चाहिए।
भारत और चीन का एक दूसरे के बिना नहीं हो सकता गुजारा
पत्रकारों की तरफ से चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत दौरे के बारे में पूछे सवालों के जवाब में दलाई लामा ने कहा- भारत और चीन दुनिया के सबसे बड़ी आबादी वाले देश हैं, जिसके चलते इनका बातचीत के मंच पर इकट्ठा होना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि वह शुरू से ही बातचीत के द्वारा दो तरफे मसलों के हल करने के पक्षधर हैं और उम्मीद है कि भविष्य में भारत-चीन की बातचीत के सार्थक नतीजे सामने आएंगे। व्यापारिक कारणों से दोनों देश एक दूसरे पर निर्भर हैं, जिसके चलते भारत-चीन का एक दूसरे के बिना गुजारा नहीं हो सकता। अर्थव्यवस्था की उन्नति के लिए यह जरूरी भी है।
नेताओं को बोलने में संयम बरतना चाहिए
दलाई लामा ने कहा कि पाकिस्तान को अपने पड़ोसी मुल्क से बेहतर संबंध बनाने चाहिए। यह बातचीत के द्वारा ही संभव है। दलाई लामा ने यूएन के मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विनम्रता, संयम और सहजता की प्रशंसा की।
उन्होंने कहा कि यूएन में मोदी द्वारा बौद्ध धर्म का उदाहरण के साथ शांति की बात करने के बड़े मायने हैं, जबकि इसके उलट पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की तरफ से जज्बाती भाषण देने से अच्छा संदेश नहीं गया। उन्होंने कहा कि विश्वभर के नेताओं को बोलते वक्त संयम से काम लेना चाहिए और जज्बाती भाषण से परहेज करना चाहिए है।