{"_id":"616dcbc9b9839a281e6edef7850dcda4","slug":"czech-bounce-case-accused-acquitted-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"चेक बाउंस मामले का आरोपी बरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चेक बाउंस मामले का आरोपी बरी
ब्यूरा/अमर उजाला/ यमुनानगर।
Updated Wed, 17 Sep 2014 01:18 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चेक बाउंस के मामले में सौरभ गुप्ता की अदालत ने एक अहम फैसला देते हुए आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया है। जबकि शिकायतकर्ता को परेशान करने के लिए नोटिस जारी किया गया है। माडर्न कॉलोनी के शिकायतकर्ता गुरमीत सिंह ने गाबा अस्पताल के समीप निवासी विनोद कुमार नेहरा पर चेक बाउंस होने और पैसे न मिलने पर कोर्ट में 2010 में मामला डाला था।
आरोपी विनोद कुमार नेहरा ने अपने वकील विरेंद्र सहगल के माध्यम से कोर्ट में बताया कि उसने शिव शक्ति सोसाइटी से लोन लिया था, जो 30 नवंबर 2005 को अदा कर दिया था। उस समय सोसाइटी की सेक्रेटरी शिकायतकर्ता की पत्नी थी और सोसाइटी लोन देने की एवज में चेक लिया करती थी। इसी तरह से चेक उससे भी वर्ष 2000 में लोन लेते समय लिया गया था, परंतु लोन अदा करने पर चेक वापस नहीं किया गया।
करीब नौ वर्षों के बाद इस चेक को मुबलिग डेढ़ लाख रुपये भरकर नवंबर 2010 में बैंक में लगा दिया। जो बाउंस हो गया और शिकायतकर्ता ने उस पर झूठा मुकदमा कोर्ट में दायर कर दिया। आरोपी के वकील विरेंद्र सेहगल द्वारा आठ गवाह पेश किए गए। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद यह माना की शिकायत कर्ता गुरमीत सिंह ने झूठा केस डाला है। कोर्ट ने आरोपी को बरी कर शिकायतकर्ता को 250 सीआरपीसी का नोटिस जारी किया है।
विज्ञापन
क्या है 250 सीआरपीसी का नोटिस
पेशे से वकील और सहगल एंड सहगल एसोसिएशन के अधिवक्ता विरेंद्र सहगल ने बताया कि कोर्ट जब किसी केस में यह समझती है कि शिकायतकर्ता ने झूठा केस दायर करके आरोपी को मानसिक व आर्थिक प्रताड़ना दी है, तब कोर्ट को यह अधिकार होता है कि वह शिकायतकर्ता को 250 सीआरपीसी का नोटिस जारी करके यह पूछे कि शिकायतकर्ता के खिलाफ कार्रवाई करके आरोपी को मुआवजा क्यों न दिलाया जाए।
विज्ञापन
आरोपी विनोद कुमार नेहरा ने अपने वकील विरेंद्र सहगल के माध्यम से कोर्ट में बताया कि उसने शिव शक्ति सोसाइटी से लोन लिया था, जो 30 नवंबर 2005 को अदा कर दिया था। उस समय सोसाइटी की सेक्रेटरी शिकायतकर्ता की पत्नी थी और सोसाइटी लोन देने की एवज में चेक लिया करती थी। इसी तरह से चेक उससे भी वर्ष 2000 में लोन लेते समय लिया गया था, परंतु लोन अदा करने पर चेक वापस नहीं किया गया।
विज्ञापन
करीब नौ वर्षों के बाद इस चेक को मुबलिग डेढ़ लाख रुपये भरकर नवंबर 2010 में बैंक में लगा दिया। जो बाउंस हो गया और शिकायतकर्ता ने उस पर झूठा मुकदमा कोर्ट में दायर कर दिया। आरोपी के वकील विरेंद्र सेहगल द्वारा आठ गवाह पेश किए गए। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद यह माना की शिकायत कर्ता गुरमीत सिंह ने झूठा केस डाला है। कोर्ट ने आरोपी को बरी कर शिकायतकर्ता को 250 सीआरपीसी का नोटिस जारी किया है।
विज्ञापन
क्या है 250 सीआरपीसी का नोटिस
पेशे से वकील और सहगल एंड सहगल एसोसिएशन के अधिवक्ता विरेंद्र सहगल ने बताया कि कोर्ट जब किसी केस में यह समझती है कि शिकायतकर्ता ने झूठा केस दायर करके आरोपी को मानसिक व आर्थिक प्रताड़ना दी है, तब कोर्ट को यह अधिकार होता है कि वह शिकायतकर्ता को 250 सीआरपीसी का नोटिस जारी करके यह पूछे कि शिकायतकर्ता के खिलाफ कार्रवाई करके आरोपी को मुआवजा क्यों न दिलाया जाए।