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शौर्य दिवस : सीआरपीएफ ने अपने सैनिकों की शहादत को किया नमन, चंडीगढ़ में दी श्रद्धांजलि
Fri, 09 Apr 2021 10:54 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 09 Apr 2021 10:54 AM IST
सार
- हल्लोमाजरा सीआरएफ कैंप के गेट नंबर 1 का नाम शहीद जयपाल सिंह के नाम पर रखा
- हर साल नौ अप्रैल को मनाया जाता है शौर्य दिवस
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चंडीगढ़ में सीआरपीएफ में शहीद के नाम पर रखे मार्ग का उद्घाटन करती उनकी पत्नी।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चंडीगढ़ के हल्लोमाजरा कैंप में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने शुक्रवार को शौर्य दिवस मनाया। इस मौके पर वीर सैनिकों की शहादत को नमन करते हुए शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान नॉर्थ वेस्ट सेक्टर (एनडब्ल्यूएस) आईजी के. विजय कुमार ने शौर्य दिवस के महत्व के बारे में विस्तारपूर्वक बताया।
उन्होंने कहा कि 9 अप्रैल वर्ष 1965 को गुजरात के सरदार और टॉक पोस्ट पर तैनात द्वितीय बटालियन केरिपुबल की एक टुकड़ी ने पाकिस्तानी सेना के करीब 3500 सैनिकों वाली एक बिग्रेड स्तर के हमले को नाकाम कर उन्हें पीछे खदेड़ दिया। इस दौरान पाकिस्तानी सेना के 34 सैनिक मारे गए। साथ ही सीआरपीएफ के 8 जवान भी शहीद हो गए। इसके बाद से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल प्रत्येक वर्ष 9 अप्रैल को शौर्य दिवस के रूप में मनाती है।
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उन्होंने कहा कि 9 अप्रैल वर्ष 1965 को गुजरात के सरदार और टॉक पोस्ट पर तैनात द्वितीय बटालियन केरिपुबल की एक टुकड़ी ने पाकिस्तानी सेना के करीब 3500 सैनिकों वाली एक बिग्रेड स्तर के हमले को नाकाम कर उन्हें पीछे खदेड़ दिया। इस दौरान पाकिस्तानी सेना के 34 सैनिक मारे गए। साथ ही सीआरपीएफ के 8 जवान भी शहीद हो गए। इसके बाद से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल प्रत्येक वर्ष 9 अप्रैल को शौर्य दिवस के रूप में मनाती है।
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शहीद जयपाल सिंह के नाम पर रखा गेट नंबर 1 का मार्ग
चंडीगढ़ में शहीद की पत्नी से बात करते आईजी।
- फोटो : अमर उजाला
मूल रूप से हरियाणा के सोनीपत स्थित गांव थाना कलां के रहने वाले जयपाल सिंह 12 दिसंबर वर्ष 1979 में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में बतौर सिपाही भर्ती हुए थे। इस दौरान जयपाल ने उत्तर प्रदेश, दिल्ली, जम्मू कश्मीर, आंध्र प्रदेश, नागालैंड, छत्तीसगढ़, असम समेत अन्य राज्यों में उन्होंने अपनी सेवाएं दी।
10 अप्रैल 2009 को उन्होंने 55 बटालियन के साथ छतीसगढ़ में माओवादी के विरोध में एक ऑपरेशन चलाया। इस ऑपरेशन में घात लगाए बैठे थे। इस दौरान काफी देर तक माओवादियों के साथ संघर्ष हुआ। लेकिन पहले से घात लगाए बैठे माओवादियों ने टुकड़ी पर हमला कर दिया। इससे जायपाल सिंह वीरगति को प्राप्त हो गए।
इसके बाद जयपाल को प्रेसिडेंट पुलिस मेडल फॉर गैलेंट्री से सम्मानित किया गया। इसी की याद में हल्लोमाजरा सीआरएफ कैंप के गेट नंबर 1 को शहीद जयपाल सिंह मार्ग का नाम दिया गया। इसका उद्घाटन उनकी पत्नी सुरेश बाला ने किया।
10 अप्रैल 2009 को उन्होंने 55 बटालियन के साथ छतीसगढ़ में माओवादी के विरोध में एक ऑपरेशन चलाया। इस ऑपरेशन में घात लगाए बैठे थे। इस दौरान काफी देर तक माओवादियों के साथ संघर्ष हुआ। लेकिन पहले से घात लगाए बैठे माओवादियों ने टुकड़ी पर हमला कर दिया। इससे जायपाल सिंह वीरगति को प्राप्त हो गए।
इसके बाद जयपाल को प्रेसिडेंट पुलिस मेडल फॉर गैलेंट्री से सम्मानित किया गया। इसी की याद में हल्लोमाजरा सीआरएफ कैंप के गेट नंबर 1 को शहीद जयपाल सिंह मार्ग का नाम दिया गया। इसका उद्घाटन उनकी पत्नी सुरेश बाला ने किया।