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किंग्स इलेवन से धोखा करने वाली कंपनी के नाम वारंट
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 04 Feb 2014 12:42 PM IST
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किंग्स इलेवन पंजाब टीम की मालकिन के पीएच ड्रीम क्रिकेट प्राइवेट लिमिटेड की तरफ से कोलकाता की लीडिंग सोलर प्रोडक्ट निर्माता कंपनी एन.वी.डी. के खिलाफ करोड़ो रुपए के चैक बाऊसिंग के मामले में चंडीगढ़ जिला अदालत ने एनवीडी कंपनी के मालिकों के खिलाफ जमानती वारंट जारी किए हैं।
अदालत ने मामले में कंपनी के सात मालिकों को अप्रैल महीने में पेश होने के आदेश दिए है। पिछली सुनवाई पर ज्यूडिशियल मैजिस्ट्रेट मानव की अदालत ने कंपनी मालिकों को 31 जनवरी को पेश होने के लिए सम्मन किए थे। कंपनी की तरफ से कि सी के पेश न होने के चलते यह वारंट निकाले गए हैं।
मामले में एन.वी.डी. द्वारा रकम अदायगी को लेकर दिए 25-25 लाख रुपए के चार चैक बांऊस होने पर अक्तूबर, 2013 में चैक बांऊसिंग की संबंधित धारा के तहत नैगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा-138 के तहत याचिका दायर की गई थी।
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पुलिस को भी करीब 14 करोड़ रुपए की इस धोखाधड़ी के मामले में अक्तूबर, 2013 में चंडीगढ़ पुलिस को शिकायत दी गई थी। इससे पहले एनवीडी कंपनी को लीगल नोटिस भी भेजे गए थे।
एनवीडी किंग्स इलेवन की प्रायोजक कंपनी थी। किंग्स इलेवन पंजाब के सह मालिक व्यवसाई नैस वाडिया ने इस कानूनी कार्रवाई को ही अंतिम विकल्प बताया था।
एनवीडी के प्रबंध निदेशक साईबाल हाजरा ने किंग्स इलेवन के सभी आरोपों से गलत बता चुके है। किंग्स इलेवन की शिकायत के अनुसार एन.वी.डी. की तरफ से उन्हें डियूट्चे बैंक लंदन, वैल्स फार्गो बैंक न्यूयार्क, कामन स्यूसी बैंक लिमिटेड के जाली खाते नंबर, जाली संदेश, कर्मियों के जाली नाम के साथ ही जाली आई.पी. पतों से ई-मेल किए गए।
वाडिया ने कहा था कि उन्हें रकम की वापसी को लेकर झूठे वायदे किए जाते रहे। मार्च, 2013 में एन.वी.डी. व किंग्स इलेवन के बीच 14.30 करोड़ रुपए में यह डील टूट गई थी। किंग्स इलेवन को मात्र 42 लाख रुपए ही मिल पाए थे। इसमें 32 लाख रुपए इलैक्ट्रिानिक फंड ट्रांसफर व
10 लाख रुपए चेक के जरिए प्राप्त हुए थे। ऐसे में 13 करोड़, 88 लाख रुपए न दिए जाने की बात कही गई है। वहीं एनवीडी की तरफ से कहा गया था कि किंग्स इलेवन का एग्रीमेंट उनकी बाग्लादेशी इकाई के साथ टूटा था।
ऐसे में वह रकम देने के लिए उत्तरदायी नहीं हैं। एन वीडी ने इसे एक अंतर्राष्ट्रीय डील बताते हुए इसमें अंतर्राष्ट्रीय कानून लागू होने की बात कही थी। एन.वी.डी. सीजन 6 में किंग्स इलेवन की प्रायोजक कंपनी थी।
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अदालत ने मामले में कंपनी के सात मालिकों को अप्रैल महीने में पेश होने के आदेश दिए है। पिछली सुनवाई पर ज्यूडिशियल मैजिस्ट्रेट मानव की अदालत ने कंपनी मालिकों को 31 जनवरी को पेश होने के लिए सम्मन किए थे। कंपनी की तरफ से कि सी के पेश न होने के चलते यह वारंट निकाले गए हैं।
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मामले में एन.वी.डी. द्वारा रकम अदायगी को लेकर दिए 25-25 लाख रुपए के चार चैक बांऊस होने पर अक्तूबर, 2013 में चैक बांऊसिंग की संबंधित धारा के तहत नैगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा-138 के तहत याचिका दायर की गई थी।
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पुलिस को भी करीब 14 करोड़ रुपए की इस धोखाधड़ी के मामले में अक्तूबर, 2013 में चंडीगढ़ पुलिस को शिकायत दी गई थी। इससे पहले एनवीडी कंपनी को लीगल नोटिस भी भेजे गए थे।
एनवीडी किंग्स इलेवन की प्रायोजक कंपनी थी। किंग्स इलेवन पंजाब के सह मालिक व्यवसाई नैस वाडिया ने इस कानूनी कार्रवाई को ही अंतिम विकल्प बताया था।
एनवीडी के प्रबंध निदेशक साईबाल हाजरा ने किंग्स इलेवन के सभी आरोपों से गलत बता चुके है। किंग्स इलेवन की शिकायत के अनुसार एन.वी.डी. की तरफ से उन्हें डियूट्चे बैंक लंदन, वैल्स फार्गो बैंक न्यूयार्क, कामन स्यूसी बैंक लिमिटेड के जाली खाते नंबर, जाली संदेश, कर्मियों के जाली नाम के साथ ही जाली आई.पी. पतों से ई-मेल किए गए।
वाडिया ने कहा था कि उन्हें रकम की वापसी को लेकर झूठे वायदे किए जाते रहे। मार्च, 2013 में एन.वी.डी. व किंग्स इलेवन के बीच 14.30 करोड़ रुपए में यह डील टूट गई थी। किंग्स इलेवन को मात्र 42 लाख रुपए ही मिल पाए थे। इसमें 32 लाख रुपए इलैक्ट्रिानिक फंड ट्रांसफर व
10 लाख रुपए चेक के जरिए प्राप्त हुए थे। ऐसे में 13 करोड़, 88 लाख रुपए न दिए जाने की बात कही गई है। वहीं एनवीडी की तरफ से कहा गया था कि किंग्स इलेवन का एग्रीमेंट उनकी बाग्लादेशी इकाई के साथ टूटा था।
ऐसे में वह रकम देने के लिए उत्तरदायी नहीं हैं। एन वीडी ने इसे एक अंतर्राष्ट्रीय डील बताते हुए इसमें अंतर्राष्ट्रीय कानून लागू होने की बात कही थी। एन.वी.डी. सीजन 6 में किंग्स इलेवन की प्रायोजक कंपनी थी।