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थानेदार शिंगारा सिंह को तीन साल की सजा
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली
Updated Wed, 23 Jul 2014 08:57 PM IST
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विजिलेंस ब्यूरो द्वारा रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़े गए थानेदार शिंगारा सिंह को जिला अदालत ने दोषी करार दिया है। अदालत ने थानेदार को तीन साल की सजा और 20 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। अदालत ने सरकारी और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद फैसला सुनाया।
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विजिलेंस विभाग ने अक्टूबर 2013 को एएसआई शिंगारा सिंह को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते पकड़ा था। उस समय वह खरड़ पुलिस स्टेशन में तैनात थे।
एएसआई ने एक केस में एक आरोपी का नाम शामिल करवाने और उसको गिरफ्तार करवाने के लिए शिकायतकर्ता से 30 हजार रुपये बतौर रिश्वत मांगे थे। इस संबंध में गांव लोहगढ़ निवासी अवतार सिंह ने विजिलेंस को शिकायत दी थी। उसने बताया कि उसकी बहन की शादी गांव भुखड़ी में कुलदीप सिंह से हुई थी। शादी के कुछ समय बाद ही उसकी बहन की मौत हो गई थी।
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खरड़ पुलिस स्टेशन में अवतार ने बहन की मौत के संबंध में पति कुलदीप सिंह, ससुर महिंदर सिंह और सास मलकीत कौर के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। उसका आरोप था कि पुलिस ने केस में उसकी शिकायत के मुताबिक उसकी बहन की जेठानी का नाम शामिल नहीं किया था।
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जेठानी को भी वह बहन की मौत के आरोपियों में शामिल करवाना चाहता था। इसके लिए उसने कई बार एएसआई के चक्कर काटे। जेठानी का नाम मुकदमे में दर्ज करवाने के लिए शिंगारा सिंह ने 30 हजार रुपये की मांग की। बाद में सौदा 25 हजार रुपये में तय हुआ।
डील के मुताबिक अवतार सिंह को शिंगारा सिंह को 20 हजार रुपये बतौर पहली किश्त देने थे। लेकिन अवतार सिंह ने इसकी शिकायत विजिलेंस को दे दी।
इसके बाद विजिलेंस ने ट्रैप लगाकर एएसआई शिंगारा सिंह को खरड़ पुलिस स्टेशन से ही रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।