Charkhi Dadri News: सैनिक ने अपने ही साथी को ठगा, भाई और रिश्तेदार की नौकरी लगवाने के नाम पर वसूले 30 लाख
राजकपूर ने बताया कि दो साल बाद निर्मल और उसका दोस्त रविकांत उससे मिलने फतेहगढ़ गांव आए। वहां उन्होंने राजकपूर से भांजे को हरियाणा पुलिस में और राजकपूर के जीजा के छोटे भाई को एचएससी में क्लर्क लगवाने की बात कही।
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दो युवकों को नौकरी दिलाने का झांसा देकर 30 लाख रुपये ठगने के एक आरोपी को दादरी आर्थिक अपराध शाखा टीम ने गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान पंजाब के डेराबसी तहसील के गांव जडोदा निवासी निर्मल सिंह के रूप में हुई है। अहम बात ये है कि आरोपी सेना का जवान है। पुलिस ने उसे पांच दिन के रिमांड पर लिया और इस दौरान उससे 1.30 लाख रुपये मिले हैं। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद उसे शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा।
डीएसपी अशोक कुमार ने बताया कि फतेहगढ़ निवासी राजकपूर ने गत 13 मार्च को एसपी कार्यालय में एक शिकायत दी थी। शिकायतकर्ता ने बताया था कि वो सेना का जवान है। उसकी तैनाती पंजाब में थी और वहां उसकी मुलाकात साथी जवान निर्मल सिंह से हुई। निर्मल ने उससे कहा कि अगर कोई रिश्तेदार नौकरी लगवाना हो तो वो ये काम करवा सकता है।
राजकपूर ने बताया कि दो साल बाद निर्मल और उसका दोस्त रविकांत उससे मिलने फतेहगढ़ गांव आए। वहां उन्होंने राजकपूर से भांजे को हरियाणा पुलिस में और राजकपूर के जीजा के छोटे भाई को एचएससी में क्लर्क लगवाने की बात कही।
राजकपूर ने बताया कि इसके बाद उसने डेढ़ लाख रुपये का चेक और साढ़े सात लाख रुपये नकद दे दिए। कुछ दिन बाद क्लर्क और हरियाणा पुलिस का टेस्ट हुआ तो निर्मल सिंह का फोन आया कि पूरी रकम देने के बाद ही काम होगा। इसके चलते राजकपूर ने उसे सात लाख रुपये के दो चेक और साढ़े 12 लाख रुपये नकद दे दिए। इसके बाद भी उसके भांजे और जीजा की नौकरी नहीं लगी।
रुपये वापस मांगने पर दिए चेक
राजकपूर ने बताया कि काम न बनने पर उसने रुपये वापस मांगे तो निर्मल ने नौ लाख का और रविकांत ने उसे 21 लाख रुपये का चेक दे दिया। जब उसने ये चेक भुगतान के लिए लगाए तो बैंक ने रिपोर्ट तैयार करके वापस भेज दी।
आरोपी बोला: पांच लाख रुपये दे चुका वापस
आरोपी को पुलिस ने पांच दिन के रिमांड पर लिया था। रिमांड अवधि के दौरान आरोपी ने बताया कि उसने और रविकांत ने भर्ती के नाम पर 35 लाख रुपये लिए थे। इसमें पांच लाख रुपये राजकपूर को लौटा चुका हूं। इसके अलावा उन्होंने 9 और 21 लाख के जो चेक दिए थे, उन पर फर्जी हस्ताक्षर किए थे और बाद में उनकी गुमशुदगी लिखा दी थी।