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मकान की दीवारों की तराई कर रही थी मां, टैंक में डूबकर बच्ची की मौत
ब्यूरो/अमर उजाला, पिंजौर
Updated Sat, 17 Jun 2017 09:21 AM IST
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टैंक में डूबकर बच्ची की मौत
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निर्माणाधीन मकान में बने टैंक में डूबने से शुक्रवार को छह साल की बच्ची की मौत हो गई। जबकि बच्ची की मां पास में ही दीवारों की तराई कर रही थी। मां को घटना की जरा भी भनक नहीं लगी। घटना नगर निगम जोन पिंजौर के वार्ड नंबर 6 में स्थित रामपुर सियुडी की महादेव कॉलोनी की है।
सुुभाष कुमार ने बताया कि उसका बड़ा बेटा अंश गर्मी की छुटिटयों में ननिहाल हरिद्वार गया है। जबकि छोटी बेटी अंशिका उन्हीं के साथ महादेव कालोनी में ही थी। शुक्रवार को सुबह अपनी बेटी अंशिका और पत्नी तरुणा को घर पर छोड़कर वह मनीमाजरा काम पर गया था। वह अपना मकान बना रहे थे और घटना वाले दिन मिस्त्री छुट्टी पर थे। परिजनों ने बताया कि शुक्रवार को अंशिका की मां तरुणा अपने निर्माणाधीन मकान की तराई कर रही थी और बेटी अंशिका उससे कुछ ही दूरी पर खेल रही थी।
खेलते खेलते अंशिका पता नहीं कब पानी से भरे टैंक में डूब गई। परिजनों ने बताया कि अचानक पड़ोसी की नजर डूबी हुई बच्ची पर पड़ी तो उसे जल्दी से टैंक से निकाला। लोगों ने उसे अस्पताल पहुंचाया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डाक्टरों ने बच्ची को मृत बता दिया। अंशिका की मां तरुणा पानी से भरे टैंक से करीब 10 मीटर से भी कम दूरी पर निर्माणाधीन मकान की दीवारों की तराई कर रही थी। बच्ची के पानी में डूबने का मां को पता नहीं चला। अंशिका एक स्थानीय स्कूल में नर्सरी की छात्रा थी।
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इस लापरवाही पर ध्यान दें
पहले भी मकानों में टैंक में डूबने से कई मासूमों की जान जा चुकी है। अक्सर मकान निर्माण के दौरान पहले पानी के टैंक बना कर उसमें पानी भर दिया जाता है। ताकि वह पानी मकान की चिनाई और अन्य कामों में प्रयोग किया जा सके। इस दौरान अक्सर लापरवाही यह हो जाती है कि लोग वाटर टैंक को किसी भारी वस्तु से बंद न करके हल्की चीज रख देते हैं। या टैंक का मुंह खुला छोड़ देते हैं, जो अक्सर हादसे का कारण बनता है। हाल ही में चंडीगढ़ के पास स्थित नया गांव में भी एक निर्माणाधीन मकान के टैंक में डूबने से एक लड़के की मौत हो गई थी।
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सुुभाष कुमार ने बताया कि उसका बड़ा बेटा अंश गर्मी की छुटिटयों में ननिहाल हरिद्वार गया है। जबकि छोटी बेटी अंशिका उन्हीं के साथ महादेव कालोनी में ही थी। शुक्रवार को सुबह अपनी बेटी अंशिका और पत्नी तरुणा को घर पर छोड़कर वह मनीमाजरा काम पर गया था। वह अपना मकान बना रहे थे और घटना वाले दिन मिस्त्री छुट्टी पर थे। परिजनों ने बताया कि शुक्रवार को अंशिका की मां तरुणा अपने निर्माणाधीन मकान की तराई कर रही थी और बेटी अंशिका उससे कुछ ही दूरी पर खेल रही थी।
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खेलते खेलते अंशिका पता नहीं कब पानी से भरे टैंक में डूब गई। परिजनों ने बताया कि अचानक पड़ोसी की नजर डूबी हुई बच्ची पर पड़ी तो उसे जल्दी से टैंक से निकाला। लोगों ने उसे अस्पताल पहुंचाया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डाक्टरों ने बच्ची को मृत बता दिया। अंशिका की मां तरुणा पानी से भरे टैंक से करीब 10 मीटर से भी कम दूरी पर निर्माणाधीन मकान की दीवारों की तराई कर रही थी। बच्ची के पानी में डूबने का मां को पता नहीं चला। अंशिका एक स्थानीय स्कूल में नर्सरी की छात्रा थी।
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इस लापरवाही पर ध्यान दें
पहले भी मकानों में टैंक में डूबने से कई मासूमों की जान जा चुकी है। अक्सर मकान निर्माण के दौरान पहले पानी के टैंक बना कर उसमें पानी भर दिया जाता है। ताकि वह पानी मकान की चिनाई और अन्य कामों में प्रयोग किया जा सके। इस दौरान अक्सर लापरवाही यह हो जाती है कि लोग वाटर टैंक को किसी भारी वस्तु से बंद न करके हल्की चीज रख देते हैं। या टैंक का मुंह खुला छोड़ देते हैं, जो अक्सर हादसे का कारण बनता है। हाल ही में चंडीगढ़ के पास स्थित नया गांव में भी एक निर्माणाधीन मकान के टैंक में डूबने से एक लड़के की मौत हो गई थी।