{"_id":"215ea9be21efffeee073acb06ab7a51e","slug":"sippy-murder-case-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जज की बेटी बोली, पहले सिप्पी की मां और भाई का हो टेस्ट","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
जज की बेटी बोली, पहले सिप्पी की मां और भाई का हो टेस्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़।
Updated Sat, 09 Jan 2016 10:39 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एडवोकेट और इंटरनेशनल शूटर सुखमनप्रीत सिंह उर्फ सिप्पी मर्डर केस में पुलिस की ओर से संदिग्ध मानी जा रही पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के जज की बेटी ने टेस्ट करवाने संबंधी याचिका पर शुक्रवार को जवाब दाखिल किया। इसमें उसने पुलिस द्वारा उसका लाई डिटेक्शन और ब्रेन मैपिंग टेस्ट करवाने को असंवैधानिक बताते हुए अर्जी खारिज करने की अपील की है। साथ ही कहा है कि अगर उसका टेस्ट करवाना ही है तो पुलिस पहले सिप्पी की मां दीपेंदर कौर और उसके भाई जसमनप्रीत सिंह का भी टेस्ट करवाए, ताकि सच सामने आ सके।
विज्ञापन
शुक्रवार को उसकी ओर से उनके वकील ने एसीजेएम कोर्ट में जवाब दाखिल किया। उनके जवाब में सरकारी वकील अशोक रोहिला ने कोर्ट से कहा कि यदि केस में संदिग्ध मानी जा रही जज की बेटी को इन टेस्ट से इंकार करना है तो उन्हें एक बार कोर्ट में खुद पेश होकर इससे इंकार कर देना चाहिए। इसके लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का उदाहरण दिया। वहीं कोर्ट ने याचिका पर बहस के लिए 22 जनवरी की तारीख तय की है।
विज्ञापन
जवाब में खास बातें
पुलिस के जांच में सहयोग न करने का खंडन
जज की बेटी ने दायर जवाब में पुलिस को जांच में सहयोग न करने का खंडन किया है। उसका कहना है कि पुलिस ने जब-जब उसे जांच के लिए बुलाया या उसके घर आई उसने हर बार जांच में सहयोग दिया। आगे भी वह जांच के लिए हमेशा तैयार है। इसके बावजूद पुलिस उस पर गलत आरोप लगा रही है। उसने पुलिस के सभी सवालों का पारदर्शिता से जवाब दिया था।
विज्ञापन
टेस्ट के लिए नहीं कर सकते मजबूर
सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले को आधार बनाते हुए जज की बेटी ने कहा कि कानून के वैधानिक प्रावधान के तहत लाई डिटेक्शन और ब्रेन मैपिंग टेस्ट कानूनी और मेंटेनेबल नहीं है। संबंधित फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि संबंधित टेस्ट व्यक्ति की निजी स्वतंत्रता का हनन है।
साथ ही इसे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार के मानदंडों में क्रू र व अमानवीय बताया गया है। किसी को भी लाई डिटेक्शन और ब्रेन मैपिंग टेस्ट के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है। वहीं इसकी रिपोर्ट कोर्ट में कानूनी तौर पर मान्य नहीं है। वहीं जज की बेटी ने कहा है कि अगर कोर्ट यह फैसला देती है कि याचिका मेंटेनेबल है तो वह अपने संवैधानिक अधिकारों को छोड़ने के लिए तैयार है, ताकि वह अपने ऊपर लग रहे आरोपों को मिटा सके।
छवि खराब करने का आरोप
पुलिस की याचिका के जवाब में जज की बेटी ने कहा है कि उसकी और उसके परिवार की छवि को खराब किया जा रहा है। उनके खिलाफ सोशल मीडिया से लेकर सीधे आरोप लगाए जा रहे हैं, जबकि वह लगातार इन आरोपों से इंकार करती आईं हैं। जज की बेटी ने कहा है कि सिप्पी की मौत के बाद उसकी मां और भाई द्वारा उस पर झूठे और बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं। उसे इस केस में सिर्फ दीपेंदर कौर और जिप्पी के बयानों के आधार पर घसीटा जा रहा है। जबकि, उसकी सिप्पी के मर्डर में कोई भूमिका नहीं है। जज की बेटी ने कहा कि उसकी सिप्पी से कोई दुश्मनी नहीं थी और उसकी मौत से उसे भी धक्का लगा था।