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सेना का बर्खास्त कमांडो था चोर गिरोह का सरगना, गिरफ्तार

Tue, 02 Feb 2016 12:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 02 Feb 2016 12:08 AM IST
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sacked army commando was leader of thief gang

सेना का बर्खास्त कमांडो था चोर गिरोह का सरगना, गिरफ्तार

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बंद घरों को निशाना बनाने वाले एक ऐसे चोर गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है, जिसे भारतीय सेना की स्पेशल फोर्स से बर्खास्त कमांडो चला रहा था।


मोहाली। बंद घरों को निशाना बनाने वाले एक ऐसे चोर गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है, जिसे भारतीय सेना की स्पेशल फोर्स से बर्खास्त कमांडो चला रहा था। आरोपियों की पहचान नरिंदर कुमार (बर्खास्त कमांडो) निवासी गांव बुबका थाना रादौर जिला यमुनानगर और संदीप कुमार निवासी टोबा थाना साहा लुधियाना के रूप में हुई है। आरोपियों के पास से 60 लाख के सोने, चांदी व डायमंड के गहने और 4 लाख 82 हजार रुपये बरामद हुए। यह दावा एसएसपी गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने खरड़ थाने में प्रेस कांफ्रेंस में किया। उन्होंने बताया कि आरोपियों के पकड़े जाने से जिले में हुई 27 चोरी की वारदातें हल हुईं हैं।

ऐसे पकड़ में आए आरोपी
सीआईए स्टाफ की टीम 22 जनवरी को जब खरड़ बस स्टैंड पर मौजूद थी तो आरोपियों के बारे में सूचना मिली। पता चला कि आरोपी किसी वारदात को अंजाम देने जा रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने इलाके में चेकिंग शुरू कर दी। इस बीच सीआईए स्टाफ ने जीरकपुर में भी नाकेबंदी कर रखी थी। इस दौरान पुलिस के हाथ आरोपी लग गए। पुलिस ने आरोपियों से तीन पेंचकस, कमानीदार रॉड, दो किरच और दस्तानें बरामद किए थे।
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बैंक लूटने पर हुआ था सेना से बर्खास्त
नरिंदर कुमार (40) 12वीं तक पढ़ा हुआ है। साल 1994 में पैरा कमांडो के रूप में भर्ती हुआ था। आरोपी ने तीन दोस्तों के साथ मिलकर 2006 में गांव पतरेड़ी जिला अंबाला में एसीबीआई में मुलाजिमों को बंधक बना लिया था। इसके बाद 10 लाख 50 हजार रुपये की डकैती की थी। इस बाद उसे सेना से बर्खास्त कर दिया गया था।
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कमांडो का साथी भी कम शातिर नहीं
नरिंदर का साथी संदीप (35) भी कम शातिर नहीं है। वह भी 12वीं पास है। उसके खिलाफ पहले भी चोरी के कई केस दर्ज हैं। आरोपी पर पंचकूला में 11, देहरादून में पांच, बीकानेर में तीन केस दर्ज हैं। इनमें कई केसों में सजा काट चुका है। कई मामले अदालत में विचाराधीन हैं।

सुबह 11 से एक बजे तक करते थे चोरियां
आरोपियों ने बताया कि वह दिन के समय कोठियों के पास घूमकर रेकी करते थे। सुबह 11 बजे से दोपहर एक बजे तक चोरी की वारदातों को अंजाम देते थे। क्योंकि इस समय ज्यादातर लोग और बच्चे घरों से बाहर होते हैं। यही नहीं आरोपी पहले घर की घंटी बजाकर चेक करते थे कि घर में कोई है तो नहीं। इसके बाद यदि कोई बाहर नहीं आता था तो वह घर को निशाना बनाते थे।


ऐसे खोलते थे बंद घरों के ताले
आरोपियों ने बताया कि वारदात के समय वह दस्ताने पहन लेते थे। पेंचकस की सहायता से ताला खोल लेते थे। जबकि लोहे की रॉड अपनी सहायता के लिए रखते थे। जरूरत पड़ने पर वह इनसे हमला भी कर देते थे।

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