बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और अलमारी में छिपा दिया था शव, छह माह में अदालत ने दी फांसी सजा
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दुष्कर्म के बाद हत्या करने के दोषी को अदाल ने फांसी की सजा सुनाई है। हरियाणा के रेवाड़ी के कसौला थाना क्षेत्र के एक गांव में मध्यप्रदेश निवासी श्रमिक की आठ वर्षीय बेटी की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी और शव अलमारी में छिपा दिया था। अतिरिक्त एवं जिला सत्र न्यायाधीश नरेश कुमार की अदालत ने शुक्रवार को आरोपी को फांसी की सजा सुनाई है।
अदालत का फैसला महज छह माह में आया है। रेवाड़ी के न्यायिक इतिहास में पोस्को एक्ट के आरोपी को फांसी की सजा सुनाई गई है। घटनाक्रम के अनुसार आरोपी सन्नी कुमार (22) बावल औद्योगिक क्षेत्र की एक कंपनी में काम करता था। वह मूल रूप से यूपी के हाथरस जिले के गांव मीरपुर का रहने वाला है। वह यहां किराए पर रहता था और उसके साथ उसकी बहन और जीजा भी रहते थे। जिस मकान में सन्नी रहता था उसी में मध्यप्रदेश निवासी एक श्रमिक भी अपने परिवार सहित रहता था।
इसी वर्ष 8 जून को सन्नी के जीजा और बहन गांव चले गए थे और वह घर पर अकेला था। इधर, साथ रहने वाले मध्यप्रदेश निवासी आठ वर्षीय मासूम के माता-पिता सन्नी से यह कह कर गए थे कि वह अपने बेटे को दवाई दिलवाने जा रहे हैं। घर पर बेटी अकेली है और उसका ख्याल रखना। उनके जाने के बाद सन्नी ने पहले अपने कमरे में मोबाइल फोन पर अश्लील फिल्म देखी और फिर उसके बाद बच्ची को अपने कमरे में बुला लिया।
आरोपी ने बच्ची के हाथ-मुंह बांधकर दुष्कर्म किया और बाद में पकड़े जाने के डर से मासूम की गला दबाकर हत्या कर दी। किसी को शक नह हो इसके लिए उसने शव को अपने कमरे की अलमारी में छिपा दिया। माता-पिता जब देर शाम को घर पहुंचे तो उन्होंने सन्नी से बच्ची के बारे में पूछा। बाद में बच्ची नहीं मिली तो इसकी सूचना कसौला थाना पुलिस को दी गई।
बच्ची की तलाशी के दौरान सन्नी हमदर्द बनने व उसे तलाशने का ड्रामा करता रहा। इसी दौरान पुलिस को जब कुछ शक हुआ और सन्नी से कड़ी पूछताछ की गई तो वह टूट गया। उसने बताया कि उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म करके उसकी गला दबाकर हत्या कर दी है और शव को अलमारी में छिपा रखा है। तत्पश्चात पुलिस ने रेप व हत्या का केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया था।
मामले में चालान पेश होने के बाद शुक्रवार को अतिरिक्त जिला सत्र न्यायाधीश नरेश कुमार ने गवाहों व बयानों के आधार पर मात्र 6 माह में इस का फैसला सुनाते हुए आरोपी सन्नी को फांसी की सजा सुनाई है।
न्यायाधीश ने माना गंभीर अपराध, ऐसे व्यक्ति को फांसी ही होनी चाहिए
मामले में पैरवी करने वाले सरकारी अधिवक्ता आरके श्योराण ने बताया कि इस मामले में हमने आरोपी को फांसी की सजा की मांग की थी। जिसके बाद अदालत की तरफ से गंभीर अपराध मानते हुए कहा गया ऐसे व्यक्ति को फांसी ही होनी चाहिए।