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रेप पीड़िता हुई गर्भवती, बच्चा गिरा नहीं सकती, मां अपना नहीं सकती

Thu, 07 Apr 2016 06:21 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कैथल
ब्यूरो/अमर उजाला, कैथल Updated Thu, 07 Apr 2016 06:21 PM IST
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Rape victim was pregnant , the child can not fall , my mother can not
पीड़ित की मां ने मामले की शिकायत पुलिस थाना में दर्ज करवा दी है।
रेप का शिकार हुई नाबालिग युवती 2 महीने से गर्भवती है। वह बच्चा पैदा नहीं करना चाहती, वहीं परिजनों ने उसे घर ले जाने से इनकार कर दिया है। मामला, हरियाणा के कैथल से जुड़ा है। गर्भ में पल रहे बच्चे और अपने भविष्य को लेकर वह नियम-कानूनों के फेर में उलझ गई है। जिला बाल कल्याण समिति ने उसे बाल आश्रम भेज दिया है। वह बच्चे को जन्म नहीं देना चाहती। वहीं प्रशासन गर्भपात के संबंध में कानून के अनुसार फैसला लेने की बात कह रहा है।
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जिले के एक गांव की 14 वर्ष की किशोरी के साथ दुष्कर्म का केस 26 मार्च को महिला पुलिस थाने में दर्ज किया गया था। पुलिस ने आरोपी युवक को 29 मार्च को गिरफ्तार कर लिया था। इसी बीच जब पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल करवाया तो उसके दो माह की गर्भवती होने की जानकारी मिली। परिजनों ने लोक लाज के चलते उसे अपने साथ गांव में ले जाने से इंकार कर दिया।
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परिजनों के इनकार करने पर पुलिस ने किशोरी को महिला एवं बाल कल्याण समिति को सौंप दिया और समिति ने उसे बाल आश्रम भेज दिया। किशोरी बच्चे को जन्म नहीं देना चाहती। उसका कहना है कि वह इस बच्चे को जन्म देगी तो समाज इसे स्वीकार नहीं करेगा। वहीं कानूनी अड़चन के कारण उसके गर्भपात के विषय में फैसला लेना भी आसान नहीं है। ऐसे में प्रशासन के समक्ष भी समस्या खड़ी हो गई है कि आखिर किशोरी के गर्भपात के लिए कैसे और किसकी अनुमति ली जाए।
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चिकित्सक बोले, गर्भपात के संबंध में परेशानियां आएंगी

Rape victim was pregnant , the child can not fall , my mother can not
पहले लड़की ने दादा पर आरोप लगाया था।
चिकित्सकों के अनुसार एमटीपी एक्ट के कारण गर्भपात के संबंध में परेशानियां आएंगी। एमटीपी एक्ट 1972 के अनुसार 12 सप्ताह से कम अवधि का गर्भपात केवल ट्रेंड डॉक्टर ही कर सकता है। 12 सप्ताह से कम और 22 सप्ताह से ज्यादा की अवधि के लिए यदि गर्भपात करना पड़े तो दो डॉक्टरों के पैनल की आवश्यकता है।

5 माह से अधिक का समय होने पर किसी भी सूरत में गर्भपात नहीं हो सकता। बच्ची की आयु को देखते हुए इस मामले में शीघ्र फैसला लिया जाना जरूरी है। कानून के जानकारों का कहना है कि अगर जल्द लड़की का गर्भपात नहीं करवाया गया तो आगे काफी परेशानियां आएंगी। इस मामले में न्यायालय की अनुमति के बिना गर्भपात नहीं हो सकता।

बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार का कहना है कि पॉक्सो एक्ट के तहत यह मामला सामने आया है। किशोरी को सरंक्षण देना समिति का काम है। उसे पूरा संरक्षण दिया जाएगा। बाकी कार्य कानून के अनुसार संबंधित अधिकारी करेंगे। मामले में परिजनों से भी बातचीत की जा रही है। गांव के लोगों ने कोई फैसला  करने के लिए एक सप्ताह का समय लिया है। एक सप्ताह बाद ग्रामीणों एवं किशोरी की इच्छानुसार अगला फैसला होगा।

मामले में संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं, जो भी नियमानुसार कार्रवाई होगी, वह की जाएगी।
- निखिल गजराज, डीसी, कैथल
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