आश्रम में होटल और कॉलोनी बनाना चाहता था रामपाल
सतलोक आश्रम का मुखिया धर्म के नाम पर जमीन के कारोबार में डूबा हुआ था। उसने बरवाला से लेकर बैतूल तक लैंडबैंक तैयार करने की योजना बनाई थी। इसके लिए उसने बाकायदे अपने खास लोगों को नियुक्त किया था।
ये खास लोग हाईवे के आस पास ऐसी जमीन तलाशते थे, जहां एक साथ कई एकड़ जमीन मिल सके। सूत्रों की मानें तो इसका मकसद रामपाल अपने आश्रम में ही आवासीय कॉलोनी, लग्जरी होटल और दो-तीन मंजिला फ्लैट बनाना था। ये फ्लैट आश्रम से जुड़े धनाढ्य अनुयायियों के नाम किए जाने थे, जिसका वह रामपाल को मोटा पैसा पेमेंट करते।
इसके अलावा जो होटल बनाए जाने थे उनमें सत्संग के दौरान वीआईपी लोगों के रुकने की व्यवस्था की जानी थी। बताया जाता है कि रामपाल के इशारे पर इस योजना को उसका एक खास राजदार बलजीत मूर्त रूप दे रहा था।
50 एकड़ में फैलाना चाहता था आश्रम
हिसार-चंडीगढ़ हाईवे पर 12 एकड़ में बने वरवाला आश्रम के विस्तारीकरण की योजना थी। रामपाल इसके लिए 38 एकड़ और जमीन खरीदना चाहता था।
एक खास अनुयायी के अनुसार रामपाल अपने आश्रम को 50 एकड़ में फैलाना चाहता था। ताकि यहां एक लाख अनुयायी एक साथ बैठ सके। बरवाला निवासी एक किसान ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि, उसकी जमीन आश्रम के पीछे कुछ दूरी पर है।
रामपाल का सहयोगी बलजीत लगातार उससे संपर्क में था। वह जमीन की मुंह मांगी कीमत देना चाहता था। इसके साथ ही वह यह प्रलोभन भी दे रहा था कि इस जमीन के बदले प्रदेश में कहीं भी इससे चार गुनी उपजाऊ जमीन खरीद ले। लेकिन बरवाला के किसान किसी भी स्थिति में अब रामपाल को जमीन देना नहीं चाहते। इसलिए हमने उन्हें इंकार कर दिया।
66 एकड़ में बन रहा था बैतूल आश्रम
स्थानीय किसान ने बताया कि आश्रम के पास दो एकड़ के खेत के रामपाल छह करोड़ रुपये देने को तैयार था। जबकि सामान्य तौर पर इस दो एकड़ खेत की कीमत 50 लाख रुपये ही है। कई बार सत्संग के दौरान उसकी फसल भी बरबाद हो गई। किसान ने इसकी पुलिस एवं प्रशासनिक महकमे से शिकायत भी की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
मध्यप्रदेश में भोपाल जिले के जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर अर्दन गांव में रामपाल का आलीशान आश्रम तैयार हो रहा था। 66 एकड़ में बन रहे इस आश्रम में सारी सुख सुविधाओं का ख्याल रखा गया। सुरक्षा की दृष्टि से यह बरवाला के सतलोक आश्रम की ही तरह मजबूत बनाया जा रहा था।
सूत्रों के अनुसार इस आश्रम को तैयार करने के लिए करीब 60 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया था। 14 जनवरी 2015 (मकर संक्रांति) को इसके उद्घाटन की तैयारी थी। इस आश्रम के लिए जमीन का सौदा रामपाल के भाई बलबीर ने किया था। आश्रम में 50 हजार लोगों के एक साथ बैठने के लिए एक सेंट्रल हॉल बनवाया गया है। इसके अलावा वहां सैकड़ों लग्जरी कमरे बनवाए गए हैं, जो वीआईपी लोगों के लिए बुक रहेंगे।
यहां एक छोटी रिहायशी कॉलोनी का भी निर्माण किया गया है। रामपाल के खास लोग यहां रहेंगे। रामपाल की गिरफ्तारी के बाद से इस आश्रम में निर्माण कार्य रोक दिया गया है। रामपाल के अनुयायी भूमिगत हो गए हैं।