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'रामलीला' को राहत, नहीं गिरफ्तार होंगे रणवीर, दीपिका
सुमेश्ा ठाकुर
Updated Tue, 03 Dec 2013 06:09 PM IST
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प्रोमों से विवादों में आई बॉलीवुड फिल्म राम-लीला के निर्देशक संजय लीला भंसाली, अभिनेता रणवीर सिंह और अभिनेत्री दीपिका पादुकोण पर आया गिरफ्तारी का संकट अब टल गया है।
हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार की उस दलील को लंबित रख्ा लिया है, जिसमें सरकार ने कहा था कि पुलिस के पास तीनों को गिरफ्तार करने के लिए पर्याप्त एविडेंस है।
प्रतिवादियों ने जोधपुर हाइकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए याचिका को गलत करार दिया।
गौरतलब है कि सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार के वकील ने हईकोर्ट में दलील दी थी कि पुलिस के पास तीनों को गिरफ्तार करने के लिए पर्याप्त एविडेंस है, क्या तीनों को गिरफ्तार किया जाए।
दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट के जस्टिस जतिंद्र चौहान पर आधारित सिंगल बेंच ने कोई आदेश जारी न करते हुए मामले की सुनवाई स्थगित कर दी थी। मामले की आगामी सुनवाई 3 दिसंबर के लिए निर्धारित की गई थी।
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हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान फिल्म निर्देशक और स्टार कास्ट की गिरफ्तारी पर रोक के आदेश जारी किए थे। वहीं, पंजाब सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए कुछ समय की मोहलत का आग्रह किया था।
सनद रहे कि जालंधर निवासी ललित कुमार की शिकायत पर तीनों के खिलाफ आईपीसी की धारा 295 ए(धार्मिक भावनाओं को भड़काने) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
फिल्म के निर्देशक संजय लीला भंसाली, अभिनेता रणवीर सिंह और अभिनेत्री दीपिका पादुकोण ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर एफआईआर को रद्द करने का आग्रह किया है।
मामले की पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस विवाद पर पंजाब सरकार से जवाब तलब किया था। निर्देशक संजय लीला भंसाली ने याचिका में हाईकोर्ट से आग्रह किया है कि उनकी फिल्म में ऐसा कोई दृश्य या डायलॉग नहीं है, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचे।
याचिका में कहा गया है कि यह फिल्म विलियम शेक्सपीयर के रोमियो-जूलियट पर आधारित है। याचिका में कहा गया है कि राम-लीला नाम कहानी को ही सिर्फ जस्टिफाई करता है, लिहाजा उन्होंने आईपीसी की धारा 295ए के तहत कोई अपराध नहीं किया है।
इस फिल्म को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन ने सिनेमाटोग्रॉफी एक्ट के तहत सर्टिफिकेट दिया है। याचिका में कहा गया है कि किसी धर्म या समुदाय विशेष की भावनाओं को अनजाने में भी कोई ठेस नहीं पहुंचाई गई है।
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हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार की उस दलील को लंबित रख्ा लिया है, जिसमें सरकार ने कहा था कि पुलिस के पास तीनों को गिरफ्तार करने के लिए पर्याप्त एविडेंस है।
प्रतिवादियों ने जोधपुर हाइकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए याचिका को गलत करार दिया।
गौरतलब है कि सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार के वकील ने हईकोर्ट में दलील दी थी कि पुलिस के पास तीनों को गिरफ्तार करने के लिए पर्याप्त एविडेंस है, क्या तीनों को गिरफ्तार किया जाए।
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दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट के जस्टिस जतिंद्र चौहान पर आधारित सिंगल बेंच ने कोई आदेश जारी न करते हुए मामले की सुनवाई स्थगित कर दी थी। मामले की आगामी सुनवाई 3 दिसंबर के लिए निर्धारित की गई थी।
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हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान फिल्म निर्देशक और स्टार कास्ट की गिरफ्तारी पर रोक के आदेश जारी किए थे। वहीं, पंजाब सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए कुछ समय की मोहलत का आग्रह किया था।
सनद रहे कि जालंधर निवासी ललित कुमार की शिकायत पर तीनों के खिलाफ आईपीसी की धारा 295 ए(धार्मिक भावनाओं को भड़काने) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
फिल्म के निर्देशक संजय लीला भंसाली, अभिनेता रणवीर सिंह और अभिनेत्री दीपिका पादुकोण ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर एफआईआर को रद्द करने का आग्रह किया है।
मामले की पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस विवाद पर पंजाब सरकार से जवाब तलब किया था। निर्देशक संजय लीला भंसाली ने याचिका में हाईकोर्ट से आग्रह किया है कि उनकी फिल्म में ऐसा कोई दृश्य या डायलॉग नहीं है, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचे।
याचिका में कहा गया है कि यह फिल्म विलियम शेक्सपीयर के रोमियो-जूलियट पर आधारित है। याचिका में कहा गया है कि राम-लीला नाम कहानी को ही सिर्फ जस्टिफाई करता है, लिहाजा उन्होंने आईपीसी की धारा 295ए के तहत कोई अपराध नहीं किया है।
इस फिल्म को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन ने सिनेमाटोग्रॉफी एक्ट के तहत सर्टिफिकेट दिया है। याचिका में कहा गया है कि किसी धर्म या समुदाय विशेष की भावनाओं को अनजाने में भी कोई ठेस नहीं पहुंचाई गई है।