हरियाणा : कृषि कानूनों से आहत स्कूल संचालक बोला- आज मैं अपनी शहादत देने जा रहा हूं...कर ली आत्महत्या
- स्कूल संचालक ने जहर खाकर की आत्महत्या, बोला - किसानों के लिए आहत हूं
- मरने से पहले मृतक का वीडियो वायरल, पुलिस की कार्रवाई में जिक्र नहीं
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हरियाणा के रोहतक में स्कूल संचालक रैनकपुरा निवासी 40 वर्षीय मुकेश डागर ने मंगलवार को जहर खाकर जान दे दी। पुलिस ने मृतक के भाई नरेंद्र के बयान पर शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया। वहीं सोशल मीडिया पर मृतक का एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें डागर ने एक बड़े नेता को जिम्मेदार ठहराते कहा है कि वह किसानों के लिए बहुत परेशान है। इसलिए जान दे रहा है।
जानकारी के अनुसार रैनकपुरा निवासी नरेंद्र का कहना है कि उसका बड़ा भाई मुकेश डागर मंगलवार सुबह करीब 9 बजे अपने घर पर था। इस दौरान उसे अचानक उल्टी आई। सूचना पाकर वह घर पहुंचा और मुकेश को पीजीआई में दाखिल करवाया। जांच के बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
नरेंद्र ने बताया कि थोड़ी देर बाद परिचित लोग घर पहुंचे और उन्होंने बताया कि मुकेश मरने से पहले फेसबुक पर लाइव आया था। मामले की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने मुकेश के भाई नरेंद्र के बयान दर्ज किए। नरेंद्र का कहना है कि बड़े भाई ने शादी नहीं की थी। वे शिक्षा की अलख जगाने के लिए एक स्कूल चलाते थे। कोरोना काल में वह स्कूल बंद हो गया। अब कुछ समय से मुकेश एक स्कूल में बतौर शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे थे।
पुलिस को वीडियो के आधार पर बताया है कि चार माह होने के बाद भी किसानों की आवाज नहीं सुनी जा रही है। इस कारण परेशान होकर मेरे भाई ने यह कदम उठाया है। हालांकि अभी दर्ज एफआईआर की कॉपी नहीं मिली है। - नरेंद्र सिंह, मृतक का भाई।
मृतक के भाई ने बयान दिया है कि उसका भाई किसान आंदोलन से जुड़ा हुआ था। अब किसानों की हालत को लेकर परेशान था। इस कारण उसने जहर निगलकर जान दे दी। पुलिस ने आईपीसी की धारा 174 के तहत कार्रवाई कर शव परिजनों को सौंप दिया है। वायरल वीडियो की कोई सूचना नहीं है। - राहुल शर्मा, पुलिस अधीक्षक।
वायरल वीडियो में कहा- जब तक तीन कृषि कानून वापस नहीं, तब तक घर वापसी नहीं
रैनकपुरा निवासी 40 वर्षीय मुकेश डागर की मौत के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है, जो काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। वायरल वीडियो में मुकेश कह रहा है कि, राम-राम भाइयो, मैं मुकेश डागर रोहतक से। मेरा मन बहुत विचलित है आज। किसान भाइयो चार माह से ऊपर हो गया, आपको यहां बैठे हुए।
माननीय ...से कोई भी उम्मीद नहीं है। उनको अपनी वोट की राजनीति से ज्यादा फुर्सत नहीं है। वे चाहते हैं किसान यहीं पर बैठे रहें। आज मैं अपनी शहादत देने जा रहा हूं। मेरी मौत का कारण सिर्फ (एक बड़े नेता का नाम लिया) हैं। मैं दीपेंद्र हुड्डा, बलराज कुंडू का भी दिल से धन्यवाद करता हूं। अभय चौटाला व सोमबीर सांगवान जी आपका भी धन्यवाद।
अपने पद को छोड़ना कोई छोटी-मोटी बात नहीं है। तो भाइयो आज आखिरी बार मिलते हैं। यह बात जरूर कहना चाहूंगा। (बड़े नेता को संबोधित करते हुए) राज तो आनी-जानी चीज होती हैं। ऊपर न तो कोई मंत्री होता और न कोई संतरी होता। वहां पर बैठकर बातें करेंगे। एक-एक चीज का हिसाब लिया जाएगा। मेरी माताओं-बहनों से भी प्रार्थना है कि ऐसे ही अपने मोर्चों पर डटे रहना। जब तक बिल वापसी नहीं, तब तक घर वापसी नहीं। धन्यवाद