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ऐसी मशीन, बेटी की किलकारी गर्भ में ही खामोश

Fri, 20 Feb 2015 05:26 PM IST
विजय झा/अमर उजाला, सोनीपत(हरियाणा)
विजय झा/अमर उजाला, सोनीपत(हरियाणा) Updated Fri, 20 Feb 2015 05:26 PM IST
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portable ultrasound machine: cause of Feticide of girl

एक ऐसी मशीन चर्चा में आई है जो मिनट में बता देगी है कि कोख में बेटी है। बेटी की किलकारी गर्भ में ही खामोश कर दी जाती है। नरेला में लिंग जांच में संलिप्त डॉक्टरों का भंडाफोड़ होने के बाद फिर से एक साथ कई सवाल उठ खड़े हुए हैं।

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इस दौरान जहां यह बात सामने आई कि रजिस्टर्ड होने के बाद भी कुछ चिकित्सक इसमें संलिप्त हैं वहीं स्वास्थ्य विभाग के अपने लोग ही भ्रूण हत्या को बढ़ावा देने में जुटे हैं। पूरे मामले पर गौर करने के बाद यह बात निकलकर आती है कि लिंग जांच और भ्रूण हत्या का पूरा खेल एक अल्ट्रासाउंड मशीन पर केंद्रित होता है।
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जो मिनटों में आपको बता डालता है कि आपके गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है या फिर लड़की। इस अल्ट्रासाउंड मशीन की उपयोगिता लोगों की जान बचाने में होनी चाहिए, लेकिन पैसों और पुत्र के लालच में इससे प्रतिदिन पाप को अंजाम दिया जा रहा है।
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ध्वनि तरंगों के जरिए काम करती है मशीन
ध्वनि तरंगों के इस्तेमाल के जरिए आपके बच्चे की तस्वीर कंप्यूटर के पर्दे पर दिखाई पड़ती है। यह तस्वीर बच्चे की स्थिति और गतिविधि को दिखाती है। अल्ट्रासाउंड जांच के बाद यह पता चलता है कि बच्चा सामान्य रूप से विकसित हो रहा है या नहीं।
इसी दौरान डॉक्टर यह भी बता सकता है कि यह शिशु लड़का है या लड़की। इसकी जांच पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड या फिर पाकेट कैमरे जितनी पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन से आसानी से किया जाता है। जो गर्भवती महिला जांच के लिए पहुंचती है उसे डाक्टर महज दो मिनट में लिंग जांच के बारे में जानकारी दे डालता है।

चाइनीज मशीन ने किया गिरोह का काम आसान

portable ultrasound machine: cause of Feticide of girl

सामान्य अस्पताल के पीएनडीटी अधिकारी के अनुसार, मिनी पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने और खुले बाजार में गुपचुप तरीके से इन मशीनों की खरीद और बिक्री भी की जा रही है।

माना जाता है कि इस तरह की मशीनें दो से चार लाख रुपये तक के मूल्य पर गुपचुप तरीके से बेची जा रही है। आकार में काफी छोटी होने से ही गिरोह अल्ट्रासाउंड मशीनों का उपयोग कहीं भी जाकर लिंग जांच कर सकता है।

इस तरह होती है गड़बड़ी

निजी या सरकारी अल्ट्रासाउंड केंद्र पर किसी गर्भवती महिला का अल्ट्रासाउंड कराने से पहले उससे एक फार्म भरवाया जाता है। फार्म में महिला का सारा रिकॉर्ड दर्ज किया जाता है। जिले में कुल 52 अल्ट्रासाउंड पंजीकृत हैं। इनका पूरा रिकार्ड स्वास्थ्य विभाग के रहता है।

हालांकि अवैध रूप से अल्ट्रासाउंड की जांच में जुटे गिरोहों के बारे में विभाग को भनक तक नहीं लग पाती। ऐसे में कुछ या तो बार्डर पार जाकर इस तरह की करतूत को अंजाम देते हैं या फिर जिले के अंदर ही चोरी-छिपे लिंग जांच में संलिप्त हैं।

गर्भवती महिलाओं के घर जाकर करतूत को अंजाम दे रहे

portable ultrasound machine: cause of Feticide of girl

जिले में गुपचुप तरीके से शामिल यह एजेंट लिंग जांच कराने की इच्छुक गर्भवती महिलाओं और उनके परिवार को ढूंढकर 10 से 20 हजार रुपये में लिंग जांच कराते हैं। इनमें 8 से 10 हजार डॉक्टरों की फीस होती है जबकि बिचौलिए को दो से चार हजार रुपये मिल जाते हैं। कुछ डॉक्टर लिंग जांच की इच्छुक गर्भवती महिलाओं के घर जाकर भी इस तरह की करतूत को अंजाम दे रहे हैं।
 
लिंग जांच में आयेदिन आशा और एएनएम पर उंगलियां उठती रही हैं। साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के बारे में इस तरह की बातें आती रही है कि लिंग जांच में कहीं न कहीं अप्रत्यक्ष रूप से शामिल होकर इस धंधे को बढ़ावा दे रही हैं। इसका सुबूत पानीपत और नरेला में पकड़े गए गिरोह में शामिल एएनएम और आशा से मिलता है।
 
गिरोह की सूचना देने पर 50 हजार का इनाम
हरियाणा स्वास्थ्य विभाग ने प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीएनडीटी) अधिनियम के तहत लिंग जांच गिरोह की सूचना देने वाले को 50 हजार रुपये का इनाम देने का प्रावधान किया है। पहले यह राशि 20 हजार थी। हालांकि गिरोह कुछ इस तरह काम को अंजाम देते हैं जिससे आम लोगों को इसकी भनक नहीं लगती है।

डॉ. जेएस पूनिया, सिविल सर्जन ने बताया ‌कि पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन का इस्तेमाल वही संचालक कर सकता है जो रजिस्टर्ड है। स्वास्थ्य विभाग नजर बनाए हुए है कि रजिस्टर्ड अल्ट्रासाउंड केंद्र के अलावा किन-किन क्लीनिकों पर लिंग जांच का कारोबार चल रहा है। विभाग पूरी गोपनीयता के साथ अपना काम कर रहा है।

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