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Ludhiana Loot: जल्द अमीर बनने के चक्कर में फंसे मजदूर और स्टूडेंट... एक पैसा भी नहीं कर पाए खर्च
Tue, 20 Jun 2023 03:12 PM IST
निवेदिता वर्मा
विकास मल्होत्रा, संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना (पंजाब)
विकास मल्होत्रा, संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 20 Jun 2023 03:12 PM IST
सार
पुलिस कमिश्नर ने कहा कि उन्हें पता चला कि कुछ जगहों पर खबर चली है कि श्री हेमकुंड के रास्ते पर आरोपियों को काबू करने के लिए पुलिस ने फ्रूटी और ग्लूकोन डी का लंगर लगाया था और आरोपी फ्रूटी लेने में फंस गए। उन्होंने कहा कि आरोपियों के बारे में पुलिस को पता चल गया था।
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मोना और उसका पति
- फोटो : twitter
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विस्तार
शार्टकट तरीके से अमीर बनने और पैसे कमाने का लालच कई बार इंसान को इतना बुरा फंसा देता है कि वह क्राइम की दुनिया में जाने से भी गुरेज नहीं करता। सीएमएस कंपनी में लूटकांड को अंजाम देने और लूटे हुए पैसों को चोरी करने वाले आरोपी भी इसी तरह लालच में आकर बुरे तरीके से फंस गए और सलाखों के पीछे पहुंच गए।
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लाखों रुपये शार्टकट तरीके से कमाने और जल्द अमीर बनने के लालच में आरोपियों ने वारदात को अंजाम दिया और फंस गए। लूटकांड को अंजाम देने वालों में मजदूरी कर रोज कमाने वाले भी है और पढ़ाई के लिए घर से खर्चा लेने वाले स्टूडेंट भी है।
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हालांकि इतना पैसा लूटने के बाद भी आरोपी एक भी पैसे को खर्च नहीं कर पाए। क्योंकि उन्हें इतना डरा दिया गया था कि पैसों में चिप लगी है और उसे खर्च करने पर पता चल सकता है। जिस कारण किसी भी आरोपी ने लूटे हुए पैसों से एक भी रुपया नहीं खर्च किया था। पुलिस कमिश्नर मंदीप सिंह सिद्धू ने कई बड़े खुलासे करते हुए दावा किया कि लुधियाना पुलिस ने इतने कम समय में इतने ज्यादा लोगों को गिरफ्तार कर इतनी बड़ी पैसों की रिकवरी भी करवाई है। इसमें उनकी पूरी टीम का योगदान रहा है और सभी की मेनहत रही है। जिसके लिए उच्चाधिकारियों के साथ साथ सरकार ने भी पूरा साथ दिया है।
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लूटकांड को अंजाम देने वाला मुख्य आरोपी मनजिंदर सिंह मनि सीएमएस कंपनी में ही चंद रुपयों की तनख्वाह लेता था और मजदूरी करता था। विक्की भी लक्कड़ का काम करता है और हरविंदर लंबू भी मजदूरी करता है। जबकि पम्मा पल्लेदारी करता है और हरप्रीत सिंह इनवर्टर की दुकान पर काम करता है। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि नरिंदर सिंह हैप्पी भी मजदूरी करता है और मुख्य आरोपी मोना खुद को एडवोकेट बताती थी, जबकि उसका पति जसविंदर केटरिंग का काम करता था।
अरुण कोच पढ़ाई कर रहा है और विदेश जाने की तैयारी में था। आरोपी नन्नी भी 12वीं के बाद पढ़ाई कर रहा है। जबकि गोपा ईंट भट्ठे पर काम करता है। नीरज अपने इलाके में हेयर कटिंग की दुकान पर काम करता है और प्रिंस मजदूरी करता है। बब्बू बिजली की दुकान पर काम करता है और अभि आईलेट्स की पढ़ाई कर रहा है। कुल मिला कर सभी के सभी के सभी गरीब घरों से आते हैं।
मनी ने सभी को डराया-पैसे खर्च करोगे तो फंसोगे
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि लूटकांड को अंजाम देने के बाद सभी लोग पैसे लाकर चले गए। जब कुछ पैसे आरोपियों ने बांटे और बाकी के रुपये ठिकाने लगाने की तैयारी में थे ताकि बाद में सेटलमेंट कर बांट लिए जाएंगे तो मनी ने सभी को पैसे देते देते यह कह दिया कि इस पैसों में चिप लगी है। अगर कोई भी एक नोट भी चलाएगा तो चिप के जरिए फंस सकता है। जिसके बाद आरोपियों ने एक भी रुपया बीच में से खर्च नहीं किया। जब तक आरोपियों की अगली मुलाकात होती तब तक आरोपी काबू में आ चुके थे। हालांकि मंदीप कौर मोना और जसविंदर सिंह लूटे हुए पैसों में से करीब एक लाख रुपये साथ लेकर गए थे और कुछ पैसे खर्च भी किए है।
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चुप रहने के लिए नीरज ने मांगे थे रुपये, नहीं मिले तो कर ली चोरी
पुलिस के मुताबिक लूटकांड के बाद नीरज और कोच उस गाड़ी में इकट्ठे थे जिस गाड़ी में लूटा हुआ कैश था तो नीरज ने उससे कुछ रुपये देने को कहा, लेकिन कोच नहीं माना। सूत्र बताते है कि दोनों की आपस में बहस भी हुई थी, लेकिन कोच ने उसे वहां से भेज दिया। इसके बाद नीरज ने अपने साथियों के साथ मिल पूरा प्लान बनाया और कोच के घर से जाने के बाद गाड़ी का शीशा तोड़ा और उसमें से 70 लाख रुपये चोरी कर लिए। जिसके बाद बीस लाख रुपये खुद रख लिए और दस लाख रुपये बाकी को दे दिए।
पुलिस ने जांच के दौरान नीरज को काबू किया तो नीरज से बब्बू और प्रिंस का पता चला। पुलिस ने उनके घर छापामारी की तो पता चला कि दोनों मौसेरे भाई लुधियाना में रिश्तेदार के घर है। वहां से दोनों रेलवे स्टेशन के पास स्थित एक होटल में पहुंचे और वहां कमरा बुक कराया। जिसके बाद पुलिस ने दोनों का पता लगा उन्हें काबू किया। तीनों के काबू होने के बाद अभि डर गया और उसने सरेंडर कर दिया।
सबूत मिटाने के लिए डीवीआर भी नाले में फेंके
पुलिस के मुताबिक आरोपियों के गिरफ्तार होने के बाद उनसे पूछताछ की गई और डीवीआर के बारे में पूछा गया तो पता चला कि आरोपियों ने लूटकांड के बाद सबूत मिटाने के लिए डीवीआर नाले में फेंक दिए थे। अब उसे ढूंढना पड़ेगा। पुलिस कमिश्नर ने कहा कि आरोपियों की वजह से पहले पुलिस ने सेप्टिक टैंक खंगाला और अब गंदा नाला भी खंगालना पड़ेगा।
फ्रूटी के लंगर को पुलिस कमिश्नर ने नकारा
पुलिस कमिश्नर ने कहा कि उन्हें पता चला कि कुछ जगहों पर खबर चली है कि श्री हेमकुंड के रास्ते पर आरोपियों को काबू करने के लिए पुलिस ने फ्रूटी और ग्लूकोन डी का लंगर लगाया था और आरोपी फ्रूटी लेने में फंस गए। उन्होंने कहा कि आरोपियों के बारे में पुलिस को पता चल गया था। पुलिस ने आरोपियों को काबू करने के लिए जाल बुना था। रास्ते में जैसे कोई यात्री दूसरे यात्री की मदद करता है तो वैसे ही पुलिस ने भी यात्री के तौर पर आरोपियों को फ्रूटी पकड़ाई तो आरोपियों को कन्फर्म करने के लिए उनकी फोटो खींची थी। जिसके बाद कोई पैनिक न हो आरोपियों का पीछा किया गया और उन्हें कुछ दूरी पर जाकर काबू किया गया।