अमराली मर्डर केसः DGP समेत 3 पर आरोप तय
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1990 में मोरिंडा के गांव अमराली वासी कुलदीप सिंह को पुलिस पार्टी द्वारा अगवा करने के मामले में 24 साल बाद जिला अदालत ने मौजूदा डीजीपी और डायरेक्टर पंजाब पुलिस अकादमी फिल्लौर सतीश कुमार शर्मा, पूर्व डीआईजी एसपीएस बसरा, पूर्व डीएसपी बलकार सिंह और पूर्व एएसआई गुरचरन सिंह पर कत्ल और अगवा करने की धाराओं के तहत आरोप तय कर दिए हैं।
अदालती कार्रवाई में बचाव पक्ष के तीन वकीलों भूपिंदर सिंह राजा, अमरिंदरप्रीत सिंह बावा और शेखर शुक्ला ने बहस करते हुए मामले में कोई पुख्ता सबूत न होने की बात पर जोर दिया पर अदालत ने वकीलों की बात सुनने के बाद इन चारों लोगों पर इस मामले में आरोप तय कर दिए।
अदालत ने डीजीपी सतीश कुमार शर्मा, गुरचरन सिंह और बलकार सिंह को 50-50 हजार रुपये के सिक्योरिटी बांड पर जमानत दे दी। मामले में नामजद पूर्व डीआईजी एसपीएस बसरा पहले ही पटियाला जेल में एक ऐसे ही मामले में सजा भुगत रहे हैं और उन्हें प्रोटेक्शन वारंट पर अदालत में लाया गया था।
चोट के कारण दोपहर में पेश हुए डीजीपी
कुलदीप सिंह अमराली के मामले में आरोप तय होने पर पीड़ित परिवार को 24 साल के बाद न्याय मिलने की आस दिखाई दी है। कुलदीप सिंह के पिता अजैब सिंह ने अदालत की इस कार्रवाई पर भरोसा जताते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अदालत इस मामले में आरोपियों को सख्त सजा देगी।
मामले में नामजद पूर्व एएसआई गुरचरन सिंह ने कहा कि उन्हें इस मामले में गलत नामजद किया गया है, जबकि वह उस समय मोरिंडा में तैनात ही नहीं थे। गुरचरन सिंह ने कहा कि इस मामले में नामजद गुरचरन कोई ओर पुलिस अधिकारी है जिसकी मौत हो चुकी है। इस संबंध में उन्होंने हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की है।
डीजीपी सतीश कुमार शर्मा को चोट लगे होने के कारण सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें सहारा देकर अदालत में पेश किया। डीजीपी को सुबह अदालत में पेश होना था, पर चोट के कारण वह दोपहर को अदालत में पेश हुए। इस बात पर अदालत ने भी नाराजगी जाहिर की। पूर्व डीआईजी एसपीएस बसरा सुबह से ही एसएसपी कार्यालय में आकर बैठ गए रहे।
क्या है मामला
रोपड़ के शहर मोरिंडा के गांव अमराली के अजैब सिंह ने पंजाब पुलिस के मौजूदा डीजीपी एसके शर्मा, पूर्व डीआईजी एसपीएस बसरा, पूर्व डीएसपी बलकार सिंह और पूर्व एएसआई गुरचरन सिंह के खिलाफ उसके बेटे कुलदीप सिंह (20) को 1992 में मोरिंडा से अगवा कर उसे झूठे पुलिस मुकाबले में मारने के आरोप लगाए थे।
अखबार में छपी खबर के आधार पर 24 अक्तूबर 1998 को अदालत के आदेशों पर इन अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। कुलदीप सिंह पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला से ग्रेजुएशन कर रहा था और पुलिस ने उसे अगवा कर लिया था। 15 मई 1991 को उस समय के एसएसपी पटियाला द्वारा अंग्रेजी अखबार में छपी स्टेटमेंट में कहा गया था कि कुलदीप सिंह 1 मई को पुलिस मुकाबले में मारा गया जिसके बाद अजैब सिंह ने न्याय के लिए गुहार लगाई।
1998 में चारों पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 364 और 34 के तहत मामला दर्ज हुआ था। अब इस मामले मे कत्ल करने की धारा 302 और शव को खुर्द बुर्द करने की धारा 201 के तहत भी आरोप तय किए गए हैं।