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दो साल बाद कोमा से उठा युवक बोला, मेरी भाभी है पत्नी नहीं, भाई पूछ ही लेते?
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
Updated Tue, 09 Aug 2016 09:11 AM IST
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- फोटो : getty images
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दो साल पहले महादेव कॉलोनी के युवक की उसी के ताऊ के लड़कों ने मुसली और चाकू मारकर हत्या की कोशिश की थी। चचेरे भाइयों को युवक पर उनकी पत्नी के साथ अवैध संबंधों का शक था। युवक को अधमरा कर हत्या की साजिश रचने वाले चचेरे भाइयों ने ही उसे अस्पताल में भर्ती करवाया और घर पर फोन कर एक्सीडेंट की कहानी सुना दी।
दो साल बाद सड़क हादसे के बाद कोमा से लौटे युवक ने यह सनसनीखेज खुलासा किया है। कोमा से लौटने के बाद युवक ने गुड़गांव पुलिस में अपने बयान दर्ज करवाए हैं। पुलिस ने मामले के खुलासे के लिए कोर्ट से आरोपियों के पॉलिग्राफ टेस्ट की अनुमति मांगी है। दो साल तक कोमा में रहे बलविंद्र (22) निवासी महादेव कॉलोनी ने होश में आने पर बताया कि बारहवीं और आईटीआई करने के बाद उसका गुड़गांव की मारुति कंपनी में चयन हो गया था।
उसने 19 अगस्त 2014 को कंपनी ज्वाइन कर ली थी। इसके बाद वह गुड़गांव में ही अपने ताऊ मेवा सिंह के घर रहने लगा। उनका गुड़गांव में बर्तनों का काम है। कुछ लोगों के भड़काने पर उसका चचेरा भाई सोनू अपनी पत्नी और उसके रिश्तों पर शक करने लगा। वह चार सितंबर को कंपनी से रात की शिफ्ट करने के बाद अपने कमरे पर लौटा था। उसके ताऊ का लड़का पवन उसे छत पर सोने के लिए ले गया।
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रात करीबन एक बजे सोते वक्त उस पर किसी ने हमला कर दिया। उसकी आवाज न निकले, इसलिए चादर से उसका चेहरा और मुंह दबा दिया गया। उसने किसी तरह से चादर हटाकर देखा तो उसके ताऊ का लड़का सोनू तीन लड़कों के साथ पास खड़ा था। दो युवकों ने उसके हाथ-पैर पकड़े और सोनू ने पहले उसके सिर पर मुसली से हमला कर दिया। बाद में गर्दन में चाकू भी मारा। इसके बाद जब उसकी आंखें खुली तो वह अस्पताल में था, लेकिन बोल नहीं पा रहा था।
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दो साल बाद सड़क हादसे के बाद कोमा से लौटे युवक ने यह सनसनीखेज खुलासा किया है। कोमा से लौटने के बाद युवक ने गुड़गांव पुलिस में अपने बयान दर्ज करवाए हैं। पुलिस ने मामले के खुलासे के लिए कोर्ट से आरोपियों के पॉलिग्राफ टेस्ट की अनुमति मांगी है। दो साल तक कोमा में रहे बलविंद्र (22) निवासी महादेव कॉलोनी ने होश में आने पर बताया कि बारहवीं और आईटीआई करने के बाद उसका गुड़गांव की मारुति कंपनी में चयन हो गया था।
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उसने 19 अगस्त 2014 को कंपनी ज्वाइन कर ली थी। इसके बाद वह गुड़गांव में ही अपने ताऊ मेवा सिंह के घर रहने लगा। उनका गुड़गांव में बर्तनों का काम है। कुछ लोगों के भड़काने पर उसका चचेरा भाई सोनू अपनी पत्नी और उसके रिश्तों पर शक करने लगा। वह चार सितंबर को कंपनी से रात की शिफ्ट करने के बाद अपने कमरे पर लौटा था। उसके ताऊ का लड़का पवन उसे छत पर सोने के लिए ले गया।
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रात करीबन एक बजे सोते वक्त उस पर किसी ने हमला कर दिया। उसकी आवाज न निकले, इसलिए चादर से उसका चेहरा और मुंह दबा दिया गया। उसने किसी तरह से चादर हटाकर देखा तो उसके ताऊ का लड़का सोनू तीन लड़कों के साथ पास खड़ा था। दो युवकों ने उसके हाथ-पैर पकड़े और सोनू ने पहले उसके सिर पर मुसली से हमला कर दिया। बाद में गर्दन में चाकू भी मारा। इसके बाद जब उसकी आंखें खुली तो वह अस्पताल में था, लेकिन बोल नहीं पा रहा था।
पुलिस पहले नहीं समझ सकी इशारा
चाकू से हमला
बलविंद्र ने बताया कि अस्पताल में पुलिस के सामने ही उस पर हमला करने वाला उसके ताऊ का लड़का सोनू भी खड़ा था। सोनू पुलिस को झूठी कहानी बता रहा था। उसने आंखों के इशारे से पुलिस को सोनू की तरफ इशारा भी किया, लेकिन न पुलिस समझ सकी और न उसके माता-पिता। दो साल तक वह कहां और कैसे रहा, उसे कुछ याद नहीं। वह कोमा से बाहर आया, तो उसे सब याद आ गया। आरोप लगाया कि पुलिस उन पर आरोपियों के साथ समझौता करने का दबाव बना रही है। उन्हें अब भी ताऊ के परिवार से जान का खतरा बना हुआ है।
पहले सड़क हादसा बताया, फिर बोले चोरों ने मारा
बलविंद्र की मां ओमवती ने बताया कि उनके पास पांच सितंबर 2014 की सुबह उनके भतीजे सोनू का फोन आया। सोनू ने उनको बताया कि बलविंद्र का एक्सीडेंट हो गया है। गाड़ी लेकर जल्द गुड़गांव आ जाओ। वह सुबह 11 बजे गुड़गांव पहुंचे, तो बलविंद्र अस्पताल में भर्ती था। उसके जेठ मेवा सिंह और सोनू ने बताया कि बलविंद्र सड़क हादसे में घायल हो गया है। बलविंद्र के कोमा से लौटने के बाद आरोपी सोनू और उसके पिता मेवा सिंह का कहना है कि सोनू छत पर सो रहा था। शायद, चोरों ने ही बलविंद्र पर हमला किया था। उन्हें वारदात के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
फरवरी में सड़क हादसे के बाद आई यादाश्त
दो साल तक कोमा में रहे बलविंद्र की यादाश्त सड़क हादसे के बाद लौटी। बलविंद्र की मां ओमवती ने बताया कि बलविंद्र का इलाज हिसार के निजी अस्पताल से चल रहा है। वे हर सप्ताह बलविंद्र को हिसार लेकर जाते हैं। वह फरवरी में बलविंद्र को इलाज के लिए हिसार ले जा रहे थे। रास्ते में सफीदों के पास उनकी कार अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराने के बाद पलट गई। हादसे में कार चालक और वह घायल हो गए। इस हादसे के बाद ही दो साल बाद बलविंद्र के मुंह से मां निकला था। बलविंद्र उसी दिन से ही उन्हें आपबीती बताने की कोशिश कर रहा था।
पहले सड़क हादसा बताया, फिर बोले चोरों ने मारा
बलविंद्र की मां ओमवती ने बताया कि उनके पास पांच सितंबर 2014 की सुबह उनके भतीजे सोनू का फोन आया। सोनू ने उनको बताया कि बलविंद्र का एक्सीडेंट हो गया है। गाड़ी लेकर जल्द गुड़गांव आ जाओ। वह सुबह 11 बजे गुड़गांव पहुंचे, तो बलविंद्र अस्पताल में भर्ती था। उसके जेठ मेवा सिंह और सोनू ने बताया कि बलविंद्र सड़क हादसे में घायल हो गया है। बलविंद्र के कोमा से लौटने के बाद आरोपी सोनू और उसके पिता मेवा सिंह का कहना है कि सोनू छत पर सो रहा था। शायद, चोरों ने ही बलविंद्र पर हमला किया था। उन्हें वारदात के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
फरवरी में सड़क हादसे के बाद आई यादाश्त
दो साल तक कोमा में रहे बलविंद्र की यादाश्त सड़क हादसे के बाद लौटी। बलविंद्र की मां ओमवती ने बताया कि बलविंद्र का इलाज हिसार के निजी अस्पताल से चल रहा है। वे हर सप्ताह बलविंद्र को हिसार लेकर जाते हैं। वह फरवरी में बलविंद्र को इलाज के लिए हिसार ले जा रहे थे। रास्ते में सफीदों के पास उनकी कार अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराने के बाद पलट गई। हादसे में कार चालक और वह घायल हो गए। इस हादसे के बाद ही दो साल बाद बलविंद्र के मुंह से मां निकला था। बलविंद्र उसी दिन से ही उन्हें आपबीती बताने की कोशिश कर रहा था।
बेटे के लिए घर तक गिरवी रखा
प्रतीकात्मक तस्वीर
बलविंद्र के पिता सतपाल ने बताया कि वह घोड़ा बुग्गी चलाकर परिवार को पालन-पोषण करता है। बलविंद्र के कोमा में चले जाने के बाद उसके पास उसका इलाज करवाने के लिए पैसे नहीं थे। उनको बेटे के इलाज के लिए घर तक गिरवी रखना पड़ा। बेटे के इलाज में चार लाख रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं। बताया कि बलविंद्र के इलाज के लिए मारुति कंपनी में काम करने वाले उसके साथियों और आसपड़ोस के लोगों ने चंदा कर उन्हें पैसे दिए। इससे उन्हें बेटे का इलाज करवाने में सहायता मिली।
‘बस इतना बता दो मारा क्यों’
कोमा से लौटे बलविंद्र अपने माता-पिता से बार-बार बस एक ही बात पूछ रहे हैं कि बस इतना बता दो मारा क्यों। बलविंद्र चचेरे भाई सोनू, पवन और ताऊ मेवासिंह को बार-बार फोन कर बस यहीं पूछता है कि उसने क्या गलती की थी। अगर कुछ किया था तो बता देते वह उनके घर से चला जाता।
न उठ पाता है, न खा पाता है
बलविंद्र की मां ओमवती ने बताया कि अब भी बलविंद्र के शरीर के अंग काम नहीं करते। बलविंद्र सिर्फ बोल सकता है। बलविंद्र के पास हर वक्त एक व्यक्ति का रहना जरूरी है। बलविंद्र न खुद उठ सकता है, न चल सकता है। बलविंद्र को पानी भी चम्मच से पिलाया जा रहा है। बलविंद्र लड़खड़ाती जुबान में ही परिजनों से बात करता है।
पुलिस ने बलविंद्र के बयान दर्ज कर लिए हैं। बलविंद्र ने अपने ताऊ और उसके बेटे पर उसकी हत्या करने की कोशिश का आरोप लगाया है। बलविंद्र के आरोपों के बाद पुलिस ने कोर्ट में अर्जी देकर आरोपियों के पॉलीग्राफ की अनुमति मांगी थी। कोर्ट ने पॉलीग्राफ की अनुमति दे दी है। अब जल्द मधुबन लैब से पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए अनुमति मिल जाएगी। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
- मुकेश कुमार, जांच अधिकारी पालम विहार पुलिस थाना, गुड़गांव
‘बस इतना बता दो मारा क्यों’
कोमा से लौटे बलविंद्र अपने माता-पिता से बार-बार बस एक ही बात पूछ रहे हैं कि बस इतना बता दो मारा क्यों। बलविंद्र चचेरे भाई सोनू, पवन और ताऊ मेवासिंह को बार-बार फोन कर बस यहीं पूछता है कि उसने क्या गलती की थी। अगर कुछ किया था तो बता देते वह उनके घर से चला जाता।
न उठ पाता है, न खा पाता है
बलविंद्र की मां ओमवती ने बताया कि अब भी बलविंद्र के शरीर के अंग काम नहीं करते। बलविंद्र सिर्फ बोल सकता है। बलविंद्र के पास हर वक्त एक व्यक्ति का रहना जरूरी है। बलविंद्र न खुद उठ सकता है, न चल सकता है। बलविंद्र को पानी भी चम्मच से पिलाया जा रहा है। बलविंद्र लड़खड़ाती जुबान में ही परिजनों से बात करता है।
पुलिस ने बलविंद्र के बयान दर्ज कर लिए हैं। बलविंद्र ने अपने ताऊ और उसके बेटे पर उसकी हत्या करने की कोशिश का आरोप लगाया है। बलविंद्र के आरोपों के बाद पुलिस ने कोर्ट में अर्जी देकर आरोपियों के पॉलीग्राफ की अनुमति मांगी थी। कोर्ट ने पॉलीग्राफ की अनुमति दे दी है। अब जल्द मधुबन लैब से पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए अनुमति मिल जाएगी। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
- मुकेश कुमार, जांच अधिकारी पालम विहार पुलिस थाना, गुड़गांव