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वोटरों को पैसे बांटने पर पूर्व मंत्री के बेटे को कैद
ब्यूरो/अमर उजाला, कालका(पंचकूला)
Updated Wed, 19 Mar 2014 12:25 PM IST
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विधानसभा चुनाव के दौरान पैसे बांटने का दोष साबित होने पर अदालत ने हरियाणा के पूर्व मंत्री लक्ष्मण सिंह के बेटे भगत सिंह को एक साल कारावास और चार हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
न्यायाधीश कालका अमित सहरावत की अदालत ने धारा 171 ई के तहत एक साल की कैद व 2 हजार रुपये जुर्माना और 171 एफ के तहत एक साल की कैद व 2 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
दोनों धाराओं के तहत हुई सजा एक साथ चलेगी। अदालत में भगत सिंह ने उच्च न्यायालय में अपील दायर करने की दलील दी और उन्हें जमानत मिल गई। उनके वकील संजय भारती भी उनके साथ थे।
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लक्ष्मण सिंह हरियाणा में चार बार मंत्री रहे हैं और राज्यसभा सदस्य भी रह चुके हैं। उनके बेटे भगत सिंह वर्ष 2009 में कालका क्षेत्र से आजाद उम्मीदवार के तौर पर मैदान में थे। इसी दौरान उनके खिलाफ पैसे बांटने के आरोप में पिंजौर थाने में केस दर्ज हुआ था।
लोग पलटे बयान से तो प्रशासन को बनाया गवाह
वर्ष 2009 के विधानसभा चुनाव के दौरान भगत सिंह कालका से आजाद प्रत्याशी के तौर पर चुनावी मैदान में थे। चुनाव प्रचार के दौरान इस्लाम नगर में उनके स्टीकर लगी गाड़ियों को लोगों ने पकड़ा था।
आरोप था कि इन गाड़ियों से वोटरों को पैसे बांटे जा रहे थे। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया था। पांच साल तक चले इस केस में इस्लाम नगर के कई गवाह बयान से पलट गए थे। इसके बाद प्रशासन को ही गवाह बनाया गया था।
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न्यायाधीश कालका अमित सहरावत की अदालत ने धारा 171 ई के तहत एक साल की कैद व 2 हजार रुपये जुर्माना और 171 एफ के तहत एक साल की कैद व 2 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
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दोनों धाराओं के तहत हुई सजा एक साथ चलेगी। अदालत में भगत सिंह ने उच्च न्यायालय में अपील दायर करने की दलील दी और उन्हें जमानत मिल गई। उनके वकील संजय भारती भी उनके साथ थे।
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लक्ष्मण सिंह हरियाणा में चार बार मंत्री रहे हैं और राज्यसभा सदस्य भी रह चुके हैं। उनके बेटे भगत सिंह वर्ष 2009 में कालका क्षेत्र से आजाद उम्मीदवार के तौर पर मैदान में थे। इसी दौरान उनके खिलाफ पैसे बांटने के आरोप में पिंजौर थाने में केस दर्ज हुआ था।
लोग पलटे बयान से तो प्रशासन को बनाया गवाह
वर्ष 2009 के विधानसभा चुनाव के दौरान भगत सिंह कालका से आजाद प्रत्याशी के तौर पर चुनावी मैदान में थे। चुनाव प्रचार के दौरान इस्लाम नगर में उनके स्टीकर लगी गाड़ियों को लोगों ने पकड़ा था।
आरोप था कि इन गाड़ियों से वोटरों को पैसे बांटे जा रहे थे। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया था। पांच साल तक चले इस केस में इस्लाम नगर के कई गवाह बयान से पलट गए थे। इसके बाद प्रशासन को ही गवाह बनाया गया था।