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नाबालिग दोस्त ने दुष्कर्म कर बनाया था किशोरी को मां, पिता भी करता था रेप
अमरीश शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 13 Jul 2018 09:50 AM IST
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बीते मई माह में 14 वर्षीय नाबालिग द्वारा जीएमएसएच-16 में प्रीमेच्योर बच्ची को जन्म देने के मामले में पुलिस ने एक नाबालिग और पीड़िता के पिता को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने अब मामले में आरोपी पिता के खिलाफ जिला अदालत में चालान दायर कर दिया है।
वहीं नाबालिग आरोपी के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में चालान दायर किया गया है। चालान के मुताबिक किशोरी को प्रेग्नेंट करने वाला उसका नाबालिग दोस्त है। प्रीमेच्योर बच्ची का डीएनए उससे मैच हो गया है। वहीं पुलिस रिपोर्ट के अनुसार नाबालिग से उसका पिता भी कई बार दुराचार कर चुका है।
करीब 300 पेज के चालान में पुलिस ने आरोपी पिता को आईपीसी की धारा 376 (डी) व पॉक्सो एक्ट 4 और 6 के तहत आरोपी बनाया है। पुलिस ने नाबालिग के पिता के खिलाफ 25 गवाह बनाए हैं। इनमें पीड़िता और उसकी मां को मुख्य गवाह बनाया गया है।
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इसके अलावा डीएनए रिपोर्ट को भी चालान का हिस्सा बनाया गया है। अन्य गवाहों में नाबालिग की जांच करने वाली जीएमएसएच-16 अस्तपाल की डॉक्टर और डीएनए टेस्ट करने वाले एक्सपर्ट शामिल हैं। वहीं नाबालिग की काउंसिलिंग करने वाली सोशल वेलफेयर विभाग की टीम की सदस्यों को भी केस में गवाह बनाया गया है।
यह है मामला
शहर निवासी नौवीं कक्षा की 14 वर्षीय छात्रा पिछले महीने पेट दर्द की शिकायत पर मां के साथ जीएमएसएच-16 पहुंची थी। डॉक्टरों ने चेकअप के बाद उसे इमरजेंसी से गायनी वार्ड ट्रांसफर कर दिया। इसी दौरान नाबालिग पेट में ज्यादा दर्द होने पर वहीं नीचे बैठ गई और फिर एक प्री-मैच्योर बच्ची को जन्म दिया। हालांकि उस प्री-मैच्योर बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई थी। अस्पताल की ओर से इसकी सूचना पुलिस को दी गई।
इस पर सेक्टर-31 थाना पुलिस ने नाबालिग से दुराचार के मामले में अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया। वहीं नाबालिग की हालत देखते हुए सोशल वेलफेयर विभाग की मदद ली। बच्ची की काउंसिलिंग के बाद उसके पिता और नाबालिग आरोपी का नाम सामने आया। इसके बाद पुलिस ने आरोपी पिता को गिरफ्तार कर उसे जेल भेजा, वहीं नाबालिग को पकड़ जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के समक्ष पेश कर बाल सुधार गृह भेज दिया था।
पिता की हरकतों का दर्द बांटा तो दोस्त ने भी उठाया फायदा
सोशल वेलफेयर विभाग ने नाबालिग की काउंसिलिंग की तो पहले तो उसने कुछ बताया नहीं। उस वक्त तक वह काफी डरी और सहमी हुई थी। काउंसिलिंग टीम को उससे बात करने और उससे हकीकत जानने में काफी वक्त लग गया। जब महिला काउंसलर ने नाबालिग का भरोसा जीता तो उसने उससे आपबीती साझा की। पीड़िता ने बताया कि कैसे मां के घर में न होने का फायदा उठाकर उसके पिता ने उससे ज्यादती की और उसकी खामोशी का उसके पिता ने कई बार फायदा उठाया।
वह इस सबसे बहुत परेशान थी। इसी बीच उसने पड़ोस में रहने वाले एक नाबालिग से दोस्ती होने पर आपबीती बता दी। नाबालिग दोस्त ने कोई उपाय या इससे उसे बाहर निकालने की बजाय उलटा उसका फायदा उठाया और उससे दुष्कर्म किया। पिता और दोस्त की घिनौनी हरकतों के बावजूद उसने अपनी मां को इस बारे में कुछ नहीं बताया।
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वहीं नाबालिग आरोपी के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में चालान दायर किया गया है। चालान के मुताबिक किशोरी को प्रेग्नेंट करने वाला उसका नाबालिग दोस्त है। प्रीमेच्योर बच्ची का डीएनए उससे मैच हो गया है। वहीं पुलिस रिपोर्ट के अनुसार नाबालिग से उसका पिता भी कई बार दुराचार कर चुका है।
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करीब 300 पेज के चालान में पुलिस ने आरोपी पिता को आईपीसी की धारा 376 (डी) व पॉक्सो एक्ट 4 और 6 के तहत आरोपी बनाया है। पुलिस ने नाबालिग के पिता के खिलाफ 25 गवाह बनाए हैं। इनमें पीड़िता और उसकी मां को मुख्य गवाह बनाया गया है।
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इसके अलावा डीएनए रिपोर्ट को भी चालान का हिस्सा बनाया गया है। अन्य गवाहों में नाबालिग की जांच करने वाली जीएमएसएच-16 अस्तपाल की डॉक्टर और डीएनए टेस्ट करने वाले एक्सपर्ट शामिल हैं। वहीं नाबालिग की काउंसिलिंग करने वाली सोशल वेलफेयर विभाग की टीम की सदस्यों को भी केस में गवाह बनाया गया है।
यह है मामला
शहर निवासी नौवीं कक्षा की 14 वर्षीय छात्रा पिछले महीने पेट दर्द की शिकायत पर मां के साथ जीएमएसएच-16 पहुंची थी। डॉक्टरों ने चेकअप के बाद उसे इमरजेंसी से गायनी वार्ड ट्रांसफर कर दिया। इसी दौरान नाबालिग पेट में ज्यादा दर्द होने पर वहीं नीचे बैठ गई और फिर एक प्री-मैच्योर बच्ची को जन्म दिया। हालांकि उस प्री-मैच्योर बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई थी। अस्पताल की ओर से इसकी सूचना पुलिस को दी गई।
इस पर सेक्टर-31 थाना पुलिस ने नाबालिग से दुराचार के मामले में अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया। वहीं नाबालिग की हालत देखते हुए सोशल वेलफेयर विभाग की मदद ली। बच्ची की काउंसिलिंग के बाद उसके पिता और नाबालिग आरोपी का नाम सामने आया। इसके बाद पुलिस ने आरोपी पिता को गिरफ्तार कर उसे जेल भेजा, वहीं नाबालिग को पकड़ जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के समक्ष पेश कर बाल सुधार गृह भेज दिया था।
पिता की हरकतों का दर्द बांटा तो दोस्त ने भी उठाया फायदा
सोशल वेलफेयर विभाग ने नाबालिग की काउंसिलिंग की तो पहले तो उसने कुछ बताया नहीं। उस वक्त तक वह काफी डरी और सहमी हुई थी। काउंसिलिंग टीम को उससे बात करने और उससे हकीकत जानने में काफी वक्त लग गया। जब महिला काउंसलर ने नाबालिग का भरोसा जीता तो उसने उससे आपबीती साझा की। पीड़िता ने बताया कि कैसे मां के घर में न होने का फायदा उठाकर उसके पिता ने उससे ज्यादती की और उसकी खामोशी का उसके पिता ने कई बार फायदा उठाया।
वह इस सबसे बहुत परेशान थी। इसी बीच उसने पड़ोस में रहने वाले एक नाबालिग से दोस्ती होने पर आपबीती बता दी। नाबालिग दोस्त ने कोई उपाय या इससे उसे बाहर निकालने की बजाय उलटा उसका फायदा उठाया और उससे दुष्कर्म किया। पिता और दोस्त की घिनौनी हरकतों के बावजूद उसने अपनी मां को इस बारे में कुछ नहीं बताया।