हिमाचल के स्वास्थ्य मंत्री ने दी जान से मारने की धमकी
मंडी कांड में मारे गए युवक तनमिंदर सिंह उर्फ हैरी के परिजनों ने हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ठाकुर कौल सिंह पर उन्हें जान से मारने की धमकियां देने का आरोप लगाया है।
साथ ही केंद्र और पंजाब सरकार से इस मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। मंडी जिले में स्थित आईआईटी कमांद के निर्माणाधीन नॉर्थ कैंपस में 20 जून को मजदूरों और ठेकेदार के पक्ष के लोगों की बीच झड़प में पांच लोगों को पीट-पीट कर मार दिया गया था।
मरने वाले सभी पंजाब के रहने वाले थे। फतेहगढ़ निवासी हैरी के पिता तनजीत सिंह ने बुधवार को प्रेस क्लब में वकील रविंदर सिंह लवली, जगतार सिंह, सुखविंदर सिंह के साथ प्रेस कान्फ्रेंस कर ठाकुर कौल सिंह पर उक्त आरोप लगाए।
मृतक के पिता ने सुनाई पूरी दास्तां
तनजीत सिंह ने कहा कि उनका बेटा हैरी और उसका दोस्त लवली 17 जून को घर से मणिकरण साहिब माथा टेकने के लिए निकले थे।
रास्ते में वह मंडी में अपने दोस्त राजीव शर्मा के पास रुके। राजीव, बलजिंदर और गगनदीप ने आईआईटी में निर्माण कार्य कर रही कंपनी सुप्रीमो से एक हिस्से में काम का कॉन्ट्रैक्ट लिया था।
सुप्रीमो कंपनी का उनकी लेबर से पैसे के लेन-देन को लेकर विवाद चल रहा था। ठेकेदार राजीव ने लेबर से खतरा बताते हुए घटना से दो दिन पहले स्थानीय पुलिस में लिखित शिकायत दी थी। आरोप है कि पुलिस ने राजनीतिक दबाव में कोई कार्रवाई नहीं की।
उन्होंने आरोप लगाए कि घटना में हिमाचल के स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर का भी हाथ है। वहां कॉन्ट्रैक्टर से वसूली करने के लिए गुंडे आते थे और खुद को कौल सिंह ठाकुर का आदमी बताते थे।
मैंने किसी को कोई धमकी नहीं दी : कौल
हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री कौल सिंह ने कहा कि उन्होंने किसी को कोई जान से मारने की धमकी नहीं दी है। यह झूठ है। इस तरह के आरोप लगाने वाले उन्हें यह बताएं कि किस मोबाइल नंबर से उनको धमकी दी गई है। सोलन से संबंध रखने वाले एक ठेकेदार के कहने पर यह प्रेस वार्ता हुई है। उन्होंने मानवता के नाते घायलों को अस्पताल पहुंचाया। घटना वाले दिन वह स्वयं मौके पर नहीं थे। कोई भी जांच एजेंसी इसमें काम कर ले। वह किसी भी छानबीन को तैयार हैं।
बाउंसर नहीं था हैरी
हैरी के पिता के अनुसार उनका बेटा व अन्य कोई भी युवक बाउंसर नहीं थे और न ही उसे ऐसा काम करने की जरूरत थी। सभी संपन्न परिवारों से हैं।
पीजीआई से नहीं भागे
मंडी हादसे में घायल बलजिंदर सिंह, डॉ. गगनदीप सिंह, गुरविंदर सिंह, लवली व एक अन्य के पीजीआई से इलाज के दौरान फरार होने के बारे में एडवोकेट रविंदर सिंह ने कहा कि कोई भी कहीं से फरार नहीं हुआ है। सभी निजी अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। उन्हें पीजीआई में जान को खतरा था।