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कुल्लू हादसाः बचकर लौटी युवती की आपबीती सुनिए
Updated Sun, 26 Jul 2015 07:56 AM IST
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40 जानें लील लेने वाले कुल्लू बस हादसे में बचकर लौटी युवती की आपबीती किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। सुनिए।
पंजाब में बठिंडा के गांव लेलेवाला की संदीप कौर (23) ने पेड़ के साथ लटककर अपनी जान बचाई। शनिवार को पीजीआई से घर पहुंची संदीप कौर ने बताया कि वह मणीकरण जाने के लिए अपने गांव वालों के साथ एक टूरिस्ट बस में गई थी। सभी लोग श्री आनंदपुर साहिब में माथा टेककर मणिकरण साहिब के लिए रवाना हुए।
जब वह कुल्लू से आठ से दस किलोमीटर पीछे थे तो पहाड़ी रास्ते में बड़ा मोड़ आया। इससे बस पहाड़ से टकरा गई और बस के शीशे टूट गए। लोगों ने ड्राइवर को बस को ध्यान से मोड़ काटने के लिए बोला। इसके बाद ड्राइवर ने कहा कि वह बस को थोड़ा सा पीछे लेकर मोड़ काट लेता है। इसके बाद ड्राइवर जब बस को पीछे करने लगा तो उसको यह जजमेंट नही हुई कि उसने बस को कितना पीछे किया है।
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पंजाब में बठिंडा के गांव लेलेवाला की संदीप कौर (23) ने पेड़ के साथ लटककर अपनी जान बचाई। शनिवार को पीजीआई से घर पहुंची संदीप कौर ने बताया कि वह मणीकरण जाने के लिए अपने गांव वालों के साथ एक टूरिस्ट बस में गई थी। सभी लोग श्री आनंदपुर साहिब में माथा टेककर मणिकरण साहिब के लिए रवाना हुए।
जब वह कुल्लू से आठ से दस किलोमीटर पीछे थे तो पहाड़ी रास्ते में बड़ा मोड़ आया। इससे बस पहाड़ से टकरा गई और बस के शीशे टूट गए। लोगों ने ड्राइवर को बस को ध्यान से मोड़ काटने के लिए बोला। इसके बाद ड्राइवर ने कहा कि वह बस को थोड़ा सा पीछे लेकर मोड़ काट लेता है। इसके बाद ड्राइवर जब बस को पीछे करने लगा तो उसको यह जजमेंट नही हुई कि उसने बस को कितना पीछे किया है।
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बार-बार उस मंजर को याद कर भावुक हो रही थी
इसी कारण बस के पिछले टायर नदी की तरफ हो गए और भार ज्यादा होने के चलते बस नदी में गिर गई। बस ने दो पटखनी खाई तो बस के टूटे हुए शीशों में से उसका हाथ एक पेड़ पर अटक गया। उससे वह बस से बाहर आ गई और पेड़ के साथ लटक गई। करीब एक घंटे बाद लोगों ने उसे बचाया। थोड़ी देर बाद कुल्लू प्रशासन पहुंचा और बचाव कार्य शुरू कर दिया।
उसने बताया कि उसी के गांव का रहने वाला केवल सिंह बस की छत पर बैठा था। वह भी बस के गिरने से पहले छलांग लगाकर बच गया। इसी तरह गांव भागीबांदर का एक युवक भी बच गया। संदीप कौर बार-बार उस मंजर को याद कर भावुक हो रही थी। गांव लेलेवाला के एक ही परिवार के तीन सदस्य गए थे, जिनमें से केवल सिंह जिंदा लौट आया है। उसकी मां बलजीत कौर की मौत हो चुकी है और उसका सात साल के बेटे कालू का अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है।
उसने बताया कि उसी के गांव का रहने वाला केवल सिंह बस की छत पर बैठा था। वह भी बस के गिरने से पहले छलांग लगाकर बच गया। इसी तरह गांव भागीबांदर का एक युवक भी बच गया। संदीप कौर बार-बार उस मंजर को याद कर भावुक हो रही थी। गांव लेलेवाला के एक ही परिवार के तीन सदस्य गए थे, जिनमें से केवल सिंह जिंदा लौट आया है। उसकी मां बलजीत कौर की मौत हो चुकी है और उसका सात साल के बेटे कालू का अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है।