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खुशप्रीत मर्डर केस: पड़ोसी दोषी करार, सजा 18 को

Wed, 16 Apr 2014 12:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 16 Apr 2014 12:15 AM IST
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khushpreet murder case: Neighbor convicted, sentenced on 18 april

पांच वर्षीय खुशप्रीत का अपहरण कर हत्या के मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अतुल कसाना की अदालत ने उनके पड़ोसी सुखदेव सिंह, उसके भाई गुरमिंदर सिंह और उनके नौकर नंद किशोर को दोषी करार दिया है। अदालत ने सुखदेव और गुरमिंदर पर  302 (हत्या) 364ए (अपहरण), 120बी (साजिश रचने), 201 (सबूतों को नष्ट करने) और नौकर नंद किशोर को 364ए (अपहरण), 120बी (साजिश रचने), 201 (सबूतों को नष्ट करने) धाराओं के तहत दोषी ठहराया है। जबकि, पुलिस नौकर पर हत्या के आरोप साबित नहीं कर पाई।

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तीनों दोषियों को 18 अप्रैल को सजा

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अदालत 18 अप्रैल को तीनों दोषियों को सजा सुनाएगी। खुशप्रीत के परिजनों ने अदालत से हत्यारों को फांसी देने की मांग की है। अभियोजन पक्ष के वकील एनके नंदा ने बताया कि आरोपी सुखदेव और गुरमिंदर सिंह पर कर्ज हो गया था। कर्ज उतारने के लिए उन्होंने खुशप्रीत का अपहरण किया था। अदालत में कर्ज होने और फिरौती की रकम से उधार के रुपये चुकाने की बात साबित हो चुकी है। एनके नंदा ने बताया पुलिस ने फिरौती देने के समय अगर होशियारी दिखाती तो खुशप्रीत बचाया जा सकता था।

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अपहरण कर फिरौती ली और कर दी मासूम की हत्या

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बुडै़ल निवासी पांच वर्षीय खुशप्रीत का अपहरण 21 दिसंबर 2010 को घर के पास से किया गया था। इसके बाद उसके चाचा के मोबाइल फोन पर दस लाख रुपये की फिरौती की कॉल आई थी। खुशप्रीत के परिजनों ने अपहरणकर्ताओं को चार लाख दे दिए थे।

पांच जनवरी 2011 को अपहरणकर्ताओं ने खुशप्रीत की हत्या कर शव मोहाली में फेंक दिया था। इस पर बुडै़ल के लोगों ने पुलिस पर पथराव किया और पुलिस की गाड़ियों में आग लग दी थी। डीएसपी समेत सेक्टर-34 थाना प्रभारी पर गाज गिरी थी। मामले की जांच एडीसी ने की थी। बाद में डीएसपी विजय कुमार ने हत्या के मामले में खुलासा करते हुए खुशप्रीत के पड़ोसी सुखदेव और गुरमिंदर को दबोचा था। पुलिस ने मामले में शामिल उनके नौकर नंद किशोर को पकड़ा था।

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71 गवाहों ने दर्ज करवाए बयान

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खुशप्रीत की हत्या मामले में अभियोजन पक्ष ने अदालत में 71 गवाहों को पेश किया। जिसमें दुकानदार, बैंक अधिकारी, पुलिस जवान समेत अन्य थे। सभी गवाहों ने आरोपियों के खिलाफ बयान दर्ज करवाए। वहीं, बचाव पक्ष ने दो गवाहों के बयान दर्ज करवाएं थे।

मासूम की हत्या से लेकर अब तक एक नजर

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-21 दिसंबर 2010: बुडै़ल केपांच वर्षीय खुशप्रीत का घर के पास से अपहरण
-22 दिसंबर 2010: खुशप्रीत केचाचा केपास दस लाख की फिरौती की कॉल आई। सौदा चार में तय हुआ, चाचा चार लाख रुपये लेकर पंजाब में फिरौती की रकम अपहरणकर्ता को देकर आए
-05 जनवरी 2011: खुशप्रीत का शव चंडीगढ़ मोहाली बैरियर केपास चाय केबैग में पड़ा मिला। उसका गला पटके से दबा रखा था।

-22 मार्च 2011: डीएसपी विजय कुमार ने मामले का खुलासा करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया
-01 मई 2011: फिरौती लेने, अपहरण और सबूत मिटाने वाले नौकर नंद किशोर को पुलिस ने यूपी से गिरफ्तार किया

 -28 मई 2011: पुलिस ने खुशप्रीत की हत्या के मामले में 764 पेज की आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट अदालत में पेश की
-06 अगस्त 2011: अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए गुरमिंदर, सुखदेव ओर उनके नौकर नंदकिशोर पर अलग-अलग धाराओं के तहत आरोप तय किए

और खुशप्रीत के परिजनों की आंखो में आंसू आ गए

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बेटे के हत्यारों की सजा पर फैसला सुनने के लिए खुशप्रीत के परिजन सुबह ही अदालत पहुंच गए थे। खुशप्रीत की मां कुलविंदर कौर और पिता लखविंदर सिंह बार-बार मोबाइल फोन पर टाइम देखते रहे। करीब ढाई बजे खुशप्रीत का केस लगा। अदालत में आरोपी सुखदेव, गुरमिंदर और नौकर नंद किशोर को पुलिस ने पेश किया।

अदालत ने तीनों को दोषी करार दिया। खुशप्रीत के परिजनों की आंखो में आंसू आ गए। कुलविंदर कौर ने कहा कि आज मेरे पुत्र नू इंसाफ मिला है। आरोपियों नू फांसी दी सजा होनी चाही दी। उन्होंने बताया कि रब दे सामने दिन और रात आरोपियों लई फांसी दी सजा दी मांग करदी हे। पिता लखबीर सिंह ने कहा कि उन्हा नू अदालत पर पूरा विश्वास है। आरोपियों ने फांसी दी सजा ही होवेगी।

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