बहुचर्चित ज्योति हत्याकांड में नया मोड़
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बहुचर्चित ज्योति हत्याकांड में आखिरी पड़ाव पर चल रही सुनवाई में वीरवार को नया टर्न आ गया। वारदात में इस्तेमाल हुई कार के सीट कवर कोर्ट में पेश किए जाने थे, जो पेश नहीं किए जा सके। ये कवर लैब में जांच के लिए भेजे गए थे, लेकिन उनकी रिपोर्ट भी नहीं आई।
वहीं, गवाही देने पहुंचे एसआई ने कोर्ट में कहा कि उन्हें नहीं पता कि कवर कहां हैं? वहीं एक अन्य एएसआई के बयान दर्ज हुए, जिन्होंने कुछ नंबरों की डिटेल लेकर जांच में जुटे अन्य अधिकारियों को सौंपी थी।
कोर्ट में एसआई ने कहा- पता नहीं, कवर कहां हैं
दरअसल, पुलिस ने 20 जनवरी 2013 को कार के सीट कवर अपने कब्जे में लेकर जांच के लिए मधुबन लैब भेजा था। कवर की जांच कराने का मकसद उस पर कोई खून का धब्बा या अन्य सबूत की जांच था, लेकिन पहली जांच में कवर से कुछ नहीं मिला। इसके बाद पुलिस ने किसी अन्य लैब में जांच के लिए कवर भेजे, लेकिन उसकी रिपोर्ट अब तक नहीं आई।
वीरवार को एसआई कर्म सिंह को सीट कवर कोर्ट में पेश करने थे, लेकिन उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि सीट कवर कहां हैं? इसके अलावा उन्होंने खुद के सामने आरोपियों से हुई पूछताछ के बारे में भी बयान दिए। मुख्य आरोपी हिमाचल के विधायक रामकुमार चौधरी से भी कर्म सिंह के सामने पूछताछ हुई थी।
वहीं, एएसआई जय सिंह ने कोर्ट में बयान दिया कि उन्होंने कुछ नंबरों की सीडीआर लेकर जांच अधिकारियों को सौंपी थी, जिनमें रामकुमार चौधरी के भी नंबर थे। अब मुख्य रूप से डीएसपी वीरेंद्र सांगवान की गवाही रह गई है, जो इस केस में पहले जांच अधिकारी थे।
कौन थी ज्योति, विधायक चौधरी से क्या नाता?
आम लड़कियों की तरह ज्योति भी पूरी तरह आत्मनिर्भर लड़की थी। मूलरूप से होशियारपुर से 21 किलोमीटर दूर गांव भूंगा में रहने वाली ज्योति चंडीगढ़ में पीजी में रहती थी। 9 दिसंबर 2009 को ज्योति की छोटी बहन इशु की शादी में विधायक रामकुमार चौधरी अपने एक अन्य साथी के साथ आए थे व शगुन के तौर पर 2100 रुपए भी दिए थे। यही नहीं, खुद ज्योति ने रामकुमार चौधरी से परिचय करवाने के दौरान बताया था कि चंडीगढ़ में जिस कंपनी में वह काम करती है, के चौधरी साहब चेयरमैन हैं। उस शादी में रामकुमार चौधरी ने 2100 रुपए व उनके साथी ने भी 1100 रुपए शगुन दिया था।
ज्योति के पिता का कहना है कि ज्योति चौधरी के इलेक्शन में खर्च का लेन-देन देख रही थी। ज्योति ने अपने पिता बूटी राम को आखिरी बार फोन करके कहा था कि वह राम कुमार चौधरी के साथ जा रही है। अगले दिन उसकी लाश मिली थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक ज्योति प्रैग्नेंट थी और उसका अवैध तरीके से अबॉर्शन करवाया गया था।
22 नवंबर 2012: पंचकूला में मिला था ज्योति का शव
चंडीगढ़ में बतौर पीजी रहने वाली होशियारपुर की ज्योति का शव बीते वर्ष 22 नवंबर 2012 को पंचकूला के सेक्टर-21 में सड़क पर मिला था। उसके चेहरे पर गाड़ी चढ़ाकर पहचान मिटाने की कोशिश भी की गई थी। ज्योति का बाकी सामान तो था, लेकिन दोनों मोबाइल फोन नहीं मिले। इस मामले में युवती के पिता बूटी राम ने दून के विधायक राम कुमार चौधरी पर आरोप लगाए। इसके बाद विधायक राम कुमार और उनके साथी गुरमीत, धर्मपाल और परमजीत सिंह पर हत्या, धोखाधड़ी और एससीएसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।
प्रैग्नेंट थी ज्योति, अवैध तरीके से कराया अबॉर्शन
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक ज्योति प्रैग्नेंट थी और उसका अवैध तरीके से अबॉर्शन करवाया गया था। मोबाइल फोन डिटेल और टॉवर लोकेशन से खुलासा हुआ था कि मर्डर वाले दिन रामकुमार चौधरी भी हर उस जगह मौजूद थे। इसके अलावा पुलिस के पास ज्योति की बहन की शादी में राम कुमारचौधरी की मौजूदगी वाला भी एक फोटो है। इस खुलासे के बाद से ही रामकुमार चौधरी फरार था। हत्या के 46 दिन बाद आरोपी विधायक राम कुमार चौधरी ने पंचकूला सीजेएम कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था। इस मामले में गुरुवार को पंचकूला पुलिस ने तीन अन्य आरोपियों धर्मपाल, गुरमीत और तिलकराज को गिरफ्तार किया हैं।
बहन ने दिया चौंकाने वाला बयान
बहुचर्चित ज्योति हत्याकांड में लगातार कई गवाहों के बयान से मुकरने के बाद भी ज्योति की बहन अपने पूर्व बयान पर कायम रही। उसने कोर्ट में बताया कि हिमाचल के दून क्षेत्र के विधायक रामकुमार चौधरी और ज्योति के संबंध थे। ज्योति अक्सर चौधरी के बारे में बात करती थी और चौधरी अक्सर ज्योति से मिलने चंडीगढ़ आता था। ज्योति ने उसे यह भी बताया था कि चौधरी उससे शादी करेगा, लेकिन एमएलए का चुनाव जीतने के बाद उसने शादी से इनकार कर दिया।
बयान के मुताबिक, ज्योति ने बहन को बताया था कि चुनाव जीतने के बाद चौधरी कहने लगा कि अगर वह दलित से शादी करेगा तो उसकी बदनामी होगी। इसलिए वह शादी नहीं करेगा, लेकिन उसके बैंक खाते में हमेशा पैसे जमा कराता रहेगा। ज्योति की बहन ने कहा कि चौधरी ने ज्योति को इसलिए मारा है, क्योंकि वह उससे शादी करना चाहती थी।
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