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ज्योति मर्डर: 5 दिन में दिखेंगे 'वर्दी' के दाग
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
Updated Thu, 18 Sep 2014 02:10 PM IST
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ज्योति हत्याकांड में कोर्ट का फैसला आने के बाद गठित एसआईटी अब पुलिस की उन खामियों की जांच कर रही है, जिनकी वजह से सभी आरोपी बरी हो गए।
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एसआईटी में डीसीपी राहुल शर्मा, एसीपी धर्मवीर और डिप्टी डिस्ट्रिक अटॉर्नी गुरपाल सिंह को शामिल किया गया है। इनमें डीसीपी राहुल शर्मा टीम का नेतृत्व करेंगे और जांच करके पुलिस आयुक्त को रिपोर्ट सौंपेंगे।
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पुलिस के आला अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले की जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए पांच दिनों का वक्त दिया गया है, ताकि इसकी रिपोर्ट बनाकर प्रदेश सरकार को भेजी जा सके। इसी रिपोर्ट और कानूनी सलाह के आधार पर पुलिस अगली कार्रवाई करेगी।
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ज्योति हत्याकांड में इस्तेमाल दर्जनों मोबाइल नंबरों के टावर लोकेशन और जिस आईडी पर सिम खरीदे गए थे, उसका ब्योरा भी कंपनियों ने सुपुर्द कर दिया। इसके बावजूद फर्जी आईडी पर सिम जारी करने के मामले में कंपनियों से हासिल जानकारियाें के आधार पर आरोपियों पर उचित कार्रवाई नहीं की गई। मोबाइल सिम के लिए जरूरी दस्तावेजों की जांच के बाद नंबर जारी किए जाते हैं, लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिरकार सिम बेचने वालों व फर्जी आईडी देने वालों तक पुलिस क्यों नहीं पहुंच सकी।
इस मामले में विधायक रामकुमार चौधरी के एक मोबाइल नंबर के बारे में कहा गया कि उनका ड्राइवर सतपाल इसे उपयोग में ला रहा था, लेकिन जांच के बावजूद पुलिस सभी आरोपियों के बरी होने तक सतपाल तक नहीं पहुंच सकी और न ही उसे पेश किया जा सका।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले में तत्कालीन एसीपी वरिंद्र सांगवान पर आरोप लगाए जाने के बाद उन्हें एसआईटी से हटा दिया गया। बाद में तत्कालीन डीसीपी के नेतृत्व में चार्जशीट फ्रेम हुए, लेकिन चार्जशीट के बावजूद सभी आरोपी बरी हो गए। यानी पुलिस ने चार्जशीट में शामिल सभी पहलुओं और सुबूतों को गंभीरता से नहीं लिया, जिससे मामला कमजोर पड़ गया।