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जम्मू सेक्स स्कैंडल में सीबीआई जज ने किये बयान दर्ज
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 30 Oct 2013 12:34 PM IST
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जम्मू सेक्स स्कैंडल मामले में सीबीआई जज विमल कुमार की अदालत में पुलिस अधिकारी और सीबीआई अधिकारी के बयान दर्ज हुए।
जम्मू-कश्मीर पुलिस में तत्कालीन डीएसपी व वर्तमान में एसपी जावेद कौल ने अदालत में कहा कि उनके क्षेत्र के अधीन थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी।
उन्होंने तीन पीड़िताओं के बयान दर्ज किए थे। बाद में मामला सीबीआई को ट्रांसफर हो गया था। सीबीआई के एएसपी आरएस कुरील ने अदालत में कहा कि मामले में पीड़िताओं की डिसक्लोजर स्टेटमेंट उन्होंने ली थी।
इस दौरान पीड़िताओं ने वहां के स्थानीय होटल्स की पहचान भी की थी, जहां उनके साथ शोषण हुआ था। मामले की अगली सुनवाई 29 नवंबर को होगी।
वर्ष 2006 में मामला दर्ज कराया गया था। जम्मू एंड कश्मीर पुलिस को एक युवती का एमएमएस मिला था। इसके बाद पुलिस ने मामले की छानबीन कर शबीना केघर छापा मारा था।
इस दौरान एक दर्जन लड़कियां बरामद हुईं थी, उनमें से एक लड़की नाबालिग थी। लड़की ने खुलासा किया था कि शबीना युवतियों को मंत्री और पुलिस अफसरों के पास भेजती थी।
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पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज की थी। मंत्रियों और अफसरों के नाम सामने आने पर जांच सीबीआई को सौंपी थी। सितंबर 2006 में मामले को चंडीगढ़ जिला अदालत में ट्रांसफर दिया गया था। वहीं, तीन मामलों में मंत्री समेत छह लोग बरी हो चुके हैं।
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जम्मू-कश्मीर पुलिस में तत्कालीन डीएसपी व वर्तमान में एसपी जावेद कौल ने अदालत में कहा कि उनके क्षेत्र के अधीन थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी।
उन्होंने तीन पीड़िताओं के बयान दर्ज किए थे। बाद में मामला सीबीआई को ट्रांसफर हो गया था। सीबीआई के एएसपी आरएस कुरील ने अदालत में कहा कि मामले में पीड़िताओं की डिसक्लोजर स्टेटमेंट उन्होंने ली थी।
इस दौरान पीड़िताओं ने वहां के स्थानीय होटल्स की पहचान भी की थी, जहां उनके साथ शोषण हुआ था। मामले की अगली सुनवाई 29 नवंबर को होगी।
वर्ष 2006 में मामला दर्ज कराया गया था। जम्मू एंड कश्मीर पुलिस को एक युवती का एमएमएस मिला था। इसके बाद पुलिस ने मामले की छानबीन कर शबीना केघर छापा मारा था।
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इस दौरान एक दर्जन लड़कियां बरामद हुईं थी, उनमें से एक लड़की नाबालिग थी। लड़की ने खुलासा किया था कि शबीना युवतियों को मंत्री और पुलिस अफसरों के पास भेजती थी।
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पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज की थी। मंत्रियों और अफसरों के नाम सामने आने पर जांच सीबीआई को सौंपी थी। सितंबर 2006 में मामले को चंडीगढ़ जिला अदालत में ट्रांसफर दिया गया था। वहीं, तीन मामलों में मंत्री समेत छह लोग बरी हो चुके हैं।