जाना था कनाडा, पर किस्मत कहां ले गई?
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वह तो कनाडा जाने की तैयारी कर रहा था, उसे क्या पता था कि किस्मत उसे कनाडा नहीं, बल्कि कहीं और ले जा रही है। ऐसा ही कुछ हुआ माछीवाड़ा हादसे का शिकार हुए युवक का।
वीरवार की सुबह जिला लुधियाना में पड़ते माछीवाड़ा -समराला मार्ग पर हुए सड़क हादसे ने मोगा के एक ही परिवार के 6 सदस्यों समेत आठ लोगों की मौत से दो घरों के चिराग बुझ गए।
इस हादसे में जोगिंदर सिंह उसके दो युवा बेटे, कनाडा की तैयारी कर रहा उसकी बहन का इकलौता बेटा, कनाडा के टोरंटो निवासी उसकी चाची रणजीत कौर और उसका एनआरआई पोता महकदीप सिंह और सात बेटियों की मां उनकी घरेलू नौकरानी और इनोवा चालक शामिल हैं।
घर में अकेली पत्नी रह गई
हादसे की मोगा और गांव मैहना में गिल परिवार को तकरीबन 9 बजे सुबह सूचना मिली। इस के बाद लोगों को इस घटना बारे पता लगा वह चारपाई पर सुन्न बैठे बुज़ुर्ग के अलावा ओर पारिवारिक सदस्यों के साथ दुख सांझ करने आ रहे थे।
इस हादसे में परिवार के 6 सदस्यों की मौत बारे महिलाओं को दोपहर 2 बजे तक जानकारी नहीं थी। इस हादसे में हालांकि जोगिंदर सिंह मूल रूप में गांव मैहना का रहने वाले थे और वह यहां ठेकेदारी करते थे।
वह अपने परिवार समेत अपने एनआरआई चाचा सुरजीत सिंह की दशमेश नगर कोठी में रहते थे। इस हादसे में जोगिन्द्र सिंह और 12 कक्षा में पढ़ते बेटे तनवीर सिंह और दसवीं कक्षा में पढ़ते बेटे मनमीत सिंह की मौत होने से घर में अकेली उनकी पत्नी रानी रह गई हैं।
बहु को घर छोड़ गई, पोते को साथ ले गई
हादसे में हलाक एनआरआई महिला रणजीत कौर अपनी कनाडा से आई बहु सरबजीत की सेहत ठीक न होने के कारण घर छोड़ गई थी और पोते महकदीप सिंह को आनन्दपुर साहिब के दर्शनों के लिए साथ ले गई थी।
इस हादसे में हलाक उनकी घरेलू नौकरानी बलवीर कौर उर्फ वीरो सात बेटियों की मां थी और उसके घर में गायब बेटे का सुराग नहीं लग रहा।
यह सभी आनन्दपुर साहिब माथा टेकने के लिए मोगा से वीरवार की सुबह 6 बजे रवाना हुए थे। इनोवा चालक सुरिंदर पाल सिंह था। इस घटना की सूचना बाद यहां दशमेश नगर और गांव मैहना की गलियों में भी सन्नाटा पसरा हुआ था।