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सरकारी प्लॉट को अपना बताकर बेच साढ़े 6 लाख ठगे, केस दर्ज
कुलदीप शुक्ला/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 21 Mar 2016 04:10 PM IST
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- फोटो : file
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चंडीगढ़ में विकासनगर स्थित सरकारी प्लॉट नंबर-376 को अपना बताकर एक व्यक्ति से साढ़े छह लाख की ठगी करने का मामला सामने आया है। पीड़ित की शिकायत पर मौलीजागरां थाना पुलिस मामले की जांच में लगी है।
पुलिस में शिकायत न्यू दर्शनीबाग कॉलोनी मनीमाजरा में रहने वाले रफीक ने दर्ज करवाई। उन्होंने बताया कि प्लॉट लेने के सिलसिले में 2013 में उसकी मुलाकात रामदरबार फेज-1 निवासी राकेश से हुई। इस दौरान राकेश ने बताया कि उसका विकाश नगर स्थित प्लॉट नंबर-376बिकाऊ है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि राकेश से साढ़े छह लाख में सौदा पक्का हो गया। इसके तहत उसने डेढ़ लाख कैश एडवांस के रूप में दिए। इसके बाद 15 जून 2013 को पांच लाख कैश दिया। लेकिन, दस्तावेजों की जांच के बाद जमीन सरकारी निकली। इसके बाद उसने शिकायत मौलीजागरां थाना पुलिस को दर्ज करवाई।
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कॉलोनी ब्रांच से फर्जीवाड़ा का खुलासा
शिकायतकर्ता रफीक ने बताया कि सेक्टर-17 स्थित कॉलोनी ब्रांच में दस्तावेजों की जांच करवाई। इस दौरान पता चला कि प्लॉट नंबर-376 सन 1998 में सरकारी जमीन के तौर पर रजिस्टर्ड हो चुकी है।
इसके बाद उसने राकेश से इसकी शिकायत की। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पहले आरोपी ने पैसे धीरे-धीरे लौटाने की बात कबूली। लेकिन, बाद में पैसे वापस करने से साफ इनकार कर दिया।
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पुलिस में शिकायत न्यू दर्शनीबाग कॉलोनी मनीमाजरा में रहने वाले रफीक ने दर्ज करवाई। उन्होंने बताया कि प्लॉट लेने के सिलसिले में 2013 में उसकी मुलाकात रामदरबार फेज-1 निवासी राकेश से हुई। इस दौरान राकेश ने बताया कि उसका विकाश नगर स्थित प्लॉट नंबर-376बिकाऊ है।
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शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि राकेश से साढ़े छह लाख में सौदा पक्का हो गया। इसके तहत उसने डेढ़ लाख कैश एडवांस के रूप में दिए। इसके बाद 15 जून 2013 को पांच लाख कैश दिया। लेकिन, दस्तावेजों की जांच के बाद जमीन सरकारी निकली। इसके बाद उसने शिकायत मौलीजागरां थाना पुलिस को दर्ज करवाई।
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कॉलोनी ब्रांच से फर्जीवाड़ा का खुलासा
शिकायतकर्ता रफीक ने बताया कि सेक्टर-17 स्थित कॉलोनी ब्रांच में दस्तावेजों की जांच करवाई। इस दौरान पता चला कि प्लॉट नंबर-376 सन 1998 में सरकारी जमीन के तौर पर रजिस्टर्ड हो चुकी है।
इसके बाद उसने राकेश से इसकी शिकायत की। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पहले आरोपी ने पैसे धीरे-धीरे लौटाने की बात कबूली। लेकिन, बाद में पैसे वापस करने से साफ इनकार कर दिया।