पति से नाबालिग बेटी का रेप कराया फिर शादी, मां दोषी करार
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सौतेले पिता से 7वीं कक्षा में पढ़ने वाली मासूम बेटी का दुराचार कराने के मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने आरोपी पति व मां को दोषी करार दिया है। दोनों दोषियों की सजा का एलान 17 फरवरी को किया जाएगा।
इस मामले को अदालत ने अति दुर्लभ श्रेणी में रखा है। नवंबर 2014 को घटी इस घटना ने हर तरफ सनसनी फैला दी थी। एडीजे संगीता राय की अदालत ने 14 महीनों में इस मामले का निपटारा किया है।
पुलिस के अनुसार 22 नवंबर 2014 को नगर की एक कॉलोनी में एक नाबालिग को लोगों ने रोते हुए देखा। नाबालिग की जानकार महिला ने उससे रोने का कारण पूछा तो उसने जो बताया उसे सुनकर उसका दिल दहल गया। वह नाबालिग को पुलिस थाने ले आई और पुलिस अधिकारियों ने उसकी आपबीती सुनी तो वे भी दंग रह गए। नाबालिग ने महिला अधिवक्ता समक्ष दिए अपने बयानों में बताया कि वह सातवीं कक्षा में पढ़ती है। उसके पिता निक्कू राम से उसकी मां अंजू रानी का कुछ महीने पहले तलाक हो गया।
इसके बाद मां ने जगदीश सैनी निवासी ढाणी तेजा सिंह के साथ दूसरी शादी कर ली। कुछ दिन पहले रात के समय वह अपने छोटे भाई, मां अंजू और पिता जगदीश सभी एक ही बेड पर सोये हुए थे। मां व पिता ने उसे दूसरे कमरे में चलने को कहा तो उसने मना कर दिया। उसने मां से कहा कि उसे नींद आ रही है। इसके बाद मां गिलास में पानी लेकर आई और जगदीश ने एक गोली जबरन उसे दी। फिर मां ने उसे जबरन बेड पर लिटाया और हाथ उसे उसका मुंह बंद कर दिया।
इसके बाद पिता जगदीश ने उसके साथ बलात्कार किया। मां व पिता ने उससे कहा कि अगर इस बारे में किसी को बताया तो यह ठीक नहीं होगा। छह नवंबर 2014 को मां ने जबरन दोषी जगदीश के साथ उसकी मंदिर में शादी करवा दी। शादी के उपरांत जगदीश हर रोज जबरन उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने लगा।
फोन तोड़ दिया ताकि किसी से बात न हो सके
पीड़िता ने बयानों में बताया कि उसने कई बार 100 नंबर पर फोन करने पुलिस बुलाने की कोशिश की, लेकिन मां उसके हाथ से फोन छीन लेती थी। एक दिन जगदीश ने फोन छीनकर तोड़ दिया। 21 नवंबर को जगदीश ने उसके साथ दुष्कर्म किया।
22 नवंबर को वह घर के बाहर झाडू लगा रही थी तो पड़ोस में रहने वाली आंटी उसे रोती देखकर पास आई। आंटी ने रोने का कारण पूछा तो उसने सारी बात बता दी। इसके बाद पुलिस ने आरोपी पिता जगदीश कुमार व मां अंजू के खिलाफ बलात्कार, अपराध में सहयोग करने, बाल विवाह निषेध अधिनियम व पॉक्सो अधिनियम के तहत केस दर्ज करके दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
अदालत ने खारिज की मां की याचिका
घटना के बाद से ही पीड़िता व उसका छोटा भाई सरकार की देखरेख में हिसार स्थित आश्रम में रह रहे हैं। एक संस्था ने दोनों बच्चों के शिक्षा का सारा खर्च उठा रही है। हाल में पीड़िता ने आर्ट एंड क्रॉफ्ट व पेंटिंग प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल किया।
दोषी मां अंजू ने अदालत में याचिका लगाई थी कि उसे एक बार अपने बच्चों से मिलने दिया जाए। अदालत ने दोनों बच्चों के बारे में रिपोर्ट मांगी और सारी जानकारी मिलने के बाद अदालत याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि दोनों बच्चे आश्रम में सकुशल हैं और उनका पूरा ख्याल रखा जा रहा है।