5 हजार दो, 10वीं-12वीं के सर्टिफिकेट लो
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पुलिस ने 10वीं और 12वीं के जाली सर्टिफिकेट बनाकर बेचने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड के 10वीं और 12वीं के जाली सर्टिफिकेट पांच-पांच हजार रुपये में कंप्यूटर सेंटर मालिक खुलेआम बेच रहा था।
पैसे लेने के बाद आरोपी 80 से 90 प्रतिशत अंक तक के जाली सर्टिफिकेट बनाकर युवकों को देता था। इस काम में उसका साथ देता था पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड का क्लर्क। पुलिस ने इस गोरखधंधे में शामिल कुल चार आरोपियों को रविवार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया।
बोर्ड का क्लर्क खाली सर्टिफिकेट लाकर देता था
मामले के अनुसार पुलिस ने पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड के क्लर्क बठिंडा निवासी मलकीत सिंह, कंप्यूटर सेंटर चलाने वाले मोहाली सेक्टर-66 के राजिंद्र ठाकुर और ग्राहकों को लाने वाले होशियारपुर के अनिल कुमार और मोहाली आठ फेस निवासी राजीव कुमार को शनिवार देर रात गिरफ्तार किया था।
पुलिस को सूचना मिली थी कि एक कंप्यूटर सेंटर संचालक युवाओं को 10वीं और 12वीं के जाली सर्टिफिकेट बनाकर बेच रहा है। इस पर पुलिस ने जांच की तो परत दर परत मामला खुलता गया। इसमें कुछ अन्य लोगों के भी जुडे़ होने का पता चला। इसके बाद पुलिस ने सभी आरोपियों को शनिवार को सेक्टर-37 से गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने राजिंद्र ठाकुर के कंप्यूटर सेंटर से 23 सर्टिफिकेट बरामद किए। इनमें से 10 सर्टिफिकेट पर नाम लिखे हुए थे, जबकि 13 खाली थे। पुलिस ने सेंटर में मौजूद कंप्यूटर को भी जब्त कर लिया है। सेक्टर-39 थाना पुलिस ने चारों के खिलाफ धोखाधड़ी और जाली सर्टिफिकेट बनाने का मामला दर्ज किया है।
पुलिस ने आरोपियों को किया कोर्ट में पेश
रविवार को चारों आरोपियों को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया। वहां पुलिस ने गिरोह के सदस्यों से पूछताछ के लिए मलकीत सिंह और राजिंद्र ठाकुर का तीन दिन का पुलिस रिमांड मांगा। अदालत ने मलकीत सिंह और राजिंद्र ठाकुर को दो दिन के पुलिस रिमांड और राजीव व अनिल को 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
क्लर्क लाकर देता था खाली सर्टिफिकेट
पंजाब एजुकेशन बोर्ड का क्लर्क मलकीत सिंह आफिस से 10वीं और 12वीं के सर्टिफिकेट चोरी करके सेक्टर-37 के ठाकुर कंप्यूटर सेंटर मालिक राजिंद्र ठाकुर को उपलब्ध करवाता था। इसके बाद कंप्यूटर मालिक राजिंद्र ठाकुर कलर प्रिंटर और कंप्यूटर की सहायता से जाली सर्टिफिकेट बनाकर युवाओं को पांच-पांच हजार रुपये में बेचता था। सूत्रों की मानें तो क्लर्क इन सर्टिफिकेट की एंट्री अपने रिकार्ड में करने की कोशिश कर चुका था, लेकिन कामयाब नहीं हुआ।
पंजाब के युवाओं को फंसाते थे जाल में
जाली सर्टिफिकेट बनाने वाला गिरोह अपने जाल में पंजाब के गांव में रहने वाले युवाओं को फंसाते थे। अनिल और राजीव लोगों को फंसाकर कंप्यूटर सेंटर लेकर आते थे। बिना पेपर दिए ही 10वीं और 12वीं में पास करने का वादा कर उन्हें जाली सर्टिफिकेट हाथ में थमा देते थे। कई युवक इन जाली सर्टिफिकेट को प्राइवेट नौकरी हासिल करने के लिए बनवाते थे।
फर्जी सर्टिफिकेट से कॉलेज में एडमिशन
प्राथमिक जांच में पता चला कि कई युवकों ने तो इन जाली सर्टिफिकेट के सहारे कॉलेज में दाखिला ले लिया है। जाली सर्टिफिकेट के आधार पर कई युवक नौकरी भी हासिल कर चुके हैं। आपरेशन सेल अब कॉलेज और नौकरी पाने वाले युवकों का पता लगाने में जुटी है। पुलिस कंप्यूटर सेंटर से जब्त जाली सर्टिफिकेट लेने वाले युवकों के नाम और पते खंगाल रही है। ताकि उन्हें बुलाकर पूछताछ की जा सके।