डॉ. ललित वरमानी दुराचार के आरोप से बरी
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पंचकूला स्थित वरमानी क्लीनिक के मालिक व पूर्व जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ललित वरमानी पर पुलिस दुराचार का केस साबित नहीं कर पाई।
पीड़िता ने अदालत को बताया कि पुलिस ने उसे फंसाने की धमकी देकर उसे डॉक्टर वरमानी के खिलाफ रेप का पर्चा दर्ज कराने के लिए मजबूर किया था।
पीड़िता के इस बयान के बाद अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंशु शुक्ला की अदालत ने बुधवार को डॉ. वरमानी को रेप के आरोप से बरी कर दिया।
कोर्ट में महिला ने दिया ये बयान
महिला ने अदालत को बताया कि डॉक्टर ने उसके साथ दुराचार नहीं किया। वह और डॉ. वरमानी अच्छे दोस्त हैं। चार मई को वह डॉ. वरमानी के साथ खाना खाने सेक्टर-17 के शिवालिक व्यू होटल गई थी।
वह बात करने के लिए कमरे में चली गई। बाहर आई तो पुलिस ने उसे पकड़कर लिया और संदिग्ध कहकर मोबाइल नंबर ले लिया। पांच मई को सेक्टर-17 थाना पुलिस ने उसे पुलिस स्टेशन बुलाया और डॉ. वरमानी पर दुराचार का आरोप लगाने के लिए दबाव बनाया। पीड़िता के अनुसार उसे धमकी दी गई कि अगर वह डॉक्टर पर आरोप नहीं लगाए कि तो पुलिस उस पर ही मामला दर्ज करेगी।
पुलिस ने यह मामला दर्ज किया था
चंडीगढ़ के सेक्टर-11 निवासी तलाकशुदा महिला की ओर से सेक्टर-17 पुलिस ने गत पांच मई को डॉ. वरमानी पर दुराचार का मामला दर्ज किया था। शिकायत में लिखा गया था कि डॉक्टर ने उसे फोन कर इंटरव्यू के लिए चार मई को होटल में बुलाया था।
वह सेक्टर-11 से खुद उसे गाड़ी से ले गए थे। होटल में डॉक्टर ने कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ पिलाकर उससे दुराचार किया। सेक्टर-17 थाना पुलिस ने डॉ. वरमानी के खिलाफ दुराचार, साजिश रचने और जान से मारने की धमकी देने का मामला दर्ज किया था।
इस तरह घटनाक्रम, 79 दिन में कोर्ट का फैसला
5 मई : सेक्टर-17 पुलिस ने डॉ. ललित वरमानी पर दुराचार का मामला दर्ज किया।
15 मई : डॉ. वरमानी ने पुलिस के सामने सरेंडर किया, अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेजा।
3 जुलाई : डॉ. वरमानी के खिलाफ पुलिस ने 150 पेज की चार्जशीट दायर की।
15 जुलाई : डॉ. वरमानी पर दुराचार, साजिश रचने और धमकी देने के आरोप तय।
23 जुलाई : पीड़िता के बयान के बाद डॉ. वरमानी को अदालत ने बरी किया।
सवालों के घरे में पुलिस
-पुलिस ने जबरन एफआईआर क्यों दर्ज करवाई, पुलिस को इससे क्या फायदा हुआ?
-पुलिस ने मामले के संबंध में अदालत में सीएफएसएल के सुबूत क्यों नहीं पेश किए?
-मेडिकल में दुराचार की पुष्टि होने के बाजवूद पुलिस क्यों साबित नहीं कर सकी?
डॉ. ललित वरमानी ने कहा, 'मैं बेकसूर हूं। मुझे दुराचार मामले में जबरदस्ती फंसाया गया है। मैंने खुद को अपमानित महसूस किया। इस दौरान मैं बहुत मानसिक परेशानी से गुजरा हूं।'