पाकिस्तानियों का एक और काला सच आया सामने
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पाकिस्तानियों का एक और काला सच सामने आया है। पाकिस्तान के जो कैदी दूसरे देशों में सजा पूरी कर चुके हैं, उन्हें वापस बुलाने में कोई दिलचवस्पी नहीं ले रहा। सजा पूरी कर चुके 40 पाकिस्तानी कैदी अभी भी अमृतसर केंद्रीय जेल में बंद हैं।
पाक हाई कमीशन इनकी कोई सुध नहीं ले रहा है। इनमें 16 कैदी अपना दिमागी संतुलन खो चुके हैं। इनका मनोरोग चिकित्सक से इलाज कराया जा रहा।
केंद्रीय जेल अधीक्षक रविंद्र कुमार ने बताया सजा पूरी कर चुके पाकिस्तानी कैदियों की कुल संख्या 40 है। इसमें से 24 कैदी बिल्कुल ठीक है और 16 अपना दिमागी संतुलन खो चुकें है। दिमागी संतुलन खो चुके कैदियों का राज्य सरकार की ओर से इलाज कराया जा रहा है।
इन बीमार कैदियों में एक अब्दुल शरीफ निवासी बलूचिस्तान पाकिस्तान का रहने वाला है। वह वर्ष 1997 में वाघा बार्डर के पास सीमा सुरक्षा बलों के हत्थे चढ़ गया था। उसे एक वर्ष की सजा हुई। उसकी सजा पूरी हुए 17 वर्ष हो गए लेकिन पाकिस्तानी हाई कमीशन उसे वापस ले जाने के लिए कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है।
कई कैदियों की जेल में ही मौत हो गई है
केंद्रीय जेल अधीक्षक रविंद्र कुमार ने बताया जेल में 5 पाकिस्तानी ऐसे कैदी भी है जोकि मूक-बाधिर हैं। उन्हें न अपना नाम पता है और न ही घर का पता है।
ये अटारी व फिरोजपुर की सीमा पार करते समय सीमा सुरक्षा बल के हत्थे चढ़ गए। इनकी सजा खत्म हुए कई साल बीत चुकें है। कई कैदियों जेल में ही मौत हो गई है। अधीक्षक ने बताया कि दोनों देशों की ओर से इस तरह मुद्दों को हल करने के लिए प्रत्येक वर्ष दो बार वार्ता की जाती है।
हर बार वार्ता विफल हो जाती है। इसका खामियाजा उक्त कैदियों को भुगतना पड़ता है। उन्होंने बताया कि 28 मई को पाकिस्तानी हाई कमीशन की ओर से केंद्रीय जेल में पाकिस्तान के 4 कैदियों का वैरीफिकेशन किया है। इनमें 3 अमृतसर सेंट्रल व एक जम्मू सेंट्रल जेल में सजा पूरी होने के बाद बंद हैं।