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17 साल पुराने धोखाधड़ी के केस में सात बरी
अमर उजाला, चंडीगढ़।
Updated Sat, 02 Nov 2013 10:41 AM IST
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जिला अदालत ने 17 साल पुराने भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के मामले में शुक्रवार को चंडीगढ़ रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी के कर्मियों सहित सात आरोपियों को बरी कर दिया। दो आरोपियों की मौत हो चुकी है।
17 साल पहले विजिलेंस ने इनके खिलाफ मामला दर्ज किया था। 20 अगस्त, 1996 को दर्ज मामले के मुताबिक इन पर तीन वाहनों के फर्जी रोड टैक्स वाउचर बनाकर रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट तैयार करने का आरोप था।
इनमें दो कार और एक दोपहिया वाहन शामिल था। बरी होने वाले आरोपियों में विभाग में क्लर्क के रूप में कार्यरत रहे गुरमुख सिंह, रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी रहे दिलीप सिंह, ब्रांच इंचार्ज रहे मीत सिंह, राजेश कुमार और भीम सेन शामिल हैं।
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अन्य आरोपी राजिंद्र सिंह और यशपाल सिंह की मौत हो चुकी हैं और जतिंद्र कुमार भगौड़ा घोषित हो चुका है।
आरोप के मुताबिक इन्होंने जाली रोड टैक्स वाउचर में 2250 और 530-530 रुपये की राशि रोड टैक्स के रूप में दिखाई थी। इसे खजाना शाखा में जमा नहीं करवाया गया।
आरोप था कि ये प्रमाणपत्र आरोपियों ने धोखाधड़ी से ताराचंद अग्रवाल और नवजीवन नामक व्यक्तियों को जारी किए थे।
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17 साल पहले विजिलेंस ने इनके खिलाफ मामला दर्ज किया था। 20 अगस्त, 1996 को दर्ज मामले के मुताबिक इन पर तीन वाहनों के फर्जी रोड टैक्स वाउचर बनाकर रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट तैयार करने का आरोप था।
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इनमें दो कार और एक दोपहिया वाहन शामिल था। बरी होने वाले आरोपियों में विभाग में क्लर्क के रूप में कार्यरत रहे गुरमुख सिंह, रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी रहे दिलीप सिंह, ब्रांच इंचार्ज रहे मीत सिंह, राजेश कुमार और भीम सेन शामिल हैं।
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अन्य आरोपी राजिंद्र सिंह और यशपाल सिंह की मौत हो चुकी हैं और जतिंद्र कुमार भगौड़ा घोषित हो चुका है।
आरोप के मुताबिक इन्होंने जाली रोड टैक्स वाउचर में 2250 और 530-530 रुपये की राशि रोड टैक्स के रूप में दिखाई थी। इसे खजाना शाखा में जमा नहीं करवाया गया।
आरोप था कि ये प्रमाणपत्र आरोपियों ने धोखाधड़ी से ताराचंद अग्रवाल और नवजीवन नामक व्यक्तियों को जारी किए थे।