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कांग्रेस नेता के मर्डर की 47 साल पुरानी असली वजह आई सामने
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक।
Updated Mon, 25 Apr 2016 03:56 PM IST
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कांग्रेस नेता अशोक काका की हत्या
- फोटो : अमर उजाला
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करीब 47 साल पुराने संपत्ति विवाद ने कांग्रेस नेता एवं कारोबारी अशोक उर्फ काका की जिंदगी छीन ली। काका के परिजनों ने अपने दूर के रिश्तेदारों पर हत्या का शक जताया है, लेकिन पुलिस को और लोगों पर भी शक है। हालांकि पुलिस भी हत्या की वजह संपत्ति विवाद ही मान रही है, लेकिन पुलिस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है।
बताते हैं कि महाजन पड़ाव में अशोक का विवादित पुश्तैनी मकान था, जिसे उन्होंने बेच दिया। इसके बाद वह मॉडल टाउन में आकर रहने लगे। काका के एक परिजन ने बताया कि महाजन पड़ाव वाली संपत्ति साल 1969 से उनके परिवार के पास थी। काफी समय से इस मकान पर उनके दूर के एक रिश्तेदार अपना हक जता रहे हैं। आरोप है कि इस पर कब्जा करने के लिए पहले भी उन्होंने बदमाशों को भेजा था, जिन्होंने मकान में रहने वाले परिवार को भगा दिया था। बताया कि इस जमीन पर अपना हक जताने वाले रिश्तेदार एक धर्मशाला पर भी अपना हक जता रहे हैं। इन संपत्तियों के लिए अशोक के परिवार और दूर के रिश्तेदार के परिवार में काफी समय से विवाद चला आ रहा है। इसी वजह से काका के परिजनों ने इस परिवार पर हत्या का शक जताया है। हालांकि इसके अलावा विवाद में एक अन्य आदमी का नाम भी सामने आ रहा है। पुलिस जल्द ही इन सबसे पूछताछ कर सकती है।
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घर पहुंचते ही आई भाई के अलविदा होने की खबर
यह इत्तफाक ही है कि अशोक को गोली लगने से महज पांच मिनट पहले ही उनके बड़े भाई राजकुमार पार्क में टहलने के बाद अपने घर पहुंचे थे। जैसे ही वह घर में जाकर बैठे तो एक पड़ोसी ने उन्हें सूचना दी कि अशोक को किसी ने गोली मार दी है। राजकुमार के बेटे नीरज ने बताया कि सूचना मिलते ही वह पार्क के पास पहुंचे। लेकिन इससे पहले एक पड़ोसी उन्हें कार से लेकर पीजीआई पहुंच चुका था।
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आंखों के सामने छा गया अंधेरा : पड़ोसी
घायल होने के बाद काका को अस्पताल ले जाने वाले उनके पड़ोसी ने बताया कि वह पार्क के गेट पर खड़े थे। अचानक तेज धमाके की आवाज आई। जब वह पार्क के अंदर गये तो तीन युवक अशोक को गोली मारकर बाहर की तरफ आ रहे थे। उन्होंने बताया कि अशोक को गोली लगते ही उनकी आंखों के सामने अंधेरा छा गया। इसके बाद आरोपी हाथों में हथियार लहराते हुए उनके बगल से भाग गए। उन्होंने बताया कि एक बदमाश हरे रंग की शर्ट पहनी थी। बदमाशों के जाने के बाद जब वह अशोक पास पहुंचे तो उनकी सांसें चल रही थीं। लेकिन जब उन्हें पीजीआई लेकर पहुंचे तो उन्होंने दम तोड़ दिया था।
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बताते हैं कि महाजन पड़ाव में अशोक का विवादित पुश्तैनी मकान था, जिसे उन्होंने बेच दिया। इसके बाद वह मॉडल टाउन में आकर रहने लगे। काका के एक परिजन ने बताया कि महाजन पड़ाव वाली संपत्ति साल 1969 से उनके परिवार के पास थी। काफी समय से इस मकान पर उनके दूर के एक रिश्तेदार अपना हक जता रहे हैं। आरोप है कि इस पर कब्जा करने के लिए पहले भी उन्होंने बदमाशों को भेजा था, जिन्होंने मकान में रहने वाले परिवार को भगा दिया था। बताया कि इस जमीन पर अपना हक जताने वाले रिश्तेदार एक धर्मशाला पर भी अपना हक जता रहे हैं। इन संपत्तियों के लिए अशोक के परिवार और दूर के रिश्तेदार के परिवार में काफी समय से विवाद चला आ रहा है। इसी वजह से काका के परिजनों ने इस परिवार पर हत्या का शक जताया है। हालांकि इसके अलावा विवाद में एक अन्य आदमी का नाम भी सामने आ रहा है। पुलिस जल्द ही इन सबसे पूछताछ कर सकती है।
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घर पहुंचते ही आई भाई के अलविदा होने की खबर
यह इत्तफाक ही है कि अशोक को गोली लगने से महज पांच मिनट पहले ही उनके बड़े भाई राजकुमार पार्क में टहलने के बाद अपने घर पहुंचे थे। जैसे ही वह घर में जाकर बैठे तो एक पड़ोसी ने उन्हें सूचना दी कि अशोक को किसी ने गोली मार दी है। राजकुमार के बेटे नीरज ने बताया कि सूचना मिलते ही वह पार्क के पास पहुंचे। लेकिन इससे पहले एक पड़ोसी उन्हें कार से लेकर पीजीआई पहुंच चुका था।
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आंखों के सामने छा गया अंधेरा : पड़ोसी
घायल होने के बाद काका को अस्पताल ले जाने वाले उनके पड़ोसी ने बताया कि वह पार्क के गेट पर खड़े थे। अचानक तेज धमाके की आवाज आई। जब वह पार्क के अंदर गये तो तीन युवक अशोक को गोली मारकर बाहर की तरफ आ रहे थे। उन्होंने बताया कि अशोक को गोली लगते ही उनकी आंखों के सामने अंधेरा छा गया। इसके बाद आरोपी हाथों में हथियार लहराते हुए उनके बगल से भाग गए। उन्होंने बताया कि एक बदमाश हरे रंग की शर्ट पहनी थी। बदमाशों के जाने के बाद जब वह अशोक पास पहुंचे तो उनकी सांसें चल रही थीं। लेकिन जब उन्हें पीजीआई लेकर पहुंचे तो उन्होंने दम तोड़ दिया था।
भजन-कीर्तन के बीच चली गोलियां
अशोक काका की हत्या
- फोटो : self
पार्क में जिस जगह कारोबारी काका की हत्या की गई उससे कुछ दूरी पर महिलाएं भजन-कीर्तन कर रही थीं। बताते हैं कि पार्क में महिलाएं प्रतिदिन सुबह टहलने के बाद बेंच पर बैठकर भजन-कीर्तन करती हैं। शुक्रवार सुबह भी वह इकट्ठा होकर भजन गा रही थीं। बताते हैं कि बदमाश महिलाओं के आसपास ही टहल रहे थे। जैसे ही काका महिलाओं की भजन मंडली के नजदीक पहुंचे तो बदमाशों ने भजन-कीर्तन स्वर को गोलियों की आवाज से भयानक बना दिया। गोली की आवाज सुनते ही भजन कर रही महिलाएं हड़बड़ाकर इधर-उधर भाग गईं।
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कभी थानेदार तो कभी बदमाश बनकर धमकी दे रहे थे
काका की हत्या के मामले में एक तथ्य यह भी सामने आया है कि उन्हें पहले से ही धमकी मिल रही थी। काका के एक परिजनों ने एसपी को बताया कि अशोक के मोबाइल पर पिछले कई दिनों से अज्ञात कॉल आ रही थी। फोन करने वाला कभी खुद को थानेदार बताकर बात करता था तो कभी बदमाश। परिजनों का कहना है कि कभी-कभी तो फोन करने वाला खुद को थानेदार बताकर जबरदस्ती बात करने के लिए धमकाता था। जब उससे मामले की शिकायत पुलिस में करने की बात कही गई तो कॉल आनी बंद हो गई। लेकिन पिछले दो दिनों से फिर कॉल आ रही थी। परिजनों ने दूर के रिश्तेदारों पर ही धमकी भरी कॉल करने का शक जताया है। जिस नंबर से कॉल आती थी पुलिस उसे सर्विलांस पर लगाकर आरोपियों तक पहुंचने के प्रयास में जुट गई है।
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कांग्रेस ने दी सुरक्षा, भाजपा ने हटाई, निजी सुरक्षाकर्मी सुबह दस बजे आता है ड्यूटी पर
करीब चार साल पहले अशोक को धमकी दी गई थी। परिजनों ने बताया कि इसके बाद परिवार की तरफ से सुरक्षा की मांग की गई तो कांग्रेस सरकार में उन्हें सुरक्षा दे दी गई। मगर जब प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी तो अशोक की सुरक्षा खत्म कर दी गई और सुरक्षा कर्मी सत्यवान को हटा दिया गया। हालांकि इसके बाद काका की सुरक्षा के लिए निजी सुरक्षा गार्ड की तैनाती की गई थी। वह सुबह 10 बजे ड्यूटी पर आता है।
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कभी थानेदार तो कभी बदमाश बनकर धमकी दे रहे थे
काका की हत्या के मामले में एक तथ्य यह भी सामने आया है कि उन्हें पहले से ही धमकी मिल रही थी। काका के एक परिजनों ने एसपी को बताया कि अशोक के मोबाइल पर पिछले कई दिनों से अज्ञात कॉल आ रही थी। फोन करने वाला कभी खुद को थानेदार बताकर बात करता था तो कभी बदमाश। परिजनों का कहना है कि कभी-कभी तो फोन करने वाला खुद को थानेदार बताकर जबरदस्ती बात करने के लिए धमकाता था। जब उससे मामले की शिकायत पुलिस में करने की बात कही गई तो कॉल आनी बंद हो गई। लेकिन पिछले दो दिनों से फिर कॉल आ रही थी। परिजनों ने दूर के रिश्तेदारों पर ही धमकी भरी कॉल करने का शक जताया है। जिस नंबर से कॉल आती थी पुलिस उसे सर्विलांस पर लगाकर आरोपियों तक पहुंचने के प्रयास में जुट गई है।
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कांग्रेस ने दी सुरक्षा, भाजपा ने हटाई, निजी सुरक्षाकर्मी सुबह दस बजे आता है ड्यूटी पर
करीब चार साल पहले अशोक को धमकी दी गई थी। परिजनों ने बताया कि इसके बाद परिवार की तरफ से सुरक्षा की मांग की गई तो कांग्रेस सरकार में उन्हें सुरक्षा दे दी गई। मगर जब प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी तो अशोक की सुरक्षा खत्म कर दी गई और सुरक्षा कर्मी सत्यवान को हटा दिया गया। हालांकि इसके बाद काका की सुरक्षा के लिए निजी सुरक्षा गार्ड की तैनाती की गई थी। वह सुबह 10 बजे ड्यूटी पर आता है।