चंडीगढ़ रेप: पीड़िता के दोबारा बयान की अर्जी खारिज
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दुराचारी कांस्टेबल गैंग मामले में पीड़िता मंगलवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंशु शुक्ला की अदालत में दोबारा बयान दर्ज करवाने नहीं पहुंच पाई। अदालत ने तीन घंटे तक इंतजार करने के बाद पीड़िता द्वारा दायर की गई अर्जी को खारिज कर दिया।
वहीं पीड़िता सुबह से मामले की सुनवाई समाप्त होने तक अदालत परिसर में ही थी। सुनवाई खत्म होने के बाद पीड़िता कोर्ट रूम के बाहर पहुंची। पीड़िता को महिला एएसआई कोर्ट रूम में लेकर गई। लेकिन, अदालत ने पीड़िता की अर्जी खारिज करने और मामले की अगली सुनवाई 14 मई के लिए तय करने की जानकारी दी। सुनवाई के दौरान पीड़िता के परिजन अदालत के बाहर ही बैठे रहे। अगली सुनवाई पर गवाह अपने बयान दर्ज करवाएंगे।
कोर्ट ने पीड़िता का किया तीन घंटे तक इंतजार
अदालत में दो बजे सुनवाई शुरू हुई। पुलिस ने आरोपी कांस्टेबल अक्षय, अनिल, सुनील, जगतार और हिम्मत को अदालत में पेश कर दिया। पीड़िता की तरफ से वकील ब्रिजेश्वर जसवाल और बचाव पक्ष की ओर से रविंद्रा पंडित व हरीश भारद्वाज पेश हुए।
अदालत ने पीड़िता के वकील से अर्जी पर बयान दर्ज करवाने के लिए पीड़िता को बुलाने के आदेश दिए। पीड़िता के कोर्ट में नहीं पहुंचने पर अदालत ने करीब ढाई घंटे इंतजार के बाद पीड़िता की अर्जी खारिज कर दी। 21 मार्च को पीड़िता अपने बयानों से पलट गई थी। इसमें पीड़िता ने कांस्टेबलों द्वारा दुराचार और छेड़छाड़ की घटना करने और पहचानने से इंकार कर दिया था।
दोबारा बयान दर्ज करने की अर्जी दी थी
दो अप्रैल को पीड़िता ने अदालत में पेश होकर मामले में दोबारा बयान दर्ज करने की अर्जी दायर की थी। इसमें उसने कहा था कि उसपर कांस्टेबल की पत्नी कविता समेत अन्य परिजनों ने बयान पलटने का दबाव बनाया था।
इसके अलावा पीड़िता ने अदालत में वीडियो और आडियो रिकार्डिंग की सीडी अदालत में जमा करवाई थी। इस मामले में पीड़िता के वकील ब्रिजेश्वर जसवाल ने बताया कि पीड़िता शायद किसी दबाव के कारण बयान दर्ज करवाने नहीं पहुंची है।
संबंधित पक्षों ने ये कहा
बचाव पक्ष के वकील रविंद्रा पंडित ने बताया कि पीड़िता ने दबाव में बयान दर्ज करने के झूठे आरोप लगाए थे। अगर कांस्टेबलों के परिजनों ने दबाव बनाया ही था तो अदालत में पेश होकर बयान क्यों नहीं दर्ज करवाए। तीन घंटे तक अदालत पीड़िता के आने का इंतजार करती रही। पीड़िता सुबह से अदालत में ही घूम रही थी।
वहीं रेप की शिकार नाबालिग लड़की ने बताया कि दोबारा से बयान दर्ज करवाने की अदालत की तारीख को वह भूल गई थी। जब याद आया तो अदालत में पहुंची, लेकिन उस समय तक अर्जी खारिज हो चुकी थी। अदालत द्वारा खारिज अर्जी करने के बारे में कुछ नहीं कहना है।
पांच कांस्टेबलों पर दुराचार और छेड़छाड़ का आरोप
खुड्डा लाहौरा निवासी दसवीं क्लास की छात्रा ने 19 दिसंबर 2013 को चंडीगढ़ पुलिस के पीसीआर और क्राइम ब्रांच में तैनात पांच कांस्टेबलों पर दुराचार और छेड़छाड़ की शिकायत दी थी। इस पर पुलिस ने अक्षय सुनील, अनिल, जगतार और हिम्मत के खिलाफ केस दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया था।
पुलिस विभाग ने पांचों कांस्टेबलों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया था। जांच के लिए पुलिस विभाग ने डीएसपी कमला मीणा के नेतृत्व में एसआईटी बनाई थी। एसआईटी ने 21 फरवरी को पांचों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दायर की थी। अदालत ने अक्षय और सुनील पर पद का दुरुपयोग करने, अपहरण, दुराचार (पार्ट-2), धमकाने, साजिश रचने, पोस्को एक्ट की धारा-6 के तहत आरोप तय किए। वहीं, जगतार, हिम्मत और अनिल पर छेड़छाड़, गलत नियम से रोकने, आपराधिक साजिश रचने और पोस्को एक्ट की धारा-12 के तहत आरोप तय किए थे।