विज्ञापन घोटाला: 3 राज्यों में सीबीआई के छापे
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रेल डिवीजन फिरोजपुर में विज्ञापन के लिए अलॉट की गई विभागीय जमीन में हुए 6.09 करोड़ रुपये के घोटाले को लेकर सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है।
इसके तहत सोमवार को जांच एजेंसी ने तत्कालीन डीसीएम समेत पांच रेलकर्मियों के घर पर छापे मारे। इन अधिकारियों के खिलाफ दो दिन पहले ही केस दर्ज किया गया था। इस घोटाले को अमर उजाला ने प्रमुखता से उजागर किया था।
सीबीआई की टीम ने फिरोजपुर, लुधियाना, जालंधर, जम्मू और जोधपुर की नौ जगहों पर छापामारी की और आरोपियों की संपत्ति के अलावा घर से मिले दस्तावेज व अन्य सामान की सूची तैयार कर साथ ले गई। सूत्रों के अनुसार सीबीआई टीम ने सुबह सीएमआई अरविंद शर्मा की कोठी में छापामारी की।
टीम की अगुवाई सीबीआई के डीएसपी सतिंदर बिष्ट कर रहे थे। सीबीआई अधिकारियों ने सभी के मोबाइल फोन भी कब्जे में ले लिए हैं। सीबीआई ने पूर्ण चंद डूडी, सीएमआई अरविंद शर्मा, हेड क्लर्क नरेश शर्मा, क्लर्क मोहम्मद याकूब व लुधियाना में तैनात स्टेशन मास्टर आरके शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज किया है। डूडी आजकल रेलवे बड़ोदा हाउस दिल्ली में बतौर डीसीएम प्लानिंग तैनात हैं।
यह है मामला
फिरोजपुर डिवीजन के अमृतसर, लुधियाना, जालंधर, श्रीनगर, रेलवे पुल लुधियाना, अमृतसर-अंबाला-अमृतसर पैसेंजर ट्रेन, डीएमयू कश्मीर वैली एवं जनशताब्दी एक्सप्रेस में कामर्शियल प्रचार-प्रसार ठेकों में हेराफेरी की थी। फिरोजपुर डिवीजन में यह 6.09 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ था।
रेलवे खाते में जमा नहीं करवाया लाइसेंस फीस
कामर्शियल विभाग के अधिकारियों ने छह मामलों में कार्य शुरू करने के लिए आवंटन पत्र जारी नहीं किए और जिन तीन मामलों में आवंटन पत्र जारी किए, उनमें ठेके की प्रारंभिक औपचारिकताएं पूरी नहीं की। जिन तीन एडवरटाइजमेंट एजेंसियों को कार्य दिया था, उन्होंने अपने निर्धारित समय से लगभग 10-12 महीने अधिक काम किया।
हर ठेके में औसतन लाइसेंस शुल्क का भुगतान आठ से बारह माह तक विलंब से किया गया, लेकिन एजेंसियों पर कार्रवाई नहीं की गई और न ही जुर्माना लगाया गया। एजेंसियों ने लाइसेंस फीस की किश्तों का भुगतान नहीं किया और न ही एजेंसियों को नोटिस जारी हुआ।
एजेंसियों के खिलाफ किसी भी प्रकार की आउटस्टैंडिंग लंबित न होने का उल्लेख करते हुए कार्य निष्पादन का संतुष्टि प्रमाण-पत्र संबद्ध फाइलों की जांच किए बिना जारी किए गए। आरोपियों ने बैंक ड्राफ्ट, एफडीआर की तारीख में कांट-छांट की। एजेंसियों ने लाइसेंस फीस के चेक जमा करवाए लेकिन उन्हें रेलवे खाते में जमा नहीं करवाया गया।
ऐसे हुए एडवरटाइमेंट एजेंसियों को चेक वापस
एडवरटाइजमेंट एजेंसी को फायदा पहुंचाने के लिए उन्हें चेक वापस कर दिए गए। शुरूआती जांच में देखा कि दो ठेकों में एक ही नंबर का चेक लगा है। 23 मई 2008 को चेक नंबर-915660 से 19 लाख आठ हजार रुपये व इसी तिथि को इसी नंबर का दस लाख का चेक दूसरे दस्तावेजों पर भी लगा था। एजेंसी द्वारा दी गई एफडीआर समय अवधि पूरी होने से पहले ही एजेंसियों को वापस कर दी गई। इसके अलावा कई फाइलों में जाली प्रमाण-पत्र लगाए गए। संबंधित मामलों की फाइलों में से कई दस्तावेज गायब हैं।