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मंथली लेने के आरोपियों ने CBI पर लगाए आरोप

Thu, 11 Sep 2014 09:34 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 11 Sep 2014 09:34 AM IST
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Bribe Taker Policemans of Chandigarh Alleged CBI

दस हजार रुपये जबरदस्ती सीबीआई ने पेंट की जेब में डाले थे। जब मैंने विरोध किया तो सीबीआई टीम ने हाथापाई की और मेरे साथ बदसलूकी की। यह आरोप पार्किंग ठेकेदार से रिश्वत लेते पकड़े गए निलंबित इंस्पेक्टर राजेश शुक्ला ने सीबीआई पर लगाए हैं।

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बुडै़ल जेल में बंद इंस्पेक्टर राजेश शुक्ला ने जेल सुपरिंटेंडेंट के जरिए आईजी आरपी उपाध्याय को बुधवार को पत्र लिखा है। पत्र में निलंबित इंस्पेक्टर शुक्ला ने कहा कि डीएसपी बनने की लिस्ट में पहले नंबर पर था। एंटी ग्रुप ने उसे फंसवाया है।
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उन्होंने कहा कि सीबीआई टीम ने जबरदस्ती उसकी जेब में रिश्वत के दस हजार रुपये डाले थे। मैंने किसी भी ठेकेदार से कोई भी रुपयों की मांग नहीं की है। मेरी पुलिस जवानों और ठेकेदार के साथ कोई भी रिश्वत मांगने की बात रिकार्ड नहीं है।
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हाथापाई की और टॉर्चर भी किया

Bribe Taker Policemans of Chandigarh Alleged CBI

निलंबित इंस्पेक्टर शुक्ला ने कहा कि सीबीआई ने जब उसे पकड़ा तो हाथापाई की और उसे टार्चर भी किया। इसके अलावा सीबीआई ने रिमांड के दौरान अपने दफ्तर में परेशान किया और रिश्वत की बात कबूलने पर जोर दिया गया।

उन्होंने आईजी को गुहार लगाई है कि पूरे मामले की जांच सीनियर आफिसर से करवाई जाए ताकि सच सबके सामने आ सके। इसके अलावा राजेश शुक्ला ने पुलिस से बुडै़ल चौकी में लगे सीसीटीवी कैमरे की तीन सितंबर को शाम छह से दो बजे तक की फुटेज मांगी है।

इसके अलावा पुलिस स्टेशन सेक्टर 34 में लगे सीसीटीवी कैमरों की 28 अगस्त से तीन सितंबर की रिकार्डिंग मांगी है। उन्होंने टार्चर करने वाली सीबीआई टीम के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।

सीनियर अफसरों को जाता था मंथली का हिस्सा

Bribe Taker Policemans of Chandigarh Alleged CBI

पार्किंग ठेकेदार, कबाड़ियों और दुकानदारों से हर महीने इकट्ठी होने वाली लाखों रुपये की मंथली का हिस्सा सेक्टर-34 थाना प्रभारी राजेश शुक्ला अपने सीनियर अफसर को भी पहुंचाता था। कई अफसर बेगार भी करवाते थे।

यह खुलासा थाना प्रभारी राजेश शुक्ला ने सीबीआई के सामने किया। सीबीआई राजेश शुक्ला से सीनियर अफसरों केनामों के बारे में पूछताछ कर रही है। सूत्रों के अनुसार, वह अफसरों के नामों का खुलासा करने में सीबीआई का सहयोग नहीं कर रहा है।

वहीं, पकड़े गए हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल ने सीबीआई केसामने सेक्टर-34 से इकट्ठी होने वाली मंथली के सारे ठिकानों की जानकारी दे दी है।

हेड कांस्टेबल मुकेश कुमार और कांस्टेबल दिलबाज से सीबीआई ने अलग-अलग बैठाकर सवाल-जवाब किए। दोनों के बयान में अंतर पाया गया है।

बिना मंथली लिए ठेकेदारों का काम नहीं चलता

Bribe Taker Policemans of Chandigarh Alleged CBI

पार्किंग ठेकेदार से मंथली लेने के आरोप में पकड़े गए पुलिसवालों ने पूछताछ में काफी चौंकाने वाले खुलासे किए। सूत्रों का कहना है कि बिना मंथली दिए पार्किंग ठेकेदारों का काम नहीं चल सकता। मंथली के बदले में पुलिस उन्हें कई मामलों में फेवर देती है। अतिरिक्त वसूली को लेकर कई बार पार्किंग में वाहन चालक और कारिंद उलझ जाते हैं।

ऐसे में पुलिस ही फेवर कर मामला निपटाती है। इतना ही नहीं पार्किंग से गाड़ी चोरी होने पर या गाड़ी में तोड़फोड़ और सामान चोरी होने पर भी मदद की जाती है। इन मामलों में नियम है कि मामला पार्किंग ठेकेदार पर दर्ज हो।

पांच हजार है रेट

सूत्रों के अनुसार शहर के सभी इलाकों में पार्किंग ठेकेदारों से पांच हजार रुपये का मंथली रेट तय हैं। ज्यादातर को यह देना ही पड़ता है। इतना ही नहीं कई शराब ठेकेदार भी मंथली देते हैं।

अब दे रहे है दूर रहने की सलाह

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सभी थाना प्रभारियों में खलबली मची हुई है। आला अधिकारियों को सभी थाना, चौकी प्रभारी और उनके अधीन काम करने वाले कर्मचारियों को रिश्वत की राशि से दूर रहने के लिए कहा जा रहा है। कई थाना प्रभारियों ने तो अपने अधीन कर्मचारियों के साथ इस संबंध में बैठक भी की है।

एक इंस्पेक्टर ने कहा वह नहीं रहना चाहता था थाना प्रभारी

राजेश शुक्ला के सीबीआई द्वारा पकड़े जाने के बाद एक थाना प्रभारी ने पुलिस विभाग के अपने आला अधिकारियों को कहा है कि उसका तबादला कर दिया जाए। इस इंस्पेक्टर ने कहा है कि अब वह थाना प्रभारी नहीं रहना चाहता है उसे पद से हटा दिया जाए।

सीनियोरिटी लिस्ट में दूसरे नाम पर
निलंबित इंस्पेक्टर राजेश शुक्ला का नाम सीनियोरिटी लिस्ट में दूसरे नाम पर है। शुक्ला का अब डीएसपी बनना मुश्किल है क्योंकि शुक्ला का रिटायरमेट होने का कार्यकाल ही दो साल का बचा है और तब तक केस के समाप्त होने की संभावना कम ही है।
नहीं हुई जांच पूरी

जुलाई माह में डीएसपी पर लग चुका है आरोप

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जुलाई माह में इंस्पेक्टर यशपाल डीएसपी अंजिता चेपियाल पर रिश्वतखोरी का आरोप लगा चुके है। इंस्पेक्टर यशपाल ने औद्योगिक क्षेत्र पुलिस थाना प्रभारी रहते हुए आईजी को वाटसएप्प पर इसकी शिकायत की थी जिसकी आईजी एसपी परमिंदर सिंह को जांच सौंपी थी लेकिन अभी तक इसकी जांच पूरी नहीं हुई है।

जबकि 17 जुलाई ट्रैफिक हेड कांस्टेबल दलबीर सिंह को पीजीआई चौक पर 1500 रुपये की रिश्वत लेते दबोचा गया था। इस मामले में जिला अदालत में दलबीर सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। मालूम हो कि पिछले 5 माह में सीबीआई भष्ट्राचार के 10 मामले दर्ज कर चुकी है।

वाइस रिकार्डिंग में लिया एसएचओ का नाम

Bribe Taker Policemans of Chandigarh Alleged CBI

सीबीआई ने दो और तीन सितंबर के दिन कांस्टेबल दिलबाज सिंह और पार्किंग ठेकेदार से रिश्वत मांगने की वाइस रिकार्डिंग की है। रिकार्डिंग में कांस्टेबल दिलबाज सिंह कह रहा है कि एसएचओ के कहने पर रिश्वत ले रहा हूं।

एसएचओ को ही सारे देने है। कांस्टेबल ने रुपये मिलने के बाद जब एसएचओ को फोन कर कहा कि जनाब काम हो गया है। कहां आऊं। एसएचओ ने कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल को रुपये लेकर सेक्टर 34 गुरुद्वारा में बुला ।

रिमांड मिलने पर पुलिस जवान हुए हैरान
निलंबित इंस्पेक्टर राजेश शुक्ला समेत तीनों का पुलिस रिमांड मिलने पर अदालत में मौजूद पुलिस जवान हैरान थे। पुलिस जवान कहने में लगे थे कि जानबूझकर रिमांड दिया गया है। रिश्वत केस में कुछ नहीं है। सीबीआई केस साबित नहीं कर सकेगी।

यह है मामला

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सेक्टर 34 की पार्किंग के ठेकेदार ललित जोशी से दस हजार मंथली लेते हुए सीबीआई ने तत्कालीन सेक्टर 34 थाना प्रभारी राजेश शुक्ला, हेड कांस्टेबल मुकेश कुमार और कांस्टेबल दिलबाज सिंह को तीन सितंबर को गिरफ्तार किया था।

सीबीआई ने हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल को सेक्टर-34 से काबू किया था जबकि इंस्पेक्टर राजेश शुक्ला का पीछा कर उसे बुडै़ल जेल से गिरफ्तार किया गया था। सीबीआई ने इंस्पेक्टर की जेब से रिश्वत के दस हजार नगदी बरामद कर तीनों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था।

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