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13.50 करोड़ की हेराफेरी में असिस्टेंट मैनेजर पकड़ा
अमर उजाला, पंचकूला
Updated Fri, 08 Nov 2013 10:32 AM IST
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सरकारी खजाने से साढे़ 13 करोड़ रुपये का गोलमाल करने के मामले में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की संगरूर शाखा (पंजाब) के असिस्टेंट मैनेजर को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया है।
आरोपी नरेश कुमार को सीबीआई ने पंचकूला कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें 11 नवंबर तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। इस मामले में यह दूसरी गिरफ्तारी है। पहली गिरफ्तारी नीरज उर्फ गुरप्रीत की हुई थी, जिसने फर्जी खाता खुलवाया था। हालांकि, दो आरोपियों की गिरफ्तारी अब भी बाकी है।
हरियाणा पब्लिक हेल्थ एंड इंजीनियरिंग विभाग के पंचकूला सेक्टर-10 स्थित स्टेट बैंक के खाते से फर्जी चेक के जरिए करीब साढ़े 13 करोड़ रुपये निकाले गए थे।
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देहरादून स्थित उत्तराखंड ग्रामीण बैंक में फर्जी खाता खुलवाकर ट्रांजेक्शन हुआ था। सीबीआई के मुताबिक, नरेश कुमार ने ही अकाउंट में पैसे होने संबंधी जानकारी अन्य आरोपियों को दी थी।
सीबीआई के मुताबिक, देहरादून स्थित उत्तराखंड ग्रामीण बैंक में एक फर्जी खाता खुलवाया गया था। वहां तीन चेक लगाकर 13 करोड़ 13 लाख 10 हजार रुपये की राशि निकाली गई।
यह राशि हरियाणा पब्लिक हेल्थ एंड इंजीनियरिंग विभाग की थी और विभाग का खाता पंचकूला सेक्टर-10 स्थित स्टेट बैंक में मेसर्ज इंजीनियर इन चीफ हरियाणा पब्लिक हेल्थ एंड इंजीनियरिंग के नाम से है।
खाते से कब निकले पैसे, अरसे बाद पता चला
खाते से पैसे निकलने के कई दिन बाद विभाग को पता चला कि साढ़े 13 करोड़ रुपये की निकासी हो चुकी है। जांच में पता चला कि देहरादून से यह ट्रांजक्शन हुआ है।
इसके बाद विभाग की तरफ से बैंक के जनरल मैनेजर को शिकायत दी गई, लेकिन शिकायत देहरादून ट्रांसफर कर दी गई। क्योंकि ट्रांजेक्शन वहीं से हुआ था।
देहरादून के कान्वेंट रोड स्थित स्टेट बैंक के चीफ मैनेजर प्रेम पाल सिंह ने सीबीआई को शिकायत दी।
संगरूर से हुई गिरफ्तारी
सीबीआई ने 10 जुलाई को नीरज नाम के व्यक्ति के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471 व 120 बी के तहत दर्ज किया था।
सीबीआई की जांच में पता चला कि फर्जी खाता खुलवाकर चेक कैश कराने वाला संगरूर निवासी गुरप्रीत है। गुरप्रीत को 23 अक्तूबर को गिरफ्तार कर लिया गया था, जबकि इस गोलमाल में उसका साथ देने वाले नरेश कुुमार को छह नवंबर को देर शाम संगरूर से गिरफ्तार किया गया।
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आरोपी नरेश कुमार को सीबीआई ने पंचकूला कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें 11 नवंबर तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। इस मामले में यह दूसरी गिरफ्तारी है। पहली गिरफ्तारी नीरज उर्फ गुरप्रीत की हुई थी, जिसने फर्जी खाता खुलवाया था। हालांकि, दो आरोपियों की गिरफ्तारी अब भी बाकी है।
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हरियाणा पब्लिक हेल्थ एंड इंजीनियरिंग विभाग के पंचकूला सेक्टर-10 स्थित स्टेट बैंक के खाते से फर्जी चेक के जरिए करीब साढ़े 13 करोड़ रुपये निकाले गए थे।
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देहरादून स्थित उत्तराखंड ग्रामीण बैंक में फर्जी खाता खुलवाकर ट्रांजेक्शन हुआ था। सीबीआई के मुताबिक, नरेश कुमार ने ही अकाउंट में पैसे होने संबंधी जानकारी अन्य आरोपियों को दी थी।
सीबीआई के मुताबिक, देहरादून स्थित उत्तराखंड ग्रामीण बैंक में एक फर्जी खाता खुलवाया गया था। वहां तीन चेक लगाकर 13 करोड़ 13 लाख 10 हजार रुपये की राशि निकाली गई।
यह राशि हरियाणा पब्लिक हेल्थ एंड इंजीनियरिंग विभाग की थी और विभाग का खाता पंचकूला सेक्टर-10 स्थित स्टेट बैंक में मेसर्ज इंजीनियर इन चीफ हरियाणा पब्लिक हेल्थ एंड इंजीनियरिंग के नाम से है।
खाते से कब निकले पैसे, अरसे बाद पता चला
खाते से पैसे निकलने के कई दिन बाद विभाग को पता चला कि साढ़े 13 करोड़ रुपये की निकासी हो चुकी है। जांच में पता चला कि देहरादून से यह ट्रांजक्शन हुआ है।
इसके बाद विभाग की तरफ से बैंक के जनरल मैनेजर को शिकायत दी गई, लेकिन शिकायत देहरादून ट्रांसफर कर दी गई। क्योंकि ट्रांजेक्शन वहीं से हुआ था।
देहरादून के कान्वेंट रोड स्थित स्टेट बैंक के चीफ मैनेजर प्रेम पाल सिंह ने सीबीआई को शिकायत दी।
संगरूर से हुई गिरफ्तारी
सीबीआई ने 10 जुलाई को नीरज नाम के व्यक्ति के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471 व 120 बी के तहत दर्ज किया था।
सीबीआई की जांच में पता चला कि फर्जी खाता खुलवाकर चेक कैश कराने वाला संगरूर निवासी गुरप्रीत है। गुरप्रीत को 23 अक्तूबर को गिरफ्तार कर लिया गया था, जबकि इस गोलमाल में उसका साथ देने वाले नरेश कुुमार को छह नवंबर को देर शाम संगरूर से गिरफ्तार किया गया।