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कठुआ रेप केस : एक आरोपी ने मामला जुवेनाइल कोर्ट में सुनने की मांग की, 13 अगस्त को होगी सुनवाई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 11 Jul 2018 09:42 AM IST
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- फोटो : DEMO PHOTO
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जम्मू के कठुआ रेप कांड के एक आरोपी राजू (बदला हुआ नाम) ने खुद को नाबालिग बताते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर केस को जुवेनाइल कोर्ट में सुनवाई की अपील की है। इससे पहले पठानकोट की ट्रायल कोर्ट ने याची को नाबालिग न मानते हुए उसका केस जुवेनाइल कोर्ट में सुनने से इनकार कर दिया था।
मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान जम्मू -कश्मीर सरकार ने कोई हलफनामा दायर नहीं किया न ही सरकार की तरफ से कोई प्रतिनिधि कोर्ट में पेश हुआ। स्थिति को देखते हुए कोर्ट ने केस की सुनवाई 13 अगस्त तक स्थगित कर दी।
दायर याचिका में कहा गया है कि याची नाबालिग है और उसके मामले की सुनवाई जुवेनाइल कोर्ट में होनी चाहिए। इस मामले में हाईकोर्ट ने यह मामला जम्मू कश्मीर का मानते हुए सबसे पहले यह तय करेगा कि क्या वह इस मामले को सुनने का अधिकार रखता है या यह मामला उसे जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट में सुना जाए। इस मामले में हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर सरकार से जवाब तलब किया है।
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10 जनवरी 2018 को हीरानगर सब डिवीजन के रसाना गांव में आठ वर्षीय नाबालिग बच्ची का शव बरामद हुआ था। क्राइम ब्रांच के अनुसार बच्ची की सुनियोजित तरीके से अपहरण कर हत्या की गई थी। इस कृत्य का मकसद क्राइम ब्रांच ने खानाबदोश जनजाति को क्षेत्र से पलायन के लिए मजबूर करना बताया था। बाद में यह मामला शीर्ष अदालत चला गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में चेतावनी देते हुए कहा था कि हमारी असल चिंता मामले की निष्पक्ष सुनवाई को लेकर है। बच्ची के पिता ने अपने परिवार, परिवार के एक मित्र और अपनी वकील की सुरक्षा के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी। इसके बाद न्यायालय ने इन सभी को समुचित सुरक्षा प्रदान करने का आदेश पुलिस को दिए थे।
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मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान जम्मू -कश्मीर सरकार ने कोई हलफनामा दायर नहीं किया न ही सरकार की तरफ से कोई प्रतिनिधि कोर्ट में पेश हुआ। स्थिति को देखते हुए कोर्ट ने केस की सुनवाई 13 अगस्त तक स्थगित कर दी।
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दायर याचिका में कहा गया है कि याची नाबालिग है और उसके मामले की सुनवाई जुवेनाइल कोर्ट में होनी चाहिए। इस मामले में हाईकोर्ट ने यह मामला जम्मू कश्मीर का मानते हुए सबसे पहले यह तय करेगा कि क्या वह इस मामले को सुनने का अधिकार रखता है या यह मामला उसे जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट में सुना जाए। इस मामले में हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर सरकार से जवाब तलब किया है।
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10 जनवरी 2018 को हीरानगर सब डिवीजन के रसाना गांव में आठ वर्षीय नाबालिग बच्ची का शव बरामद हुआ था। क्राइम ब्रांच के अनुसार बच्ची की सुनियोजित तरीके से अपहरण कर हत्या की गई थी। इस कृत्य का मकसद क्राइम ब्रांच ने खानाबदोश जनजाति को क्षेत्र से पलायन के लिए मजबूर करना बताया था। बाद में यह मामला शीर्ष अदालत चला गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में चेतावनी देते हुए कहा था कि हमारी असल चिंता मामले की निष्पक्ष सुनवाई को लेकर है। बच्ची के पिता ने अपने परिवार, परिवार के एक मित्र और अपनी वकील की सुरक्षा के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी। इसके बाद न्यायालय ने इन सभी को समुचित सुरक्षा प्रदान करने का आदेश पुलिस को दिए थे।