छठे नवजात की मौत, डॉक्टर-एसएसमओ पर गाज
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पंजाब के लुधियाना के सिविल अस्पताल नए खुले मदर-चाइल्ड केयर अस्पताल में 2 दिन में ही 6 बच्चों की मौत हो गई। इससे सेहत विभाग में हड़कंप मच गया है।
सेक्रेटरी हेल्थ, डायरेक्टर हेल्थ और डिप्टी कमिश्नर की प्राथमिक जांच के बाद सेहत मंत्री सुरजीत कुमार ज्याणी ने काम में लापरवाही के चलते स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अलका मित्तल को सस्पेंड कर दिया है। अस्पताल के सीनियर मेडिकल अफसर डॉ. आरके करकरा का ट्रांसफर करने का आदेश जारी कर दिया किया गया है।
सेहत मंत्री ज्याणी ने सोमवार को सर्किट हाउस में आयोजित कांफ्रेंस में बताया कि विस्तृत जांच रिपोर्ट सात दिन में मांगी गई है। इस दौरान ज्याणी ने साफ किया है कि जांच के बाद हर आरोपी को सजा दी जाएगी। साथ ही यदि किसी भी बच्चे की मौत में सरकार की गलती पाई जाती है तो उसके परिवार को एक लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।
ज्याणी ने कहा कि प्राथमिक जांच में पाया गया कि डॉक्टर मौके पर नहीं पहुंची थी। ज्याणी ने कहा कि 24 घंटे में अस्पताल के स्टाफ ने 20 महिलाओं की डिलीवरी की है।
तीन बच्चे गर्भ में मर चुके थे
सोमवार को भी अस्पताल में डिलीवरी के दौरान एक बच्चे की मौत हो गई। हेल्थ डायरेक्टर डॉ. जतिंदर कौर का कहना है कि बच्चा गर्भ में ही सांस नहीं ले रहा था, इन हालत में मां को बचाना प्राथमिकता रहती है।
अस्पताल में नवजात की मौत के बाद सेहत विभाग के सचिव विकास गर्ग, हेल्थ डायरेक्टर और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. जतिंदर कौर ने सोमवार सुबह जांच शुरू की। प्राथमिक जांच के बाद हेल्थ डायरेक्टर डॉ. जतिंदर कौर ने कहा कि तीन बच्चे गर्भ में ही मृत (इंट्रा यूट्रिन डेथ) थे। दो बच्चों को बचाया जा सकता था, यहां पर स्टाफ की लापरवाही सामने आई है।
हेल्थ सेक्रेटरी ने कहा कि इस मामले की बारीकी से पड़ताल की जा रही है और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। हेल्थ डायरेक्टर ने कहा कि नर्स और मिड वाइफ डिलीवरी करवा सकती हैं, इसके लिए उनको बाकायदा ट्रेनिंग दी जाती है।
हेल्थ डायरेक्टर ने सिलसिलेवार मरीजों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि मरीज जसविंदर कौर के गर्भ में बच्चे की धड़कन ही बंद थी। जबकि मरीज सर्बजीत कौर का बच्चा काफी कमजोर था और गर्भ के अंदर पानी नहीं था, यह क्रोनिक फिटेल डिस्ट्रेस का मामला था, इसके लिए सिजेरियन आपरेशन करना था, लेकिन परिवार नहीं माना।
डॉक्टर की लापरवाही से मौत का आरोप
मनजीत कौर के गर्भ में पल रहा बच्चा भी एक्सीडेंटल हैमरेज की स्थिति में था। मां को बचाने के लिए सिजेरियन आपरेशन किया गया और बच्चा मरा हुआ पैदा हुआ। मरीज रीना रानी के केस में बच्चे ने पैदा होने के बाद सांस नहीं लिया। परिजनों को बताया गया कि अस्पताल में वेंटिलेटर की सुविधा नहीं है, उसे सीएमसी अस्पताल ले जा सकते हैं, लेकिन परिवार ने सहमति नहीं दी।
मरीज वंदना ने दोपहर 1.15 बजे बच्चे ने जन्म लिया और शाम को उसकी मौत हो गई। इस मामले में डॉक्टर की लापरवाही नजर आ रही है। हेल्थ डायरेक्टर ने कहा कि कहीं न कहीं नर्स एवं डॉक्टर के बीच तालमेल की कमी रही।
सिविल अस्पताल के सीनियर मेडिकल अफसर के दफ्तर में कांग्रेसी नेता हेल्थ सेक्रेटरी और डायरेक्टर से मिलकर रोष जताने पहुंचे। इसी दौरान डॉक्टरों की कमी का मुद्दा भी उठाया गया।
लुधियाना सेंट्रल से कांग्रेसी विधायक सुरिंदर डाबर का कहना है कि सिविल अस्पताल में नवजात की मौत के मामले को वह विधानसभा में उठाएंगे।
कांग्रेसियों ने इस घटना की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड बनाने की मांग की। कांग्रेसियों ने कहा कि जिन परिवारों के बच्चे गए हैं उनको पांच-पांच लाख रुपये मुआवजा दिया जाए। इस पर सेक्रेटरी ने कहा कि वे प्रस्ताव बनाकर सरकार के पास भेज देंगे। डाबर ने आरोप लगाया कि अस्पताल में स्टाफ की कमी का खामियाजा मरीजों को उठाना पड़ रहा है।