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बच्ची से स्कूल बस में करता था अश्लील हरकतें, अब भुगतेगा सजा
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 26 Sep 2016 09:32 PM IST
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Jail Shimla
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कंडक्टर स्कूल बस में 5 साल की बच्ची के साथ अश्लील हरकतें किया करता था। मामले में युवक को दोषी करार दिया गया है। चर्चित घटनाओं में से एक सेक्टर-38 स्थित स्टेपिंग स्टोन्स स्कूल की बस में पांच साल की बच्ची से छेड़छाड़ मामले में सोमवार को जिला अदालत ने बस कंडक्टर जगजीत सिंह को दोषी करार दिया है। अदालत उसे 28 सितंबर को सजा सुनाएगी।
अदालत के आदेश के साथ ही पुलिस ने जगजीत को कस्टडी में ले लिया। चंडीगढ़ स्टेट कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स की चेयरपर्सन की ओर से आईजी यूटी पुलिस को भेजी गई रिपोर्ट के बाद पिछले वर्ष 12 मई को सेक्टर-39 थाना पुलिस ने जगजीत के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। इसके बाद पुलिस ने जगजीत को 13 मई को गिरफ्तार किया था।
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अदालत के आदेश के साथ ही पुलिस ने जगजीत को कस्टडी में ले लिया। चंडीगढ़ स्टेट कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स की चेयरपर्सन की ओर से आईजी यूटी पुलिस को भेजी गई रिपोर्ट के बाद पिछले वर्ष 12 मई को सेक्टर-39 थाना पुलिस ने जगजीत के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। इसके बाद पुलिस ने जगजीत को 13 मई को गिरफ्तार किया था।
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ये है मामला
बच्ची के साथ रेप
- फोटो : डेमो फोटो
सेक्टर-38 में गत वर्ष कंडक्टर द्वारा पांच साल की बच्ची से छेड़छाड़ का मामला सामने आया था। बच्ची के पिता ने पुलिस को दी शिकायत में क हा था कि उनकी 5 वर्षीय बेटी सेक्टर-38 स्थित स्टेपिंग स्टोंस स्कूल में के जी में पढ़ती है। स्कूल की जिस बस से वह आती-जाती है उसका ड्राइवर जसबीर सिंह और कंडक्टर मुल्लांपुर निवासी जगजीत सिंह है।
7 मई, 2015 की घटना का हवाला देते हुए उन्होंने शिकायत में कहा कि उनकी बेटी स्कूल से छुट्टी के बाद जब घर पहुंची तो घबराई हुई थी। बच्ची ने प्राइवेट पार्ट में दर्द की शिकायत दी। बेटी ने बताया कि जगजीत उसके प्राइवेट पार्ट में छेड़छाड़ करता है।
पीड़िता के पिता ने घटना की जानकारी स्कूल प्रिंसिपल को दी, लेकिन कई दिन तक टालने के बावजूद उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। इस पर परिजनों ने अन्य लोगों के साथ मिलकर स्कूल गेट पर प्रदर्शन किया, तब मामला मीडिया के जरिए सामने आया।
7 मई, 2015 की घटना का हवाला देते हुए उन्होंने शिकायत में कहा कि उनकी बेटी स्कूल से छुट्टी के बाद जब घर पहुंची तो घबराई हुई थी। बच्ची ने प्राइवेट पार्ट में दर्द की शिकायत दी। बेटी ने बताया कि जगजीत उसके प्राइवेट पार्ट में छेड़छाड़ करता है।
पीड़िता के पिता ने घटना की जानकारी स्कूल प्रिंसिपल को दी, लेकिन कई दिन तक टालने के बावजूद उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। इस पर परिजनों ने अन्य लोगों के साथ मिलकर स्कूल गेट पर प्रदर्शन किया, तब मामला मीडिया के जरिए सामने आया।
स्कूल प्रबंधन के खिलाफ भी केस दर्ज की सिफारिश
सजा सुनने के बाद भाग
- फोटो : amar ujala
स्कूल बस में छेड़छाड़ के मामले को गंभीरता से न लेने वाले लापरवाह स्कूल प्रबंधन और बस ऑपरेटर के खिलाफ कमीशन ने पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश कर दी है।
कमीशन की चेयरपर्सन प्रो. देवी सिरोही के पैनल ने आठ घंटे की लंबी सुनवाई के बाद यह फैसला लिया था। प्रो. सिरोही ने स्कूल एडमिनिस्ट्रेटर संजीव कुमार और बस ऑपरेटर अमरीक सिंह के खिलाफ पॉक्सो की धारा 19-21 (2) के तहत एफआईआर दर्ज करने को कहा था।
देरी से चालान दायर करने पर मिली थी जमानत
सेक्टर-39 थाना पुलिस की लापरवाही के कारण जगजीत को जमानत मिल गई थी। अदालत ने जमानत देते हुए टिप्पणी की थी कि मामले में जांच अधिकारी एसआई के 60 दिन में चालान न पेश करने के कारण आरोपी जमानत का हकदार बना है।
इससे पहले देरी से चालान पेश करने पर अदालत ने जांच अधिकारी एसआई आरती गोयल को कड़ी फटकार लगा, पुलिस फोर्स ज्वाइन करते वक्त ली जाने वाली शपथ और कर्तव्यनिष्ठा की याद दिलाई थी। साथ ही कहा था कि चंद पुलिसकर्मियों की लापरवाही से ही खाकी बदनाम होती है।
कमीशन की चेयरपर्सन प्रो. देवी सिरोही के पैनल ने आठ घंटे की लंबी सुनवाई के बाद यह फैसला लिया था। प्रो. सिरोही ने स्कूल एडमिनिस्ट्रेटर संजीव कुमार और बस ऑपरेटर अमरीक सिंह के खिलाफ पॉक्सो की धारा 19-21 (2) के तहत एफआईआर दर्ज करने को कहा था।
देरी से चालान दायर करने पर मिली थी जमानत
सेक्टर-39 थाना पुलिस की लापरवाही के कारण जगजीत को जमानत मिल गई थी। अदालत ने जमानत देते हुए टिप्पणी की थी कि मामले में जांच अधिकारी एसआई के 60 दिन में चालान न पेश करने के कारण आरोपी जमानत का हकदार बना है।
इससे पहले देरी से चालान पेश करने पर अदालत ने जांच अधिकारी एसआई आरती गोयल को कड़ी फटकार लगा, पुलिस फोर्स ज्वाइन करते वक्त ली जाने वाली शपथ और कर्तव्यनिष्ठा की याद दिलाई थी। साथ ही कहा था कि चंद पुलिसकर्मियों की लापरवाही से ही खाकी बदनाम होती है।