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वाट्सऐप के जरिये अवैध खनन के लिए हो रही है रेकी

Tue, 17 Jul 2018 01:44 AM IST
Updated Tue, 17 Jul 2018 01:44 AM IST
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वाट्सऐप के जरिये अवैध खनन के लिए हो रही है रेकी
वाट्स एप के जरिये अवैध खनन के लिए हो रही रेकी
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- अपराधी सोशल साइट्स के जरिये अधिकारियों और कर्मियों की रेकी कर अवैध खनन के खेल को दे रहे अंजाम
- छह महीनों के दौरान पुलिस के सहयोग से की गई कार्रवाई में करीब 100 वाहनों को किया गया जब्त

अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। जिले भर में अवैध खनन पर रोक लगाने की पुलिस और प्रशासन की कोशिशों के तमाम दावे नाकाफी साबित हो रहे हैं। माइनिंग के लिए भले ही टास्क फोर्स गठित कर दी गई हैं लेकिन कर्मियों की कम संख्या और अपराधियों के बुलंद हौंसले व मजबूत सूचना तंत्र की बदौलत अवैध खनन का धंधा धड़ल्ले से चल रहा है। इससे सरकार को करोड़ों रुपये का हर माह चूना लगाया जा रहा है। आलम यह है कि अवैध खनन रोकने की कोशिश करने वाले ग्रामीणों को धमकाने या मारपीट करने से भी अपराधी गुरेज नहीं करते हैं। अवैध खनन पर शिकंजा कसने के लिए गठित टास्क फोर्स से एक कदम आगे अपराधी सोशल साइट्स के जरिये अधिकारियों और कर्मियों की रेकी कर, खनन के इस खेल को अंजाम दे रहे हैं।
खास बात तो यह है कि माइनिंग के इस अवैध धंधे का किंग कौन है, किसके इशारे पर की जा रही है, इसका खुलासा नहीं हो पा रहा है।

18 में से चार ब्लॉक में मिली है इजाजत
जिले भर में कुल 18 माइनिंग ब्लॉक है। इनमें से चार चल रहे हैं जबकि 11 के ऑक्शन की तैयारी है। बचे हुए ब्लॉक के ऑक्शन की भी तैयारी हैं। लेकिन सवाल यह है कि जिन ब्लॉक के लिए ऑक्शन नहीं हुए हैं, वहां भी अवैध तौर पर खनन का खेल जारी है। अवैध माइनिंग पर शिकंजा कसने के लिए जिला खनन अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी के अलावा प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की टास्क फोर्स भी गठित की गई है। जिन चार ब्लॉक में माइनिंग के लिए इजाजत मिली है उनमें चरनियां, पपलोहा और कीरतपुर, खुदाबख्श गहनोई और गोविंदपुर में माइनिंग के कांट्रेक्ट लिए गए हैं।
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घग्गर में भी जारी है माइनिंग
चंडीमंदिर के पास गांव रायपुर में भी धग्गर से ग्रेवल और रेत की माइनिंग का धंधा जोरों पर चल रहा है। इन्हें रोकने की कोशिश करने वालों को माइनिंग माफिया सरेआम धमकी देते हैं, जिन्हें रोकना मुश्किल हो रहा है। इस संबंध में पुलिस और खनन विभाग को भी शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन उनकी कार्रवाई से पहले आरोपी फरार हो जाते हैं। इतना हीं नहीं, सुबह-शाम या रात के वक्त पिंजौर, कालका, बरवाला, रायपुररानी के गांवों में अवैध माइनिंग का खेल चल रहा है।
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दो ब्लॉक पर एक कर्मी, कैसे कसेगा शिकंजा
खनन विभाग में अधिकारी, इंस्पेक्टर और गार्ड की कुल संख्या भी माइनिंग ब्लॉक की संख्या से काफी कम है। ऐसे में खनन विभाग की ओर से खनन पर रोक लगाने की तमाम कोशिशों के बावजूद रोक लग नहीं पा रही है। आलम यह है कि दो ब्लॉक के एक कर्मी हैं जो रात-दिन भी अगर मुस्तैद रहे तो इस पर शिकंजा कसना मुश्किल है। कर्मियों और अधिकारियों की संख्या में बढ़ोतरी के बगैर पुलिस के साथ भी अवैध माइनिंग पर शिकंजा कसना मुश्किल हो गया है।

अवैध खनन से चुका रहे हैं गाड़ियों के फाइनेंस की किश्त
अवैध खनन के धंधे में अधिकतर युवा हैं। रोजगार न मिलने पर युवाओं ने भारी वाहन फाइनेंस करवा कर, इसे मुफ्त के खेल में कमाई की शुरुआत कर रहे हैं। फाइनेंस की रकम चुकाने के लिए नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए अवैध खनन को अंजाम तक पहुंचा रहे हैं।

सोशल साइटस के जरिये होती है रेकी
अवैध माइनिंग के धंधे के बारे में एक सूत्र ने बताया कि दरअसल पुलिस और खनन विभाग के अधिकारियों के पहुंचने की सूचना एक-दूसरे तक पहुंचाने के लिए आरोपी वाट्स एप ग्रुप का इस्तेमाल कर रहे हैं। रेकी के जरिये दूर-दराज के इलाकों में धड़ल्ले से चल रही माइनिंग के बारे में आपस में एक दूसरे को सूचना दे देते हैं ताकि टीम के पहुंचने से पहले आरोपियों को फरार होने का मौका मिल सके। अवैध खनन के इस खेल पर शिकंजा कसने के लिए जरूरी है कि ऐसे सोशल साइट्स पर भी नजर रखते हुए इन आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

पिछले करीब छह महीनों के दौरान पुलिस के सहयोग से की गई कार्रवाई में करीब 100 वाहनों को जब्त किया गया। इस दौरान पकड़े गए लोगों से जुर्माने के तौर पर करीब 32 लाख रुपये वसूले गए हैं। इस संबंध में किसी भी सूचना पर तत्काल कार्रवाई की जाती है। चार ब्लॉक के अलावा कहीं भी माइनिंग नहीं की जा सकती है और शिकायत मिलने पर मामलों में एफआईआर भी होती है।

- राजीव धीमान, जिला खनन अधिकारी, पंचकूला।

खनन पर नजर रखने और कार्रवाई के लिए टास्क फोर्स गठित की गई है। पुलिस के साथ मिलकर विभागीय अधिकारियों की टीम लगातार कार्रवाई कर रही हैं। किसी भी हाल में आरोपियों को बख्शा नहीं जाएगा।
- मुकुल कुमार, उपायुक्त, पंचकूला।
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