{"_id":"5b29605b4f1c1bb51e8b6ce2","slug":"1529438301935-pkl-office-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मॉस्को में नौकरी दिलवाने के नाम पर 35 लाख रुपये से अधिक ठगने का आरोप","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
मॉस्को में नौकरी दिलवाने के नाम पर 35 लाख रुपये से अधिक ठगने का आरोप
Updated Wed, 20 Jun 2018 01:28 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मॉस्को में नौकरी दिलवाने के नाम पर 35 लाख रुपये से अधिक ठगने का आरोप
डीसीपी को दी शिकायत, पानी पीकर रात गुजारने के बाद वतन लौटने का मिला मौका
बिलिंग के बजाय बर्तन धोने और कार वॉशिंग का थोप दिया काम
नौ लौटे, अभी भी छह हैं फंसे
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। मॉस्को में नौकरी का झांसा देकर पढ़े लिखे युवकों से लाखों ऐंठने के मामले में पीड़ितों ने डीसीपी को शिकायत दी है। इस मामले की फिलहाल जांच चल रही है, जिसके बाद मामले में आगे की कार्रवाई होगी। आरोपी कंपनी के मालिक ने युवाओं से मॉस्को में एक रेस्तरां में बिलिंग काउंटर पर नौकरी का वादा किया था। लेकिन, मॉस्को पहुंचने के बाद नौकरी तो मिली नहीं, जब खाना खाने और रहने के लिए भी रुपये नहीं बचे तो नौ यंगस्टर्स को भारतीय दूतावास के एक अधिकारी के सहयोग से वतन लौटने का मौका मिल सका।
इस मामले की शिकायत में बताया गया है कि सेक्टर-11 स्थित एक इमिग्रेशन कंपनी के एमडी ने उनसे मॉस्को में नौकरी का वादा किया। 21-22 मार्च को कंपनी ने पासपोर्ट के साथ एक लाख रुपये की प्रति उम्मीदवार मांग की। इसे चुकाने के बाद वीजा पर स्टांप लगवाने के बाद भी 3.40 रुपये प्रत्येक युवक से वसूला। रुपये जमा करवाने के बाद पंचकूला की इस इमिग्रेशन कंपनी ने कुल 16 युवाओं का मास्को के लिए एयर टिकट करवाया। 29 अप्रैल को सभी मॉस्को के लिए रवाना हुए। लेकिन वहां पहुंचने के बाद उन्हें मास्को से दूर के एक गांव वोरोनेग में छोड़ दिया गया। नौकरी की बात पूछने पर कंपनी के मॉस्को में मौजूद एक प्रतिनिधि ने पहले युवकों को ट्रेनिंग के नाम कॉर वॉश करने का काम दिलवाया। इसके बाद काम ठीक न होने की बात कहते हुए रेस्तरां में बर्तन भी धुलवाए। एक गांव(वोरोनेग)में जब रहने, खाने या नौकरी का ठिकाना न रहा तो सभी युवकों ने देश लौटने का प्लान बनाया।
शिकायतकर्ता लखविंदर ने बताया कि उसके पिता नहीं है, लेकिन दो बच्चों और परिवार के लिए कमाई करने के लिए उसने मॉस्को जाने के लिए रिश्तेदारों से उधार में रुपये लिए थे। अमृतसर, ब्यास, अंबाला, रायपुररानी और कांगड़ा सहित आसपास के प्रदेशों के 16 में से अभी भी छह वोरोनेग में फंसे हुए हैं, जिन्हें कंपनी के प्रतिनिधि लगातार वहां रहने के लिए दबाव बना रहा है और उनके पासपोर्ट भी अपने कब्जे में ले लिया है। एक युवक मॉस्को में फंसा हुआ है।
विज्ञापन
लखविंदर ने बताया कि मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास के एक अधिकारी ने सभी नौ युवकों के लिए टिकट का इंतजाम करवाते हुए उन्हें भारत भेजने में मदद की। एक महीने 10 दिन के दौरान कई बार युवाओं को रात भर पानी पीकर, सड़क किनारे पार्क में गुजारना पड़ा। शिकायतकर्ताओं में अमृतपाल सिंह, अमन कुमार, रवि कुमार, प्रदीप कुमार, हरपाल सिंह सहित अन्य पीड़ित भी इस मामले में आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
विज्ञापन
डीसीपी को दी शिकायत, पानी पीकर रात गुजारने के बाद वतन लौटने का मिला मौका
बिलिंग के बजाय बर्तन धोने और कार वॉशिंग का थोप दिया काम
नौ लौटे, अभी भी छह हैं फंसे
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। मॉस्को में नौकरी का झांसा देकर पढ़े लिखे युवकों से लाखों ऐंठने के मामले में पीड़ितों ने डीसीपी को शिकायत दी है। इस मामले की फिलहाल जांच चल रही है, जिसके बाद मामले में आगे की कार्रवाई होगी। आरोपी कंपनी के मालिक ने युवाओं से मॉस्को में एक रेस्तरां में बिलिंग काउंटर पर नौकरी का वादा किया था। लेकिन, मॉस्को पहुंचने के बाद नौकरी तो मिली नहीं, जब खाना खाने और रहने के लिए भी रुपये नहीं बचे तो नौ यंगस्टर्स को भारतीय दूतावास के एक अधिकारी के सहयोग से वतन लौटने का मौका मिल सका।
इस मामले की शिकायत में बताया गया है कि सेक्टर-11 स्थित एक इमिग्रेशन कंपनी के एमडी ने उनसे मॉस्को में नौकरी का वादा किया। 21-22 मार्च को कंपनी ने पासपोर्ट के साथ एक लाख रुपये की प्रति उम्मीदवार मांग की। इसे चुकाने के बाद वीजा पर स्टांप लगवाने के बाद भी 3.40 रुपये प्रत्येक युवक से वसूला। रुपये जमा करवाने के बाद पंचकूला की इस इमिग्रेशन कंपनी ने कुल 16 युवाओं का मास्को के लिए एयर टिकट करवाया। 29 अप्रैल को सभी मॉस्को के लिए रवाना हुए। लेकिन वहां पहुंचने के बाद उन्हें मास्को से दूर के एक गांव वोरोनेग में छोड़ दिया गया। नौकरी की बात पूछने पर कंपनी के मॉस्को में मौजूद एक प्रतिनिधि ने पहले युवकों को ट्रेनिंग के नाम कॉर वॉश करने का काम दिलवाया। इसके बाद काम ठीक न होने की बात कहते हुए रेस्तरां में बर्तन भी धुलवाए। एक गांव(वोरोनेग)में जब रहने, खाने या नौकरी का ठिकाना न रहा तो सभी युवकों ने देश लौटने का प्लान बनाया।
विज्ञापन
शिकायतकर्ता लखविंदर ने बताया कि उसके पिता नहीं है, लेकिन दो बच्चों और परिवार के लिए कमाई करने के लिए उसने मॉस्को जाने के लिए रिश्तेदारों से उधार में रुपये लिए थे। अमृतसर, ब्यास, अंबाला, रायपुररानी और कांगड़ा सहित आसपास के प्रदेशों के 16 में से अभी भी छह वोरोनेग में फंसे हुए हैं, जिन्हें कंपनी के प्रतिनिधि लगातार वहां रहने के लिए दबाव बना रहा है और उनके पासपोर्ट भी अपने कब्जे में ले लिया है। एक युवक मॉस्को में फंसा हुआ है।
विज्ञापन
लखविंदर ने बताया कि मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास के एक अधिकारी ने सभी नौ युवकों के लिए टिकट का इंतजाम करवाते हुए उन्हें भारत भेजने में मदद की। एक महीने 10 दिन के दौरान कई बार युवाओं को रात भर पानी पीकर, सड़क किनारे पार्क में गुजारना पड़ा। शिकायतकर्ताओं में अमृतपाल सिंह, अमन कुमार, रवि कुमार, प्रदीप कुमार, हरपाल सिंह सहित अन्य पीड़ित भी इस मामले में आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।