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ये देश की पहली गौशाला है, जहां रहेगा गाय का वंशज रिकॉर्ड

Thu, 01 Jun 2017 09:17 AM IST
सुरिंदर पाल/अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
सुरिंदर पाल/अमर उजाला, जालंधर(पंजाब) Updated Thu, 01 Jun 2017 09:17 AM IST
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Cow's breeds record in noormahal
गाय
नूरमहल स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान स्थित कामधेनु गोशाला शायद देशभर में पहली ऐसी गौशाला होगी, जिसमें गायों का पुराना वंशज रिकॉर्ड साफ्टवेयर के माध्यम से अपडेट किया जाता होगा।
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कोई गाय 20 लीटर दूध देती है, तो उसे क्या बीमारी थी दूध कैसे बढ़ाया गया, आगे कैसे बढ़ाया जा सकता है, यह सारा रिकार्ड एक क्लिक पर नूरमहल स्थित गोशाला में सामने आ जाता है।
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यही वजह है कि केंद्र सरकार दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की गोशाला को देशभर की नंबर वन गोशाला से नवाजा गया है। 1 जून को केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह गोशाला के प्रबंधकों को नई दिल्ली में पुरस्कार देंगे।
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नूरमहल की गोशाला में 800 गाय हैं, जिनकी देखभाल के लिए सेवादारों की लंबी चौड़ी संख्या है। सारी गायें देसी नस्ल की हैं, जिसमें साहीवाल, गीर (गुजरात), थारपाकर (राजस्थान नस्ल) व कांकरेज (कच्छ की नस्ल) हैं। इनका पूरा रिकार्ड कंप्यूटराइज है और यहां पर यह प्रयास चल रहा है कि देसी नस्ल की गायों की संख्या को बढ़ाया जाता रहे। इस वजह से गायों का पूरा रिकॉर्ड व डाटा तैयार किया जाता है। गायों की वंशावली पर पूरा ध्यान केंद्रित किया जाता है। 
 

संस्थान में 800 गायों की हो रही देखभाल

Cow's breeds record in noormahal
गाय
उनकी पीढ़ी दर पीढ़ी पूरा मिलान किया जाता है कि नई पैदा होने वाली गायों में क्या फर्क आ रहा है और इनका दूध कैसे आगे बढ़ाया जा सकता है, आगे कैसे गायों की संख्या को बढ़ाया जाना है। यही वजह है कि जहां पहले नूरमहल की कामधेनु गोशाला में चार क्विंटल दूध रोजाना होता था, अब वह 13 क्विंटल तक पहुंच गया है।

गायों की रिसर्च के लिए अलग से सेक्शन तैयार किया हुआ है, जिसमें प्रोजनी सिलेक्शन काफी महत्वपूर्ण है। इसमें गायों का अपनी मां व दादी से पूरा प्रोफाइल मिलाया जाता है कि दादी का कितना दूध होता था और मां दो समय में कितना दूध देती थी। इस पूरी प्रक्रिया पर रोजाना टीम नजर रखती है।

‘नस्ल को बचाकर आगे बढ़ाना लक्ष्य’ 
गोशाला के प्रबंधक स्वामी चिम्यानंद महाराज का कहना है कि यह खुशी की बात है, हमारा लक्ष्य तो साफ है कि देश भर में गायों की देसी नस्ल को कैसे बचाना है और उनकी संख्या को कैसे बढ़ाना है। यही वजह है कि हमने गोशाला में कई रिसर्च कर रहे हैं।
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