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गोरक्षा पर बने कानून पर हाईकोर्ट की नजर, स्वत: लिया संज्ञान

Tue, 31 Jan 2017 09:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 31 Jan 2017 09:36 AM IST
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Cow protection to the eyes of the law at the High Court, automatically took cognizance
कोर्ट - फोटो : file photo

गो तस्करी पर रोक के लिए तय कानून को कारगर सिद्ध कराने की मंशा से अहम कदम उठाते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान के तहत सुनवाई का निर्णय लिया है। 

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गोवंश की रक्षा के लिए बनाए गए एक्ट के पालन को लेकर हाईकोर्ट ने हरियाणा पुलिस, पशुपालन विभाग तथा ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग को बैठक करने के आदेश दिए हैं।
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 इसके साथ ही गोवंश संरक्षण एवं गो संवर्धन एक्ट 2015 का बेहतर तरीके से पालन करने के बारे में अपनी रिपोर्ट हरियाणा सरकार को केस की अगली सुनवाई पर हाईकोर्ट में दाखिल करनी होगी।
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गो तस्करी मामले में कुरुक्षेत्र निवासी रेणुका चोपड़ा ने याचिका दाखिल कर कहा था कि हरियाणा और पंजाब में गोतस्करी हो रही है। यहां से गो वंश को दूसरे राज्यों में लेजाकर बूचड़खाने में वध कर दिया जाता है। 

याची ने कहा था कि इस काम में अधिकारी तस्करों की मदद करते हैं और प्रतीत होता है कि दोनों राज्य मवेशियों का वध करने वाले कारोबारियों के सप्लायर बने हुए हैं। नियमों के अनुरूप गाय को यूपी भेजने के लिए परमिट जारी नहीं किया जा सकता है। 

एक्ट बनाने की मंशा पूरी कराना ही उद्देश्य 

Cow protection to the eyes of the law at the High Court, automatically took cognizance
कोर्ट - फोटो : फाइल फोटो

याची के केस से पीछे हटने पर आई स्वत: संज्ञान की नौबत
इस दौरान पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से हलफनामा दाखिल कर बताया गया कि याची के आरोप बेबुनियाद है। कहा गया कि यूपी में भी गोवध पर पाबंदी है।

इसी वजह से वहां मवेशी ले जाने के लिए परमिट जारी किए जाते हैं। इसी बीच याची द्वारा पत्र के माध्यम से केस से पीछे हटने की बात कही गई थी। इसके बाद कोर्ट ने एडवोकेट दिव्या शर्मा को अमिकस क्यूरी नियुक्त किया था। 

पिछली सुनवाई के दौरान दिव्या शर्मा ने कोर्ट को बताया था कि याचिका दाखिल करने वाली रेणुका चोपड़ा इस केस से अभी नहीं हटी हैं और वे उन्हें बार-बार एसएमएस कर परेशान कर रही हैं। हाईकोर्ट ने इस पर पूर्व में दाखिल याचिका को समाप्त करते हुए नए सिरे से स्वत: संज्ञान लेते हुए मामले को सुनने का फैसला लिया। 

एक्ट बनाने की मंशा पूरी कराना ही उद्देश्य 
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हरियाणा में गो रक्षा को लेकर बनाए गए एक्ट का पालन सही तरीके से हो, यह सुनिश्चित करना ही स्वत: संज्ञान के तहत इस केस की सुनवाई का उद्देश्य है। ऐसे में एडवोकेट दिव्या शर्मा को हाईकोर्ट ने अमिकस क्यूरी के रूप में केस के साथ बनाए रखा है।

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