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कोविड जांच को लेकर उठे सवाल, केंद्र ने पूछा- आरटी पीसीआर टेस्ट सिर्फ 40 फीसदी क्यों?
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चंडीगढ़। शहर में बढ़ रहे कोरोना के मामलों को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय भी चिंतित है। बुधवार को स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण ने शहर की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पिछले 15 दिनों में केस दोगुने से ज्यादा हो गए हैं। उन्होंने प्रशासन की ओर से की जा रही कोरोना जांच पर भी सवाल उठाए।
स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण ने कहा कि चंडीगढ़ में एक मार्च तक औसतन कोरोना के 45 नए केस आते थे। 15 मार्च तक ये आंकड़े दोगुने से भी ज्यादा हो गए हैं। अब औसतन प्रतिदिन 111 नए केस सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि शहर की पॉजिटिविटी दर भी तेजी से बढ़ी है। सिर्फ 15 दिनों में पॉजिटिविटी दर 3.5 प्रतिशत से बढ़कर 7.4 हो गई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से की जा रही जांच पर भूषण ने कहा कि चंडीगढ़ में आरटी-पीसीआर टेस्ट कम किए जा रहे हैं। कुल जांच में आरटी-पीसीआर टेस्ट का शेयर 40 प्रतिशत है, यह बेहद कम है। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में रैपिड एंटीजन टेस्ट ज्यादा किए जा रहे हैं, जोकि ठीक नहीं है। उन्होंने चंडीगढ़ के स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए हैं कि आने वाले दिनों में आरटी-पीसीआर टेस्ट का शेयर 70 प्रतिशत किया जाए। यह भी कहा कि सभी राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों में कोरोना की जांच के आंकड़े बढ़ रहे हैं, लेकिन चंडीगढ़ में हफ्ते के आखिरी दिनों में कम हो जाते हैं। सलाह दी है कि जांच की संख्या को भी निरंतर बढ़ाया जाए।
केस बढ़े, लेकिन कंटेनमेंट जोन एक भी नहीं, यह लापरवाही : केंद्र
कोविड को लेकर चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों के साथ केंद्र ने बीते दिनों वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से एक बैठक की थी। बैठक में केंद्र ने पूछा था कि चंडीगढ़ में पिछले कुछ दिनों से लगातार केस बढ़ रहे हैं, लेकिन शहर में माइक्रो कंटेनमेंट जोन नहीं बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा था कि यह लापहरवाही है, क्योंकि अगर कोई केस आता है तो उसके संपर्क में आने वाले लोगों की पहचान जरूरी है। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए कंटेनमेंट जोन जरूरी है। इसके अलावा केंद्र ने अन्य राज्यों व विदेश से आने वाले लोगों की जानकारी रखने के निर्देश दिए हैं। केंद्र ने प्रशासन से कहा है कि वह जरूरत के अनुसार विदेश से आने वालों को लेकर फैसला ले सकता है।
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स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण ने कहा कि चंडीगढ़ में एक मार्च तक औसतन कोरोना के 45 नए केस आते थे। 15 मार्च तक ये आंकड़े दोगुने से भी ज्यादा हो गए हैं। अब औसतन प्रतिदिन 111 नए केस सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि शहर की पॉजिटिविटी दर भी तेजी से बढ़ी है। सिर्फ 15 दिनों में पॉजिटिविटी दर 3.5 प्रतिशत से बढ़कर 7.4 हो गई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से की जा रही जांच पर भूषण ने कहा कि चंडीगढ़ में आरटी-पीसीआर टेस्ट कम किए जा रहे हैं। कुल जांच में आरटी-पीसीआर टेस्ट का शेयर 40 प्रतिशत है, यह बेहद कम है। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में रैपिड एंटीजन टेस्ट ज्यादा किए जा रहे हैं, जोकि ठीक नहीं है। उन्होंने चंडीगढ़ के स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए हैं कि आने वाले दिनों में आरटी-पीसीआर टेस्ट का शेयर 70 प्रतिशत किया जाए। यह भी कहा कि सभी राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों में कोरोना की जांच के आंकड़े बढ़ रहे हैं, लेकिन चंडीगढ़ में हफ्ते के आखिरी दिनों में कम हो जाते हैं। सलाह दी है कि जांच की संख्या को भी निरंतर बढ़ाया जाए।
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केस बढ़े, लेकिन कंटेनमेंट जोन एक भी नहीं, यह लापरवाही : केंद्र
कोविड को लेकर चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों के साथ केंद्र ने बीते दिनों वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से एक बैठक की थी। बैठक में केंद्र ने पूछा था कि चंडीगढ़ में पिछले कुछ दिनों से लगातार केस बढ़ रहे हैं, लेकिन शहर में माइक्रो कंटेनमेंट जोन नहीं बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा था कि यह लापहरवाही है, क्योंकि अगर कोई केस आता है तो उसके संपर्क में आने वाले लोगों की पहचान जरूरी है। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए कंटेनमेंट जोन जरूरी है। इसके अलावा केंद्र ने अन्य राज्यों व विदेश से आने वाले लोगों की जानकारी रखने के निर्देश दिए हैं। केंद्र ने प्रशासन से कहा है कि वह जरूरत के अनुसार विदेश से आने वालों को लेकर फैसला ले सकता है।
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